
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का सबूत दिखाते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि पेपर लीक के जिम्मेदार ‘क्रिमिनल’ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटना ही होगा। उन्होंने छात्रों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की। राहुल गांधी 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र साहिल को पत्रकारों के समक्ष लाए और उसके शरीर पर पैलेट गन से लगी गंभीर चोटें दिखाईं। उन्होंने सुरक्षाबलों द्वारा पैलेट गन इस्तेमाल नहीं किए जाने के मोदी सरकार के दावे को झूठा बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि साहिल के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल तब किया गया, जब वे हाथ में हिंदुस्तान का तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे; उनकी एक आंख से दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि युवा पेपर लीक के बढ़ते मामलों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनपर पैलेट गन चलाई गईं और उन्हें लाठियों से मारा-पीटा गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने देश के भविष्य पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि युवा सालों कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो जाते हैं; 60-70 लाख रुपये में पेपर बेचे जाते हैं। छात्रों का पुरजोर समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्ट एवं क्रिमिनल शिक्षा मंत्री हैं और देश की शिक्षा व्यवस्था के बर्बाद होने की निशानी हैं। उन्होंने कहा कि उनके कारण ही युवा सड़कों पर हैं, उन्हें पद से हटाया जाए।
‘सदन में मुझे बोलने नहीं दिया गया’
इससे पहले संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के सदन में दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किरेन रिजिजू ने उनसे (राहुल गांधी) आग्रह किया कि वे कांग्रेस सांसदों से कहें, ताकि चर्चा शुरू हो। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार सदन में जब किसी व्यक्ति का नाम लिया जाता है तो उसे जवाब देने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने कहा, “जब मैं बोलने के लिए खड़ा हुआ, तो माइक बंद कर दिया गया और बोलने नहीं दिया गया।” राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों की तीन प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई चर्चा नहीं होगी।
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