
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही के कारण आज एक 10 साल के मासूम बच्चे की जान दांव पर लग गई। सड़क किनारे खुला हुआ एक मौत का कुआं (गटर) मासूम के लिए काल बनने ही वाला था, कि ऐन वक्त पर पहुंचे एक अधिकारी ने देवदूत की भूमिका निभाकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते किए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन से एक बहुत बड़ा हादसा टल गया।जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना यमुना प्राधिकरण की दूसरी तरफ, यथार्थ हॉस्पिटल के पास की है। यहाँ सड़क किनारे एक गटर का ढक्कन काफी समय से खुला हुआ था। वहां से गुजर रहा एक 10 साल का मासूम बच्चा अचानक पैर फिसलने के कारण उस गहरे गटर में जा गिरा। बच्चे को आंखों के सामने डूबता देख उसकी मां ने चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। मां की चीख-पुकार सुनकर वहां से गुजर रहे पी.टी.ओ राजेश मोहन और उनकी टीम ने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई। मामले की गंभीरता और बच्चे की जान को खतरे में देख, एआरटीओ राजेश मोहन और उनकी टीम के सदस्यों ने बिना एक पल गंवाए खुद गटर में उतरने का फैसला किया। कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने बच्चे को गटर से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि वीआईपी इलाकों और बड़े अस्पतालों के पास भी इस तरह गटरों को खुला छोड़ देना सीधे-सीधे जनता की जान से खिलवाड़ है। घटना का पता चलते ही स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर एआरटीओ राजेश मोहन और उनकी टीम की जमकर तारीफ हो रही है।
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