
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
पंचकूला:पंचकूला में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, आधुनिक और जन केंद्रित बनाने की दिशा में पुलिस प्रशासन ने एक नई और अनूठी पहल की शुरुआत की है। पारंपरिक वाहन आधारित और पैदल गश्त के साथ अब पंचकूला पुलिस ने घुड़सवार पुलिस पेट्रोलिंग को मैदान में उतारा है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधों पर नियंत्रण स्थापित करना नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों तक पुलिस की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना भी है जहां सामान्य वाहनों की आवाजाही सीमित या कठिन होती है। इसी कड़ी में बीते दिन पंचकूला पुलिस की सेक्टर-21 पुलिस चौकी टीम ने चौकी इंचार्ज दीदार सिंह के नेतृत्व में घोड़ों के माध्यम से क्षेत्र में विशेष गश्त अभियान चलाया। इस दौरान सार्वजनिक स्थानों, गलियों, खुले इलाकों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई गई। पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों से संवाद भी स्थापित किया और सुरक्षा को लेकर उनकी प्रतिक्रिया जानी। इस नई पहल को आमजन ने उत्सुकता और सकारात्मक सोच के साथ देखा।
प्रेस वार्ता के दौरान एसीपी विक्रम नेहरा ने बताया कि वर्तमान में पंचकूला पुलिस के पास घोड़ों का एक विशेष दस्ता उपलब्ध है, जिन्हें सेक्टर-21 पुलिस चौकी में रखा गया है। अब इनका उपयोग विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, भीड़-भाड़ वाले इलाकों, सुनसान स्थानों, संकरी गलियों तथा जिले के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी और उबड़-खाबड़ क्षेत्रों में किया जाएगा, जहां सामान्य वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। उन्होंने बताया कि शुरुआती स्तर पर इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं और प्रशिक्षित घुड़सवारों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही इस मॉडल के तहत ईंधन की बचत का भी आकलन किया जाएगा।एसीपी ने आगे बताया कि यह पहल केवल एक वैकल्पिक गश्त प्रणाली नहीं बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक व्यवहारिक और प्रभावी पुलिसिंग मॉडल है। उन्होंने कहा कि घुड़सवार पुलिस व्यवस्था अपराध नियंत्रण, चौकसी और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित उपस्थिति दर्ज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता का मानना है कि इस पहल से ईंधन की खपत कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। साथ ही घुड़सवार पुलिस की मौजूदगी से आमजन में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी तथा असामाजिक तत्वों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ेगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस व्यवस्था को ट्रायल आधार पर शुरू किया गया है और इसके परिणामों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में अतिरिक्त घोड़ों की मांग भेजकर इस व्यवस्था का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा, जिससे पंचकूला में पुलिसिंग को और अधिक सक्षम, पर्यावरण अनुकूल और जनसहभागिता आधारित बनाया जा सके।
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