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चंडीगढ़ राजनीतिक हरियाणा हाइलाइट्स

हाई कोर्ट द्वारा हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर अंग्रेजी भर्ती को रद्द किए जाने का फैसला युवाओं के संघर्ष की जीत- दीपेंद्र हुड्डा


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने हाई कोर्ट द्वारा हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर अंग्रेजी भर्ती को रद्द किए जाने के फैसले को हरियाणा के युवाओं के संघर्ष की जीत बताया। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि यही वे अभ्यर्थी हैं जिन्हें HPSC चेयरमैन ने नाकाबिल बताते हुए अपमानित किया था। आज अदालत के फैसले ने साफ कर दिया है कि हरियाणा के युवा तो काबिल हैं, उन्हें भर्ती करने वाला तंत्र नाकाबिल है। हकीकत ये है कि HPSC चेयरमैन इस पद पर रहने के काबिल ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले बीजेपी सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से PTI भर्ती रद्द की कांग्रेस सरकार के समय एक भी भर्ती रद्द नहीं हुई थी। लेकिन बीजेपी राज में एक के बाद एक पेपर लीक, परीक्षा रद्द, कोर्ट से भर्तियां रद्द समेत घूसखोरी के मामले उजागर हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिन वर्गों को भर्तियों में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए था, उन वर्गों के साथ भी बैकडोर से बड़ा धोखा किया गया।

इसका उदाहरण देते हुए दीपेन्द्र हुड्डा ने बताया असिस्टेंट प्रोफेसर, इंग्लिश के 613 पदों के सापेक्ष कुल 151 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, बाकी पद खाली रहे। डीएससी वर्ग के साथ बड़ा अन्याय करते हुए 60 रिजर्व सीट्स में से केवल 1 का चयन किया गया, 35% समेत कई कंडीशंस की आड़ में बाकी सीटें खाली छोड़ दी गई। न्यायालय के फैसले से स्पष्ट है कि सरकार की 11.11.2022 की गाइडलाइन के कुछ प्रावधान UGC गाइडलाइन 2018 के क्लॉज़ 4, 5 और 6 का उल्लंघन करते हैं इसलिए इनके आधार पर जारी विज्ञापन और भर्ती प्रक्रिया भी तय व्यवस्था के खिलाफ है। हाईकोर्ट के फैसले से साफ हो गया कि बीजेपी सरकार ने जान बूझकर ऐसे नियम बनाए ताकि ज्यादातर नौकरियां हरियाणा के युवाओं की बजाय बाहरी लोगों को मिल सके। इस भर्ती के खिलाफ सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने विगत 17 फरवरी को पंचकुला में जबरदस्त प्रदर्शन किया था और गिरफ़्तारी दी थी।

उन्होंने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि हरियाणा में आए रोज पेपर लीक क्यों हो रहे और हरियाणा की बजाय ज्यादातर बाहरी लोगों को भर्ती क्यों किया जा रहा है। यह भी एक जांच का विषय है कि HPSC चेयरमैन हरियाणा के बेरोजगार युवाओं से द्वेष की भावना क्यों रखते हैं। दीपेन्द्र हुड्डा ने असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी पद के लिए 67 में से हरियाणा के केवल 19  बाकी 41 बाहरी लोगों का चयन होने, असिस्टेंट प्रोफेसर साइकोलॉजी के 85 पद के लिए 400 अभ्यर्थियों में से केवल केवल 3 को पास किए जाने पर हैरानी जताते हुए कहा कि आज हरियाणवी युवाओं की जबान पर एक ही चर्चा है कि UPSC में हरियाणवी सबसे भारी, HPSC में मार गए बाहरी, बाकी खाली छोड़ दी पोस्ट ढेर सारी।

दीपेन्द्र हुड्डा ने बड़ी संख्या में पदों को खाली रखने और ज्यादातर चयन अन्य राज्यों के लोगों का होने पर भी गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि बीजेपी सरकार षड़यंत्र के तहत सरकारी नौकरियों से हरियाणवी युवाओं को वंचित कर रही है। बीजेपी सरकार सरकारी व निजी दोनों क्षेत्रों में हरियाणा के युवाओं को रोजगार देने में विफल साबित हुई है। उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा के युवा यूपीएससी, IIT, NET, JRF एवं अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में टॉप कर लेते हैं लेकिन, HPSC सोची-समझी साजिश के तहत अपनी परीक्षाओं में इन्हें अयोग्य ठहरा रहा है। दीपेन्द्र हुड्डा ने यह भी कहा कि अगर सरकार हरियाणा के युवाओं को काबिल नहीं मानती तो क्या इसका मतलब ये नहीं है कि बीजेपी सरकार ने हरियाणा के शिक्षा तंत्र को बर्बाद कर दिया है। अगर हरियाणा की ज्यादातर सरकारी नौकरियों में भी बाहर के बच्चे लगेंगे तो हरियाणा के बच्चे कहाँ जायेंगे? HPSC दरअसल, हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की बजाए गैर-हरियाणवी पब्लिक सर्विस कमीशन बन गया है। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि HPSC को तुरंत भंग करके इसकी भर्तियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और HPSC का पुनर्गठन कर इसकी कमान हरियाणा से ही किसी योग्य व्यक्ति को सौंपी जाए, ताकि समयबद्ध ढंग से भर्ती पूरी हो और हरियाणवी युवाओं को उनका हक मिल सके।हरियाणा के बाहर के प्रदेशों के बच्चों के चयन और आरक्षित वर्गों की सीट समेत अन्य सीटें खाली छोड़े जाने का उदाहरण देते हुए दीपेन्द्र हुड्डा ने बताया कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज (HPU) में असिस्टेंट इंजीनियर AE/SDO भर्ती में 214 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया जिसमें से केवल 29 हरियाणा के थे। इससे पहले सिविल जज के चयन में 110 में से 60 बाहर के, सिंचाई विभाग में 49 में से 28 हरियाणा से बाहर के उम्मीदवार थे। एसडीओ इलेक्ट्रिकल में 80 में से 69 बाहर के, केवल 2 ही हरियाणा के थे। इसी तरीके से टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में लेक्चरर में 153 में से 106 बाहरी उम्मीदवार चयनित हुए। HPSC ने विकास और पंचायत विभाग में SDE (सिविल) की भर्ती में सामान्य वर्ग के 48 पदों में से अन्य प्रदेशों के 19 अभ्यर्थियों का चयन किया है। इससे पहले दिसंबर 2023 में सरकार ने 7 BDPO भर्ती किए, जिनमें से 4 गैर-हरियाणवी थे यानी आधे से ज्यादा हरियाणा के बाहर के थे। फरवरी 2021 में हुई SDO इलेक्ट्रिकल की भर्ती में 90 पदों के लिए 79 लोगों को सिलेक्ट किया गया जिसमें 77 बाहर के थे और 22 हरियाणा के थे। ये वहीं भर्ती थी जिसे 2019 चुनावों से पहले कैंसिल किया गया था। क्योंकि पहले इस भर्ती में 80 में से 78 बाहर के अभ्यार्थियों को सिलेक्ट किया गया। इसी तरह लेक्चरर ग्रुप-B (टेक्निकल एजुकेशन) की भर्ती में सामान्य श्रेणी के 157 में से 103 अभ्यार्थी हरियाणा से बाहर के सेलेक्ट हुए थे। साल 2019 में असिस्टेंट प्रोफेसर पॉलिटिकल साईंस की भर्ती में 18 में से 11 उम्मीदवार बाहरी थे और सिर्फ 7 हरियाणवी थे। कृषि विभाग के लिए HPSC ने 600 ADO पदों के लिए भर्ती निकाली थी। लेकिन सिर्फ 57 कैंडिडेट्स को पास करके इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और उनमें से भी 50 का ही चयन किया गया। हैरानी की बात है कि भर्ती में जनरल केटेगरी के 23 पदों में से 16 पदों पर हरियाणा से बाहर के उम्मीदवारों का चयन किया गया।सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि एचएसएससी और एचपीएससी की भर्तियों लगातार गैर-हरियाणवियों को तरजीह देने वाली नीति अपनाई जा रही है। एसडीओ, बीडीपीओ, लेक्चरर से लेकर सहायक पर्यावरण अभियंता तक हर भर्ती में हरियाणवियों के साथ साजिश हो रही है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि जो हरियाणवी युवा UPSC जैसे कठिन एग्ज़ाम तक में टॉप कर लेते हैं, क्या वो HPSC की परीक्षा भी पास नहीं कर सकते? क्या बीजेपी सरकार हरियाणा के युवाओं की प्रतिभा पर जानबूझकर सवालिया निशान लगाना चाहती है। यही कारण है कि प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवा बेरोजगारी की हताशा में नशे और अपराध के दलदल में फंस रहे हैं। अपना भविष्य अंधकार में देखकर और बीजेपी-जेजेपी सरकार की नीतियों से बचने के लिए हरियाणा के युवा दूसरे देशों में पलायन कर रहे हैं। हरियाणा के युवाओं को देश छोड़ने के लिए मजबूर करने और जान जोखिम में डालकर पलायन करने के लिए पूरी तरह बीजेपी सरकार जिम्मेदार है। आज प्रदेश में अपराध इस कदर बढ़ गया है कि भारत सरकार द्वारा जारी सामाजिक प्रगति सूचकांक में हरियाणा को देश का सबसे असुरक्षित राज्य माना गया है।

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