
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ‘डिजिटल युग में मीडिया, समाज और सार्वजनिक विमर्श’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज प्रारंभ हो गया। सम्मेलन का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी, कुलगुरु, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब, बठिंडा तथा विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने की। सम्मेलन के दौरान सतत विकास की दिशा में पहल करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करने का संकल्प लिया। प्रो. अतुल मिश्रा, डीन (शैक्षणिक मामले) ने स्वागत भाषण देते हुए सम्मेलन को शोधार्थियों, फैकल्टी और विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सबसे बड़ी चुनौती तथ्यों की सत्यता और प्रमाणिकता बनाए रखना है तथा यह आयोजन इस दिशा में नई राह दिखाएगा।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि आज मीडिया मात्र सूचना का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह लोकतंत्र का सशक्त प्रहरी बन चुका है। विद्यार्थी इस सम्मेलन के मुख्य स्टेकहोल्डर हैं। यह मंच उन्हें अपने विचारों और मौलिक सोच को सामने रखने का अवसर देगा। उन्होंने डिजिटल युग में विश्वसनीयता के संकट पर चिंता जताई और प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।मुख्य अतिथि प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी ने हरियाणा को ‘हरि की भूमि’ बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण के गीता संदेश को विश्व का सबसे बड़ा संचार उदाहरण बताया। उन्होंने रामायण के प्रसंगों से सूचना की शक्ति को समझाया और आउटकम बेस्ड लर्निंग तथा नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) की सराहना की। प्रो. तिवारी ने पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत की छवि को धूमिल करने वाले नकारात्मक नैरेटिव पर चिंता व्यक्त की और युवा मीडिया पेशेवरों से आह्वान किया कि वे कौशल विकास और जागरूकता के माध्यम से भारत की सही पहचान को सशक्त बनाएं।

मुख्य वक्ता पद्मश्री आलोक मेहता ने पत्रकारिता के वर्तमान परिदृश्य पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में सत्य, तथ्य, विश्वसनीयता और जवाबदेही सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि देश का भविष्य आपके हाथों में है, इसलिए आपको केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि कौशलयुक्त और जागरूक भी बनना होगा।विभागाध्यक्ष प्रो. पवन सिंह ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की और कहा कि यह आयोजन डिजिटल दौर में मीडिया और समाज के बदलते संबंधों को समझने तथा भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित होगा। उन्होंने बताया कि देशभर से 350 शोध लेख प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 150 उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। सम्मेलन में 10 सत्रों में 50 से अधिक वक्ता (जिनमें 7 कुलपति शामिल हैं) भाग लेंगे। उद्योग से 60 और अकादमिक क्षेत्रों से 32 विशेषज्ञों की भागीदारी रहेगी। इसके अलावा, सम्मलेन के लिए 19 वीडियो संदेश प्राप्त हुए हैं। इस अवसर पर विभाग की गतिविधियों पर एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।सम्मेलन में कॉन्फ्रेंस स्मारिका तथा प्रो. पवन सिंह द्वारा संपादित पुस्तक “डिजिटल कम्युनिकेशन” का विमोचन किया गया। कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने सभी अतिथियों को फ्रेमयुक्त स्केच चित्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
प्रो. अनुराधा शर्मा, डीन, फैकल्टी ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड मीडिया स्टडीज ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सह-संयोजकों डॉ. राहुल आर्य, डॉ. सोनिया हुड्डा तथा डॉ. अखिलेश त्रिपाठी सहित पूरे आयोजन समिति द्वारा किया गया। सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
000
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

