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पंचकूला

आईसीसीआर के क्षेत्रीय निदेशक ने किया राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान पंचकूला का दौरा।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
पंचकूला: भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन-आईसीसीआर) के क्षेत्रीय निदेशक के.अय्यन्नार ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान पंचकूला का दौरा किया। आईसीसीआर क्षेत्रीय निदेशक का एनआईए में पहुंचने पर उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस) डॉ. गौरव गर्ग ने स्वागत किया। उन्होंने आयुर्वेद उपचार, शैक्षणिक, शोध एवं चिकित्सा गतिविधियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने अवगत कराया कि हर रोज 500 से ज्यादा मरीज ओपीडी के जरिये आयुर्वेद चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।दौरे के दौरान क्षेत्रीय निदेशक ने पंचकर्म चिकित्सा इकाई, ओपीडी और आईपीडी सेवाओं का निरीक्षण किया तथा रोगियों को दी जा रही आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों का भी अवलोकन किया। उन्होंने आयुर्वेद उपचार की वैज्ञानिक पद्धति, रोगी देखभाल एवं उपचार की प्रशंसा की।

क्षेत्रीय निदेशक ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा प्रदान की जा रही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं, अनुसंधान कार्यों तथा आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को प्रशंसनीय बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि आईसीसीआर के माध्यम से आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में ऐसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आईसीसीआर क्षेत्रीय निदेशक के.अय्यन्नार ने विदेशी छात्रों से संवाद करते हुए संस्थान की ओर से आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आधुनिक रूप में बढ़ावा को भी सराहनीय बताया। संस्थान के डीन प्रभारी प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने आईसीसीआर के क्षेत्रीय निदेशक को अवगत कराया कि छात्र आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की पढ़ाई करने के साथ इलाज करना भी सीख रहे हैं। उन्होंने शैक्षणिक ब्लॉक,कक्षा-कक्ष,लाईब्रेरी,छात्रावास , इंटरनेशनल छात्रावास के साथ आपरेशन थियेटर का भी अवलोकन किया और लाईब्रेरी में आधुनिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ी किताबों के संग्रह की भी तारीफ की। प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने बताया कि आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा के मार्गदर्शन में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति, शिक्षण एवं नवाचार के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान दे रहा है। इस अवसर पर मुख्य वार्डन छात्रावास प्रोफेसर प्रह्लाद रघु, डॉ. अनूप एम और डॉ. शीन्षा प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।

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