अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: जब भी किसी गरीबों की आशियाना टूटती हैं तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी सिर्फ उनके आँखों से आंसू नहीं निकलती हैं, बल्की उनकी चीखें निकल जाती हैं। ऐसी ही एक तस्बीर आज सूरजकुंड स्थित खोरी गांव में उस समय देखने को मिला जब जिला प्रशासन की बुल्डजरों से एक -एक करके उनके आशियानों को उनके आंखों के सामने रोंदा जा रहा था। जब आशियाना तोड़ी जा रही थी तो मासूम बच्चों की आंखों से आंसू बिल्कुल रुक नहीं रही थी, बच्चों की आंसुओं ने खामोश मां को फुट -फुट कर रोने को मजबूर कर दिया। ये लोग चीखते रहे ,चिल्लाते रहे वावजूद इसके अपने घरों को बचाने के लिए कुछ भी नहीं कर पाए। क्यूंकि उन लोगों को जवाब देने लिए लगभग 1500 पुलिस कर्मी लाठी -डंडों से लैस खड़े थे।
आपको जानकारी के लिए बतादें कि लगभग 6 महीनें पूर्व में इसी स्थान पर नगर निगम प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई की थी,इन 6 महीनों में फिर से इतने ज्यादा संख्या में लोगों ने मकानें कैसे बना लिए। क्या इसकी जिम्मेदारी किसी बड़े अधिकारी पर हैं या नहीं, सरकार इन अधिकारियों पर करोड़ों रूपए खर्च करती हैं, वावजूद इसके इस स्थानों पर सैकड़ों की संख्या में फिर से मकानें कैसे बन जाती हैं। हैरानी इस बात की हैं। बताया गया हैं कि इसी स्थान पर आज तीसरी बार बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की सख्त कार्रवाई की जा रही हैं। क्या जिला प्रशासन को सिर्फ यही काम रह गया है। आज की कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन को चाहिए की इस इलाके को तोड़फोड़ के बाद अपने कब्जे ले लें।

क्यूंकि तोड़फोड़ की बार-बार के कार्रवाई से सरकार के खजाने पर तो असर पड़ता ही हैं। इन गरीबों के जेबों पर बहुत ज्यादा असर क्या उनकी हिम्मत ही टूट जाती हैं। आज की इस खबर में प्रकाशित वीडियो को एक बार आप जरूर देखें,हो सकें तो शेयर करें। जिन लोगों के आशियाने को 9 बुलडोजरों की सहायता से तोडा जा रहा था तभी”अथर्व न्यूज़” ने उन से बातचीत की तो किसी ने कहा कि वर्ष -2005, दो लाख रूपए में ये प्लाट ख़रीदा था, किसी ने कहा कि ढाई लाख रूपए में इस जमीन को खरीद कर मकान बनाए थे, उनकी इन मकानों को जिला प्रशासन ने तीसरी बार तोड़ी हैं। अब उनकी कमर टूट चुकी हैं। सवाल हैं कि जब ये लोग साफ़ तौर पर कह रहे तो सरकार और जिला प्रशासन के लोग ऐसे भू -माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं, कौन हैं वह लोग जो नगर निगम प्रशासन की इन जमीनों को टुकड़े-टुकड़े करके इन गरीबो को लाखों में बेच दिए, ये लोग लाखों में जमीनों को खरीद कर आशियाना टूटने बाद गरीब हो गए,जो लोग गरीब थे इनके पैसों से आमिर हो गए।

ऐसे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को चाहिए इन गरीबों को तो कई बार उनके आशियाना को तोड़ कर सजा दे दी, अब उन लोगों को भी सजा दे दो, जो नगर निगम प्रशासन की कई एकड़ जमीनों को बेच कर अपनी कंगाली दूर कर ली, साथ में इस इलाके के अधिकारी जिन पर इन ज़मीनों की देखरेख की जिम्मेदारी हैं, सरकार उन्हें भी सलाखों के पीछे अवश्य भेजे। और उनके प्रॉपर्टी को सरकार जब्त करें,उनके हराम खोरी का नतीजा हैं जो भू-माफियाओं ने नगर निगम की जमीन को टुकड़े-टुकड़े कर के इन गरीबों को बेच दिए। निगम के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर निगम प्रशासन ने काफी साल पहलेफॉरेस्ट विभाग को फॉरेस्ट के लिए 100 एकड़ जमीनें दी थी, इनमें लगभग 25 एकड़ जमीनों पर लोग अवैध रूप से मकान बना कर रह रहे हैं। इसी स्थान पर लगभग छह महीने पहले भी तोड़फोड़ की बड़ी कार्रवाई की गई थी। अब लोगों ने यहां पर फिर से मकानें बना लिए हैं। इस लिए फिर से वह लोग तोड़फोड़ की कार्रवाई के लिए आए हैं। उनका कहना हैं कि आज तोड़फोड़ की कार्रवाई के लिए नगर निगम प्रशासन के दो कार्यकारी अभियंताओं को विशेष रूप से नियुक्त किया गया हैं। इसके अतिरिक्त तोड़फोड़ के लिए 9 टीमें बनाई गई हैं। और अवैध निर्माणों को तोड़ने के लिए 9 जेसीबी मशीनें हैं। इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीसीपी सेंट्रल मुकेश मल्होत्रा और एनआईटी डीसीपी डा. अर्पित जैन की विशेष तौर पर ड्यूटी लगाईं हैं। इनके नेतृत्व में लगभग 1500 पुलिस कर्मियों को तैनाती की गई हैं। एनआईटी डीसीपी डा. अर्पित जैन अपने टीम के साथ बाहर के इलाके में शरारती तत्वों पर नजरे टिकाएं हुए हैं। जबकि डीसीपी सेंट्रल मुकेश मल्होत्रा जहां तोड़फोड़ हो रही हैं, यानी अंदर अपने टीम के साथ नजरें बनाए हुए हैं।
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