
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि आगामी 25 फरवरी को मनरेगा योजना खत्म करने की साजिश व 14 लाख बीपीएल कार्ड काटने के विरोध में हरियाणा विधान सभा का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि BJP सरकार द्वारा मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश रचना गरीब आदमी के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है, यह अस्वीकार्य है। इसी तरह बीजेपी सरकार ने चुनाव के ठीक पहले हरियाणा की 75% आबादी को झूठे सब्जबाग दिखाकर उनके BPL राशन कार्ड बनाए, फिर मतदाताओं को धोखा देकर सत्ता हासिल की और चुनाव के बाद अब तक करीब 14 लाख बीपीएल कार्ड काट दिए। बीजेपी सरकार ने गरीबों का हक छीनकर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से भी वंचित कर दिया। केंद्र सरकार मनरेगा को कमजोर करने का षडयंत्र कर इसे खत्म कर देना चाहती है। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा आज फरीदाबाद पहुंचे थे।

उन्होंने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय के सिटिंग न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान देश में सबसे ज्यादा मजदूरी हरियाणा में मजदूरों को दी जाती थी। लेकिन बीजेपी ने सत्ता में आते ही मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात किया और मनरेगा को कमजोर करने में जुट गई। उन्होंने कहा कि संसद में मनरेगा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि हरियाणा में 8 लाख से अधिक मनरेगा मज़दूर पंजीकृत व सक्रिय हैं, लेकिन 2024-25 में महज़ 2,191 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। यही नहीं, मनरेगा कानून के तहत तय बेरोज़गारी भत्ता, जो समय पर काम न मिलने पर दिया जाना चाहिए, पिछले पाँच वर्षों में हरियाणा के एक भी मज़दूर को नहीं दिया गया। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि पूंजीपतियों के हितों को साधने वाली बीजेपी सरकार द्वारा मजदूरों के हकों को कुचलने नहीं देंगे। मनरेगा योजना केंद्र प्रायोजित योजना से केंद्र नियंत्रित योजना बना दी गयी। मनरेगा पहले सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू थी, लेकिन अब केवल अधिसूचित इलाके में ही मजदूरों को काम मिलेगा। उन्होंने कहा कि नाम बदलकर लाई इस योजना में बजट आवंटन का निर्धारण भी केंद्र सरकार करेगी। जबकि पहले यह मांग आधारित योजना थी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में चुनाव से पूर्व बीपीएल कार्डों की संख्या 27 लाख थी उन्हें करीब 75% बढ़ाकर लोकसभा चुनाव तक 45 लाख कर दी गई और विधान सभा चुनाव तक यह संख्या 51.09 लाख हो गई। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच करीब 5-6 महीने में ही साढ़े 5 लाख से अधिक नए बीपीएल कार्ड बने। खासकर जुलाई और अक्टूबर के बीच ही 4.84 लाख नए BPL राशनकार्ड बने। चुनाव के बाद 14 लाख बीपीएल कार्ड कटवा दिये। ऐसे में स्पष्ट है कि चुनाव के समय राजनीतिक लाभ के लिए मतदाताओं से धोखा करके सरकार बनाई गई। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय हरियाणा की 75% आबादी को झूठे सब्जबाग दिखाकर उनके BPL राशन कार्ड बनाए, फिर उनके वोट लेकर सत्ता हासिल की और अब गरीबों का हक छीनकर सरकारी योजनाओं से भी वंचित कर दिया गया। BJP सरकार ने लोगों को बीपीएल श्रेणी का लाभ देने के लिये ये कार्ड नहीं बनाये थे, बल्कि वोटरों को प्रलोभन देकर वोट लूटने के लिये और चुनाव को प्रभावित करने के लिये ये कार्ड बनाये गये। हरियाणा की बीजेपी सरकार गरीबी नहीं, गरीबों को ही मिटा रही है। गरीबी कम करने का बीजेपी सरकार का यह तरीका किसी सूरत में सही नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बीजेपी सरकार को चेतावनी दी कि जनता को दरकिनार करके अगर कदम बढ़ाएगी तो उसके सामने टक्कर का मजबूत विपक्ष खड़ा है। विपक्ष किसी हाल में बीजेपी को गरीबों के हक पर डाका डालने नहीं देगा। आईडीएफसी बैंक में हरियाणा की जनता के 590 करोड़ डूबने पर पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह हरियाणा की जनता की खून-पसीने की कमाई है, जिसे निजी स्वार्थों के चलते दांव पर लगा दिया गया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2012-13 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने निजी बैंकों में पैसा जमा करने से होने वाले जोखिम को भांप लिया था और स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि विभाग का अतिरिक्त पैसा ट्रेजरी में रहे ताकि सरकार को बाजार से ज्यादा ब्याज पर कर्ज न लेना पड़े। यदि किसी बोर्ड या कॉर्पोरेशन को पैसा जमा करना ही है, तो वह केवल सरकारी बैंकों में ही जमा हो।
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