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फरीदाबाद

केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने नाटक के लिए पांच लाख रुपये की धनराशि देने की घोषणा

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: आजादी के अमृत महोत्सव के तहत सेक्टर-12 के कन्वेंशन हाल में आयोजित बुधवार की शाम पूरी तरह से आजादी के गुमनाम नायकों को समर्पित रही। सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के कलाकारों ने जिस प्रकार ‘दास्तान- ए-रोहनात’ नाटक का मंचन किया उसे वाकई रोहनात गांव के गुमनाम महानायकों को सच्ची श्रद्धांजलि कहा जा सकता है।केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि इसी तरह राजा नाहर सिंह की जीवनी पर तैयार होगा। केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने नाटक के लिए पांच लाख रुपये की धनराशि देने की घोषणा भी की।आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में जिला सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा तैयार किया गया नाटक देखने के लिए विशेष तौर पर कार्यक्रम में केंद्रीय ऊर्जा एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने शिरकत की।

नाटक का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उन्होंने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव पूरे देश में मनाया जा रहा है देश के प्रधानमंत्री मोदी  ने आजादी के 75 साल को अमृत महोत्सव के रूप में मनाने का निर्णय किया है। पूरे साल देश भक्ति के कार्यक्रम जहां देश की आजादी में जिन-जिन का भी योगदान रहा चाहे वह कोई व्यक्ति है गांव या कोई इलाका है। उन सब के इतिहास से आने वाली पीढ़ियों का को परिचित कराया जाए जिससे उनको प्रेरणा मिले। आज उसी निमित्त जिला प्रशासन फरीदाबाद द्वारा यहां एक नाटक का मंचन किया गया। नाटक नाथ गांव के शहीदों पर आधारित था। नाटक के मंचन के माध्यम से रहो नाथ गांव के आजादी के संग्राम में योगदान की जानकारी मिली। जिन लोगों ने शहादत दी उन लोगों का परिचय मिला।

इस जानकारी के लिए मैं मुख्यमंत्री को बधाई देना चाहता हूं वह पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने आजादी के बाद उस गांव में जाने का काम किया 23 मार्च  2018 को पहली बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गांव के बुजुर्ग के हाथों राष्ट्रीय ध्वज फहराकर यहां के लोगों को गुलामी के अहसास से आजाद करवाया। उन से पहले कोई भी मुख्यमंत्री वहां नहीं गया। उस गांव के लोगों का आजादी की लड़ाई में कितना बड़ा योगदान है जिसके कारण हम आज आजादी का जीवन जी रहे हैं। हम रोहनात गांव के योगदान को कभी नहीं भुला सकते आजादी के दीवानों और शहीदों को याद करना हम सब देशवासियों का परम धर्म और कर्तव्य भी है।  उन्होंने कहा कि आज आयोजित रोहनात गांव की गाथा आजादी के संघर्ष में हमने देखी।

उनकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है और आजादी के गुमनाम शहीदों  जैसे रोहनात के शहीद, यह सब आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते हैं। आजादी का लुफ्त आज हम सब लोग ले रहे हैं। उस आजादी के लिए कई गुमनाम लोगों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। इन सभी शहीदों को मैं अपनी और आप सबकी तरफ  से उनके चरणों में नतमस्तक होता हूं जिन्होंने हमारे आज के लिए अपना कल न्योछावर किया। हम सबको उनको याद करना चाहिए और जो देश अपने शहीदों को भूल जाता है वह देश कभी आगे नहीं बढ़ता। मैं भी आज से पहले रोहनात गांव को नहीं जानता था लेकिन आजादी के संघर्ष में इतनी बड़ी आहुति उस गांव के लोगों ने दी। इस जानकारी के लिए मैं मुख्यमंत्री को बधाई देना चाहता हूं।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल  ने निर्देश दिए थे कि रोहनात गांव की कहानी जन-जन तक पहुंचे। आठवीं की इतिहास की पुस्तक में शामिल अध्याय शीर्षक m ‘1857 की क्रांति में रोहनात गांव का योगदान’ को ग्राम सभाओं में बच्चों द्वारा व्यापक रूप से बताया जाना चाहिए। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 में रोहनात गांव की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इस नाटक का निर्देशन मनीष जोशी द्वारा किया गया है। कलाकारों द्वारा जिस प्रकार अपना रोल निभाया गया वह दर्शकों को हैरान कर देने वाला था। लोग बिना पलक झपके टकटकी लगाए नाटक को लगातार देख रहे थे। कलाकारों के एक-एक संवाद पर बार-बार दर्शक तालियां बजाते दिखाई दिए। नाटक के मंचन को लेकर लोगों की दीवानगी इस कदर दिखाई थी कि समय से पहले ही हाल खचाखच भर गया और जिन लोगों को बैठने की जगह नहीं मिली उन्होंने देशभक्ति की भावना का परिचय देते हुए खड़े होकर भी पूरा नाटक देखा।

इतना ही नहीं , नाटक के बीच में कई बार दर्शकों ने ‘ भारत माता की जय’ , ‘जय हिंद- जय भारत’ के जयकारे लगाते हुए देश भक्ति का परिचय दिया। ‘दास्तान ए रोहनात’ को देखने के लिए कल बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बुधवार को अभिभावकों के साथ बच्चों की संख्या भी अपेक्षाकृत अधिक देखी गई। अभिभावक नाटक का आनंद उठाने के साथ-साथ अपने बच्चों को विशेष रूप से इस नाटक का मंचन दिखाने के लिए अपने साथ लाए थे।आपकों बता दें यह नाटक भिवानी जिला के छोटे से गांव रोहनात के गुमनाम महानायकों पर आधारित था। जिन्होंने आजादी के लिए कड़ा संघर्ष किया लेकिन इतिहास के पन्नों में उनकी गौरव गाथा को वह स्थान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। ऐसे ही गुमनाम नायकों नोन्दा जाट, बिरड़ा दास और रूप राम खाती तथा रोहनात गांव के लोगों के आजादी के लिए कड़े संघर्ष को इस नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था। इस नाटक में रोहनात गांव की क्रांति के साथ-साथ अंग्रेजों की कूटनीतिक चालों, डिवाइड एंड रूल पॉलिसी, अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचार सहित कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रस्तुत किया गया था। इसके अलावा, नाटक में रोहनात गांव के कुंए का इतिहास भी दिखाया गया था। कि किस प्रकार अंग्रेजों के अत्याचार के चलते वहां के गांव का कुआं जलियाँवाला बाग की तरह ग्रामीणों की लाशों से भर गया था। नाटक को जिस प्रकार से लिखा गया था उसके एक -एक शब्द में क्रांति का भाव था और जिस प्रकार से कलाकारों द्वारा डायलॉग डिलीवरी(संवाद प्रस्तुति) की गई वह वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। विशेषकर बिरड़ा दास, नोंदा जाट तथा रूप राम खाती जिन का किरदार क्रमशः अतुल लांगया, यश राज शर्मा तथा बबलू द्वारा निभाया गया था, को लोगों द्वारा खूब सराहा गया। इसी प्रकार , ब्रिटिश ऑफिसर बने कामेश्वर ने हिंदी भाषा में जिस प्रकार अंग्रेजी टोन पकड़ते हुए डायलॉग डिलीवरी की वह काबिले तारीफ थी। नरसंहार की इस अनकही- अनसुनी कहानी ने जहां एक तरफ पूरे वातावरण को देश भक्ति के रंग में रंग दिया वही दूसरी ओर नाटक में अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचार को जिस प्रकार प्रदर्शित किया गया था उसे देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।नाटक का समापन कलाकारों द्वारा ‘वंदे मातरम’ गीत की प्रस्तुति के साथ किया गया। जैसे ही कलाकारों द्वारा वंदे मातरम गीत शुरू किया गया  सभी दर्शक अपने अपने स्थानों पर खड़े हो गए और भारत माता के जयकारे के साथ नाटक का समापन किया गया। सांस्कृतिक संध्या में नाटक के सभी कलाकारों को जिला प्रशासन की ओर से  सम्मानित किया गया। जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ दर्शक भी कलाकारों की पीठ थपथपाते हुए नजर आए।

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