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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सिताब दियारा, बिहार में लोकनायक जय प्रकाश जी के स्मारक का उद्घाटन किया।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने आज सिताब दियारा (बिहार) में लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जन्म जयंती के अवसर पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के स्मारक का उद्घाटन किया एवं उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने युवाओं से महान लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए देश के पुनर्निर्माण में सहयोग देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल , केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, अश्वनी चौबे , पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह, स्थानीय सांसद एवं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी, पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद सुशील मोदी, जयप्रभा राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं सांसद वीरेन्द्र मस्त, नीरज शेखर सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता एवं यूपी सरकार के कई मंत्रीगण उपस्थित थे। कार्यक्रम स्‍थल पर विशाल जन-सैलाब उमड़ा था। लोग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सुनने दूर-दूर से आये थे।

शाह ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जन्म जयंती के दिन आज मुझे उनके जन्म स्थान पर आने और उनकी प्रतिमा का अनावरण करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ है। लोकनायक जी के कार्यों से समग्र राष्ट्र के युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके जन्म स्थान पर उनकी आदमकद प्रतिमा और उनके नाम पर स्मारक बनाने का निर्णय लिया था जिसका संयोगवश उनकी जन्म जयंती के अवसर पर ही लोकार्पण हो रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी का संपूर्ण जीवन अनेक मायनों में विशिष्ट रहा है।

वे देश की आजादी के लिए क्रांति के रास्ते पर भी लड़े, महात्मा गाँधी जी के बताये रास्ते से भी लड़े और आजादी के बाद जब सत्ता में भागीदारी का समय आया तो वे एक सन्यासी की भांति सत्ता का परित्याग करते हुए आचार्य विनोबा भावे जी के सर्वोदय आंदोलन के साथ जुड़ कर जीवन भर भूमिहीनों, गरीबों, दलितों एवं पिछड़ों के कल्याण के लिए लड़ते रहे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ने समाजवाद, सर्वोदय की विचारधारा और जातिविहीन समाज की रचना की कल्पना की थी और इसके लिए जीवन पर्यंत काम किया। शाह ने कहा कि जब 70 के दशक में जब सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार की खुली लूट के लिए देश पर आपातकाल थोपा, तब लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ने इसके खिलाफ बहुत बड़ा आंदोलन किया। 1973 में गुजरात में इंदिरा जी की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार चल रही थी, चिमन भाई पटेल मुख्यमंत्री थे और बिहार में अब्दुल गफूर मुख्यमंत्री थे।

तब केंद्र की इंदिरा गाँधी सरकार के संरक्षण में सार्वजनिक रूप से कांग्रेस सरकारें चंदा उगाहने का काम कर रही थी, तब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ गुजरात के विद्यार्थियों ने आंदोलन किया और उस आंदोलन का नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ने किया था जिसके बल पर गुजरात में सत्ता परिवर्तन हुआ। उसके बाद बिहार में उनके नेतृत्व में आंदोलन शुरू हुआ। गाँधी मैदान में उनकी ऐतिहासिक रैली को देख कर तब इंदिरा गाँधी के पसीने छूट गए थे। जब जनता और अदालत, दोनों का निर्णय इंदिरा गाँधी के खिलाफ आया, तब इंदिरा गाँधी जी ने देश पर आपातकाल थोप दिया। लोकनायक जयप्रकाश जी को भी जेल में डाल दिया गया। उनके साथ ही विपक्ष के कई नेताओं को भी जबरन जेल में डाल दिया गया, उन्हें यातनाएं दी गई। सत्ता में बैठे लोगों को लगा कि यदि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी जी सरीखे
जनता की आवाज को बंद कर दिया जाएगा तो इससे उनके हौसले पस्त हो जायेंगे लेकिन जिस लोकनायक को 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो की क्रांति के दौरान हजारीबाग की जेल भी न रोक सकी, उस जयप्रकाश को इंदिरा गाँधी की यातनाएं भी कर्तव्य पथ से डिगा नहीं सकी। जब देश से आपातकाल का काला दौर ख़त्म हुआ तब लोकनायक ने पूरे विपक्ष को एक किया और इसका परिणाम यह हुआ कि देश में पहली बार एक गैर-कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। पहली बार जेपी ने जन संघ को भी साथ में लिया और सत्ता से बाहर कर किस प्रकार परिवर्तन किया जा सकता है, उसका एक उत्कृष्ट उदाहरण उन्होंने प्रस्तुत किया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार चल रही है। विगत 8 वर्षों से प्रधानमंत्री ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी और आचार्य विनोबा भावे के सर्वोदय के सिद्धांत के अनुरूप ही अंत्योदय की
अवधारणा पर गरीब कल्याण का अभियान शुरू किया है।

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