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दिल्ली

परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने सावदा घेवरा डिपो निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने आज सावदा घेवरा में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक अत्याधुनिक बस डिपो के निर्माण कार्य का गहन निरीक्षण किया। लगभग 60 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ बनाये जा रहे इस डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के रखरखाव की पूरी व्यवस्था है। इसमें निर्माण व्यय की राशि लगभग 30 करोड़ रूपए है , जबकि विद्युतीकरण लागत 30.11 करोड़ रूपए है। चार्जिंग सुविधाओं से लैस, 7.8 एकड़ में फैले इस डिपो में 200 इलेक्ट्रिक बसों को पार्क करने की क्षमता होगी, जो एक आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

निरीक्षण के दौरान परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये और निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। एक बयान में, उन्होंने कहा, “दिल्ली में जल्द ही 1500 इलेक्ट्रिक बसों की खेप आ जाएगी। राजघाट, मुंढेला कलां और रोहिणी सेक्टर 37 ऐसे 3 बस डिपो हैं जहाँ पहले से ही इलेक्ट्रिक बसों को रखने की सम्पूर्ण व्यवस्था है। हम 9 और डिपो विद्युतीकृत कर रहे हैं जहाँ नई इलेक्ट्रिक बसों के रखरखाव की सम्पूर्ण व्यवस्था होगी। सावदा घेवरा दिल्ली सरकार द्वारा बनाए जा रहे 9 बस डिपो में से एक है। साइट पर निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए मैंने अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दियें।मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार दिल्लीवासियों को विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
*बनाए जा रहे 9 नए बस डिपो हैं:*
ईस्ट विनोद नगर 2
नरेला
दौराला
बुराड़ी
सावदा घेवरा
कापसहेरा
गदयीपुर
किराड़ी
छतरपुर
दिल्ली सरकार के बेड़े में 7,379 बसें हो गयीं हैं जो की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसमें दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) द्वारा संचालित 4,060 बसें और दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मोडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) लिमिटेड द्वारा प्रबंधित 3,319 बसें शामिल हैं। दिल्ली सरकार ने 2025 तक इस संख्या को कुल 10,480 बसों तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इन बसों में 80% यानी 8,280 बसें इलेक्ट्रिक होंगी। केजरीवाल सरकार के इस क़दम का लक्ष्य दिल्ली के कार्बन फुटप्रिंट को सालाना अनुमानित 4.6 लाख टन CO2 उत्सर्जन से कम करना और वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार करना है।दिल्ली में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में केजरीवाल सरकार वर्तमान में शहर में 100 मोहल्ला बसें चल रही है। ये 9 मीटर आकार की बसें विशेष रूप से संकरी सड़कों या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नेविगेट करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जहां नियमित 12-मीटर बसों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। केजरीवाल सरकार का 2025 तक ऐसी कुल 2,180 मोहल्ला बसें चलाने का लक्ष्य है।

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