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दिल्ली राष्ट्रीय हाइलाइट्स

दुष्कर्म के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक सेंगर की रिहाई पर रोक न्याय की जीत- महिला कांग्रेस।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:महिला कांग्रेस ने उन्नाव दुष्कर्म मामले के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने के हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने का स्वागत किया है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने इसे पीड़िता, उसके परिवार और न्याय के लिए आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति की बड़ी जीत बताया।नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन लोगों के मुंह पर जोरदार तमाचा है, जिन्होंने हाईकोर्ट में इस लड़ाई को कमजोरी से लड़ा और अपराधी को बचाने के रास्ते निकाले। उन्होंने बताया कि सीबीआई की ढीली पैरवी के कारण दोषी को राहत मिलने की स्थिति पैदा हुई थी, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि नाबालिग बेटी के दुष्कर्म और परिवार के लोगों की हत्या का दोषी जेल में ही रहेगा।
अलका लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उनके ‘बेटी बचाओ’ नारे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ‘बेटी बचाओ’ का नारा तो देते हैं, लेकिन जिन भाजपा नेताओं पर बेटियों के खिलाफ गंभीर अपराधों के आरोप लगते हैं, उन्हें बचाने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद जब पीड़िता अपनी मां के साथ इंडिया गेट पर धरने पर बैठी थी, तो भाजपा और उसके समर्थकों ने उसका मजाक उड़ाया था। उन्होंने उन्नाव मामले के साथ-साथ अंकिता भंडारी, हाथरस और बिलकिस बानो जैसे मामलों का जिक्र करते हुए भाजपा को निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा कि उन्नाव के पीड़ित परिवार के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने मुलाकात की थी और परिवार को पार्टी की ओर से हर तरह की कानूनी, आर्थिक और सामाजिक मदद का भरोसा दिलाया था। लांबा ने बताया कि महिला कांग्रेस की वकीलों और कार्यकर्ताओं ने भी इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

कांग्रेस नेता ने बताया कि आगामी बजट सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। उन्होंने मांग की कि बेटियों के हत्यारों एवं बलात्कारियों को पैरोल या जमानत देने का तमाशा बंद होना चाहिए और कानून में बदलाव कर ऐसे दोषियों को उम्रकैद नहीं, बल्कि फांसी की सजा दी जानी चाहिए।

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