अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के बालाघाट में कुपोषण व गंभीर बीमारियों से 35 से ज्यादा आदिवासी बच्चों और सागर में जहरीली शराब से 50 से ज्यादा लोगों की मौतों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और पार्टी की मीडिया पैनलिस्ट साधना भारती ने इस मामले में स्वास्थ्य और आबकारी विभाग संभालने वाले प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों राजेंद्र शुक्ला एवं जगदीश देवड़ा के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही कहा है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

विक्रांत भूरिया ने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलते हुए बताया कि प्रदेश में कुपोषण एक बड़ी समस्या है, इसी के चलते बालाघाट में बच्चों की मौत हो रही है और वहां लोगों को छह महीने से घर पर पहुंचने वाला राशन नहीं मिल रहा है। बालाघाट जैसे इलाकों में टीकाकरण की दर 70 प्रतिशत से भी कम है। यही कारण रहा कि खसरा फैला। इतना ही नहीं, सरकार ने मलेरिया जैसी बीमारी की रोकथाम के लिए भी कोई काम नहीं किया। मध्य प्रदेश सरकार ने 2025 में बताया था कि सरकार अति गंभीर कुपोषित बच्चों में कुपोषण खत्म करने के लिए हर दिन 12 रुपये खर्च कर रही है। सरकार ने यह भी बताया कि जिन अति कुपोषित बच्चों को पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराया जाता है, उनपर वे 980 रुपये खर्च करते हैं। कांग्रेस नेता ने इसे बेहद कम राशि बताते हुए सवाल खड़े किए।उन्होंने भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताते हुए कहा कि पहले पीड़ित परिवारों को 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही थी, विरोध के बाद इसे बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया, फिर जब कांग्रेस ने ‘न्याय सत्याग्रह’ किया तो इस राशि को चार लाख रुपये कर दिया गया। कांग्रेस नेता ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बालाघाट की त्रासदी अकेली घटना नहीं है, भाजपा सरकार की लापरवाही के कारण लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। कुछ अन्य गंभीर घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पहले छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप के कारण 26 बच्चों की मौत हुई थी, इंदौर में दूषित पानी के कारण बच्चों समेत 36 लोगों की मौत हो गई थी, इंदौर में ही चूहों के कुतरने से दो नवजात बच्चों की मौत हो गई थी और सतना में छह बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था। भूरिया ने कहा कि बालाघाट की जमीनी हकीकत बताने वालों पर दबाव बनाकर उन्हें रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोपाल से सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर्स को बालाघाट भेजकर एक नैरेटिव चलाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बच्चों की मौत का कारण पता करना और भविष्य में ऐसी मौतें रोकना होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बालाघाट को पीआर प्रबंधन की नहीं, बल्कि पोषण, टीकाकरण, उपचार और जवाबदेही की जरूरत है। कांग्रेस और भाजपा की सोच में अंतर को स्पष्ट करते हुए विक्रांत भूरिया ने कहा कि जहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक आदिवासी युवा को डूसू अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया है, वहीं भाजपा आदिवासियों की पीढ़ी ही मिटा देने पर तुली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा का पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है और हर मंत्री सिर्फ अपनी तिजोरियां भरने में लगा है।वहीं, साधना भारती ने कहा कि मध्य प्रदेश के बालाघाट में कुपोषण के साथ डायरिया, मलेरिया, खसरा, निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से 35 से ज्यादा बच्चों की मौत और सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 50 से अधिक लोगों की मौत के बावजूद न तो मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला एवं न ही आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अभी तक इस्तीफा दिया है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताया।
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted

