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गुडगाँव

एडीसी वत्सल वशिष्ट की अध्यक्षता में बैंकर्स की जिला स्तरीय समीक्षा कमेटी एवं जिला परामर्शदात्री कमेटी की बैठक संपन्न

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
गुरुग्राम:एडीसी वत्सल वशिष्ट की अध्यक्षता में लघु सचिवालय स्थित सभागार में जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति (डीएलसीसी) व  जिला स्तरीय समीक्षा कमेटी की बैठक आयोजित हुई। एडीसी ने बैठक में जिला के जमा, अग्रिम तथा शासकीय योजनाओं के लक्ष्यों को पूर्ण करने के संबंध में विस्तार से चर्चा करने के साथ साथ विभिन्न स्वरोजगार एवं उद्यमी योजनाओं के ऋण आवेदनों की स्वीकृति एवं वितरण की बैंकवार समीक्षा की। एडीसी ने बैठक में बैंकों के ऋण जमा अनुपात, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड, हरियाणा महिला विकास निगम, केसीसी लोन, पीएम फसल बीमा योजना, पीकेसीसी, पीएम स्वनिधि, पीएम मुद्रा योजना सहित मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत बैंकों में  भेजे गए आवेदनों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

बैठक में वित्त वर्ष 2024-25 के मार्च माह में खत्म हुई अंतिम तिमाही के दौरान सरकारी योजनाओं के तहत जिला के विभिन्न बैंकों को ऋण हेतु प्रस्तुत किये गये आवेदनों की बैंकवार समीक्षा करने उपरान्त एडीसी ने बैंक प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ें। इससे योजनाओं की पहुँच समाज के अंतिम छोर तक हो सकेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलेगा।एडीसी ने कहा कि बैंकों को केवल वित्तीय संस्थान के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज कल्याण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने विभागीय और बैंक अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि लंबित आवेदनों का जल्द से जल्द निष्पादन करें। जिससे योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों में अपेक्षित प्रगति हो सके एवं लाभार्थी अपनी आर्थिक उन्नति की गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें। बैठक के दौरान एडीसी वत्सल वशिष्ठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि कृषि क्षेत्र (एग्रीकल्चर सेक्टर) को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बैंकों को निर्देशित किया कि वे कृषि आधारित ऋण योजनाओं जैसे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), पशुपालन ऋण, बागवानी, डेयरी, मधुमक्खी पालन आदि के तहत अधिक से अधिक ऋण वितरित करें।उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं को कृषि से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इसके लिए बैंक एवं संबंधित विभाग संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाएं तथा किसानों को योजनाओं की विस्तृत जानकारी दें। समीक्षा के दौरान जिन बैंकों का प्रदर्शन कमजोर पाया गया, उनके प्रति एडीसी ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि आवश्यकतानुसार नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की बैठकों में योजनाओं की प्रगति को तय मानकों के अनुसार आंका जाएगा और जो बैंक अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करेंगे, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) विनोद कुमार बजाज ने सभी बैंकों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में मौजूदा वित्त 2024-25 वर्ष के अंत तक जिला में विभिन्न बैंकों द्वारा अपनी 41 नई शाखाएं खोली गई हैं। अब जिला में विभिन्न बैंकों की कुल 937 शाखाएं अपने सेवाएं दे रही हैं। वहीं  एमएसएमई क्षेत्र में 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹ 38983 करोड़ की राशि के लोन जिला में उपलब्ध कराए गए हैं। इसी प्रकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 500 ऋण आवेदनों का लक्ष्य निर्धारित है जिसकी तुलना में 185 आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है वहीं 18 आवेदन अभी स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं। एलडीएम ने बताया कि जिला के नागरिकों को वित्तिय विषयों के प्रति जागरूक करने के लिए 31 मार्च 2025 तक 122 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए थे जिसमें करीब 7418 नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसी प्रकार रुड़सेट संस्थान द्वारा 10 विभिन्न स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 288 प्रार्थियों को प्रशिक्षित किया गया। पीएम सूर्य घर योजना के तहत जिला में 411 आवेदकों में से 178 को लाभान्वित किया गया है। बैठक में एसीयूटी अदिति सिंघानिया, आरबीआई से लीड डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर यश भारद्वाज, नाबार्ड से क्लस्टर हेड विनय कुमार त्रिपाठी, केनरा बैंक के रीजनल मैनेजर चंद्र सिंह तोमर, रुड़सेट के निदेशक निर्मल यादव सहित सरकारी व गैर सरकारी बैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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