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दिल्ली

दिल्ली की जनता के बढ़ते बिलों की जिम्मेदार है केंद्र सरकार, केंद्र के कुप्रबंधन से बढ़ी दिल्ली में बिजली की कीमतें-आतिशी

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:राष्ट्रीय स्तर पर कोयले और प्राकृतिक गैस की कीमतों को नियंत्रित करने में भाजपा शासित केंद्र की असमर्थता के कारण, दिल्ली में बिजली बिलों में जुलाई से मामूली बढ़ोतरी होगी। इसमें टीपीडीडीएल उपभोक्ताओं के जून और जुलाई के बिलों में 1.2% की बढ़ोतरी होगी, बीएसईएस राजधानी उपभोक्ताओं के बिलों में 5.5% और बीएसईएस यमुना उपभोक्ताओं के बिलों में 7.7% की बढ़ोतरी होगी। लेकिन इससे उन उपभोक्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जिनका बिल जीरो आता है, यहाँ बढ़े हुए बिजली बिल का भार दिल्ली सरकार ही वहन करेगी| इस बाबत प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया को संबोधित करते हुए बिजली मंत्री आतिशी ने कहा कि, केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाये गए बिजली के दामों का नतीजा है कि आज दिल्ली वालों को बढ़े हुए पीपीएसी का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्र सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज पूरे देश में कोयले की आर्टिफीसियल शार्टेज उत्पन्न हो गई है और उनकी गलत नियिओं के कारण बिजली उत्पादन कंपनियों को महंगा आयातित कोयला खरीदना पद रहा है जिससे दिल्ली सहित पूरे देश में बिजली के दाम बढ़ रहे है लेकिन, मैं दिल्ली के लोगों को मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की ओर से आश्वासन देती हूँ कि, दिल्ली में जिन लोगों का बिजली का बिल जीरो आता है, बिजली की दरों में बढौतरी के बाद भी उनका बिल जीरो ही आता रहेगा। चाहे ये सरचार्ज बढ़े पर इससे उनके बिल के उपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा| और इसके बढ़े हुए बिजली बिल का वहन दिल्ली सरकार करेगी। बिजली मंत्री आतिशी ने कहा कि, दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) ने एक आर्डर जारी किया है| जो दिल्ली में बिजली कंपनियों को पॉवर पर्चेज एडजेस्टमेंट चार्ज को कुछ हद तक बढाने की अनुमति देता है। उन्होंने पीपीएसी के विषय में साझा करते हुए बताया कि,पीपीएसी सभी उपभोक्ताओं के बिल में शामिल होता है और ये बिजली के दामों से अलग होता है क्योंकि बिजली के दाम साल में एक बार निर्धारित होते है। और कोयला और गैस के दाम में होने वाले उतार-चढ़ाव को एडजस्ट करने के लिए पीपीएसी को बिल में शामिल किया जाता है| अगर गैस-कोयले का दाम बढ़ता है तो पीपीएसी बढ़ता है और यदि ये घटता है तो पीपीएसी घटता है। बिजली मंत्री ने साझा करते हुए बताया कि,डीईआरसी के इस आर्डर के बाद डिस्कॉम कंपनी टाटा पॉवर का पीपीएसी 1.49% बढ़ा है यानि इस महीने जिनके घरों में टाटा पॉवर से बिजली आती है उनके पिछले महीने और इस महीने के बिल में 1.2% की बढोतरी होगी। वही बीवाईपीएल (राजधानी पॉवर) का पीपीएसी 6.39% बढ़ा है, इस कारण इसके उपभोक्ताओ का जून और जुलाई का बिल 5.3% बढेगा| बीवाईपीएल (यमुना पॉवर) का पीपीएसी 9.42% बढ़ा है इससे जून और जुलाई के बिल में 7.7% की बढोतरी होगी| उन्होंने कहा कि पीपीएसी निर्धारित करना डीईआरसी की एक रूटीन प्रक्रिया है और हर तीन महीने पर इसको निर्धारित किया जाता है।
बता दें कि वर्तमान में दिल्ली में बिजली के कुल घरेलू उपभोक्ताओं में से 29% टीपीडीडीएल उपभोक्ता, बीएसईएस राजधानी के 45% उपभोक्ता और बीएसईएस यमुना के 26% उपभोक्ता है।
बिजली मंत्री आतिशी ने कहा कि, आज दिल्ली में बिजली का बिल बढ़ रहा है इसके लिए सिर्फ और सिर्फ केंद्र सरकार जिम्मेदार है| वर्तमान में दिल्ली की तीनों बिजली कंपनियां अधिकतर बिजली एनटीपीसी के तीन थर्मल पॉवर प्लांट से खरीदती है। इसमें अरावली, दादरी 2 और MTPS-7। और इन तीनो पावर प्लांट से केंद्र सरकार की एनटीपीसी दिल्ली की बिजली कंपनियों को डीईआरसी द्वारा एप्रूव्ड टैरिफ से 25 % से 50% ज्यादा महंगे दामों पर बिजली दे रही है। उन्होंने साझा करते हुए कहा कि, एनटीपीसी अरावली का एप्रूव्ड रेट 3.16 रुपये प्रति किलोवाट है लेकिन वहां से दिल्ली की बिजली कंपनियों को बिजली 4.50 रूपये में मिल रही है| वही दादरी-2 प्लांट को जो बिजली 3.16 के रेट पर बेचनी है वो 4.72 रुपये की दर से बेच रही है| यही हाल एमटीपीएस-7 प्लांट का है जिसके लिए बिजली कंपनियां 2.77 रुपये के बजाय 3.48 चूका रही है। बिजली मंत्री आतिशी ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए कहा कि, देश को आजाद हुए 75 साल हो चुके है लेकिन आज तक देश में कभी भी कोयले की कमी नहीं हुई है, जो पहली बार पिछले 1 साल में हुई है| देश में कोयले की कमी नहीं है। कमी सिर्फ इसलिए है क्योंकि केंद्र सरकार उसका उत्पादन नहीं कर रही है। और इसका नतीजा ये है कि केंद्र सरकार ने एक आदेश पारित कर दिया है कि कोई भी राज्य या पावर प्लांट जो कोयला इस्तेमाल करती है उसका कम से कम 10% आयातित कोयला होना चाहिए। जबकि आयातित कोयले का दाम देश में पाए जाने वाले कोयले से 10 गुणा से भी ज्यादा है। उन्होंने साझा करते हुए कहा कि, देश में घरेलू कोयले की कीमत लगभग 2000 रूपये प्रति टन है जबकि अब केंद्र सरकार के आदेश के कारण थर्मल पॉवर प्लांट को आयातित कोयले का इस्तेमाल करना पड़ रहा है उसकी कीमत 25000 रूपये प्रति टन है| इस आदेश से आज देशभर में बिजली महंगी हो रही है चाहे वो देश के किसी भी पॉवर प्लांट में उत्पादित हो। साथ ही गैस आधारित पॉवर प्लांट में केंद्र सरकार द्वारा गैस संकट पर कण्ट्रोल न कर पाने की वजह से भी बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। बिजली मंत्री ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि, क्या केंद्र सरकार की कोयला आयात करने वालों से कोई सांठगांठ है? जिसकी वजह से केंद्र सरकार बिजली कंपनियों से जबरदस्ती कर बिजली कंपनियों को 10 गुणा दाम पर कोयला खरीदने को मजबूर कर रहे है? उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि, देश में कोयले की कोई कमी नहीं है उसके बावजूद उत्पादन कम होता है तो क्या ये आर्टिफिशियल कमी नहीं है? क्या ये जबरदस्ती कोयला आयात करना और कोयला आयात करने वालों को फायदा पहुंचाना नहीं है? उन्होंने कहा कि किसी भी बिजली कंपनी के लिए चाहे वो दिल्ली की प्राइवेट कंपनियां हो या अन्य राज्यों की कंपनियां उनका 80% खर्चा बिजली खरीदने पर आता है। अगर केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से बिजली के दाम बढ़ेंगे, एनटीपीसी के बिजली उत्पादन के दाम बढ़ेंगे, कोयले के दाम बढ़ेंगे तो इसका असर न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश पर पड़ेगा| इसलिए मैं केंद्र सरकार को एक बात कहना चाहूंगी की आपकी जिम्मेदारी है कि आपको कोयले और गैस के दाम के कुप्रबंधन को ख़त्म करना होगा। बिजली मंत्री ने कहा कि, “मैं मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की ओर से दिल्ली के लोगों को आश्वासन देना चाहती हूँ कि, बेशक केंद्र सरकार के कुप्रबंधन के कारण बिजली के दाम बढ़े है लेकिन दिल्ली में जिनके बिजली के बिल 200 यूनिट से कम आते है उनपर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और उनका बिल जीरो आता रहेगा| इसमें आने वाला पूरा खर्चा दिल्ली सरकार ही उठायेगी।

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