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अपराध चंडीगढ़ फरीदाबाद हरियाणा

एसटीएफ हरियाणा की प्रभावी निवारक रणनीति की वजह से 121 युवाओं को संगठित अपराध की गिरफ्त से बचाया गया‘।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
’चंडीगढ़:’ हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के विस्तार पर निर्णायक प्रहार करते हुए एक व्यापक निवारक एवं सुधारात्मक अभियान के अंतर्गत राज्यभर में 121 ऐसे युवाओं की पहचान करके उन्हें सही दिशा में लाने में कामयाबी हासिल की जो विभिन्न माध्यमों से हरियाणा की प्रमुख आपराधिक गैंगों के संपर्क में पाए गए। यह पहल कानून प्रवर्तन के साथ-साथ समाज को सुरक्षित रखने की दिशा में हरियाणा पुलिस की दूरदर्शी नीति को दर्शाती है।’हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल’ ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को उस मोड़ पर सही दिशा देना है, जहाँ से वे या तो राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बन सकते हैं या फिर अपराध के दल दल में फंस सकते हैं। उन्होंने कहा कि एसटीएफ हरियाणा द्वारा 121 युवाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें परामर्श के माध्यम से संगठित अपराध से दूर रखना केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि समाज को सुरक्षित रखने की दूरदर्शी पहल है। इसके साथ-साथ हरियाणा पुलिस की साइबर पुलिस एवं जिला स्तर की पुलिस इकाइयाँ भी इसी प्रकार की निवारक एवं सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। 

सिंघल ने स्पष्ट किया कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य अपराधियों को दंडित करने के साथ-साथ उन युवाओं को बचाना है, जो भटकाव की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर संस्कृति, हिंसा और अपराध के महिमामंडन के खिलाफ यह लड़ाई केवल कानून की नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की भी है, जिसमें पुलिस, परिवार और समाज की साझा भूमिका है। डीजीपी ने दोहराया कि हरियाणा पुलिस युवाओं के भविष्य, सामाजिक सौहार्द और कानून के शासन की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करती रहेगी।एसटीएफ की गहन तकनीकी एवं फील्ड-स्तरीय निगरानी में सामने आया कि ये युवक गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय थे और गैंग गतिविधियों के प्रति आकर्षण प्रदर्शित कर रहे थे। गैंगस्टर और उनके सहयोगी युवाओं को लोभ और लालच के माध्यम से अपने जाल में फंसाते थे। उन्हें सोशल मीडिया और निजी संपर्कों के जरिए अपराध की एक झूठी चमक-धमक भरी दुनिया दिखाई जाती थी, जहाँ जल्दी पैसा, डर के सहारे बनाई गई पहचान और रुतबे को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जाता था। कई मामलों में गैंगस्टर युवाओं की पुरानी रंजिशों , व्यक्तिगत विवादों अथवा भावनात्मक कमजोरियों का फायदा उठाते थे। उनमें बदले की भावना को जानबूझकर भड़काया जाता था, ताकि वे तात्कालिक आवेश में आकर अपराध की दुनिया में कदम रख दें। गैंग नेटवर्क द्वारा यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया जाता था कि अपराध के माध्यम से सम्मान, शक्ति और समाधान प्राप्त किया जा सकता है, जबकि वास्तविकता में यह मार्ग युवाओं को केवल हिंसा, कानूनी कार्रवाई और जीवनभर के पछतावे की ओर ले जाता है।स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ ने दंडात्मक कार्रवाई के बजाय परामर्श और सुधार को प्राथमिकता देते हुए सभी 121 युवाओं को एक सुनियोजित काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल किया। काउंसलिंग सेशन में युवाओं को अपराध की राह पर जाने के बाद आने वाले कानूनी, सामाजिक और पारिवारिक दुष्परिणामों से अवगत करवाया गया। उन्हें जेल में बंद गैंग सदस्यों की वास्तविक स्थिति, उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक कठिनाइयों और टूटते पारिवारिक ढांचे के उदाहरणों के माध्यम से अपराध की सच्चाई से रूबरू कराया गया।यह परामर्श युवाओं के परिजनों तथा समाज के मौजिज व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित किया गया, ताकि सुधार की प्रक्रिया में परिवार और समाज की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। इन सत्रों के दौरान आपराधिक जीवन और एक जिम्मेदार , सम्मानजनक नागरिक जीवन के बीच के अंतर को गहराई से समझाया गया और युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया गया।एसटीएफ द्वारा इन सभी युवाओं की बाद की अवधि में भी निरंतर निगरानी की जा रही है। समीक्षा में यह पाया गया है कि समयबद्ध और प्रभावी परामर्श के चलते सभी 121 युवक अपराध से दूरी बनाए हुए हैं,जो इस निवारक मॉडल की सफलता और प्रासंगिकता को प्रमाणित करता है।स्पेशल टास्क फोर्स डिजिटल माध्यमों पर भी संगठित अपराध और गैंगस्टरवाद के प्रचार-प्रसार पर कड़ी नजर रखे हुए है। हिंसा, गैंगस्टर संस्कृति और असामाजिक गतिविधियों के महिमामंडन से जुड़े अवैध कंटेंट के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई की जा रही है, ताकि युवाओं को नकारात्मक प्रभावों से बचाया जा सके।सोशल मीडिया के माध्यम से गैंगस्टरों के संपर्क एवं प्रभाव में आने वाले युवाओं की पहचान के लिए हरियाणा पुलिस बहु-स्तरीय एवं तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली के तहत कार्य करती है। आपराधिक मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ तथा उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के सामान्य विश्लेषण के दौरान कई बार ऐसे युवाओं की जानकारी सामने आती है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आपराधिक तत्वों के संपर्क में होते हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर सक्रिय आपराधिक प्रोफाइल्स और उनसे जुड़ी गतिविधियों के पैटर्न पर निगरानी रखी जाती है, ताकि यह समझा जा सके कि किन युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस प्रक्रिया में प्राप्त सूचनाओं के आधार पर चिन्हित किए गए युवाओं का परामर्श और मार्गदर्शन दिया जाता है तथा परिजनों को साथ लेकर उन्हें अपराध से दूर रखते हुए समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।  हरियाणा पुलिस की यह पहल यह स्पष्ट करती है कि संगठित अपराध के विरुद्ध प्रभावी रणनीति केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि रोकथाम, सुधार और सामाजिक सहभागिता पर आधारित होनी चाहिए। एसटीएफ हरियाणा द्वारा अपनाया गया यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर भी युवाओं को अपराध से बचाने की दिशा में एक प्रभावी और अनुकरणीय उदाहरण के रूप में उभर रहा है।

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