अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
देश को दहला देने वाले नोएडा के बहुचर्चित ‘निठारी नरसंहार’ के मुख्य आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की उत्तराखंड के हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक, हरिद्वार में एक चाय की दुकान के अंदर उसका शव फंदे से लटकता मिला। पुलिस इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही है, लेकिन कोली के परिजनों और निठारी कांड के पीड़ितों ने इसे सोची-समझी हत्या करार देकर पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है।

साल 2006 में सामने आए निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर पर मासूम बच्चों और युवतियों की नृशंस हत्या, दुष्कर्म और दरिंदगी के आरोप लगे थे। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2025 में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद कोली जेल से बाहर आया था। इसके बाद वह हरिद्वार में एक चाय की दुकान चलाने लगा था। लेकिन अचानक दुकान के भीतर उसका शव लटकता मिलने से सनसनी फैल गई है। जहां पुलिस इसे खुदकुशी का मामला मानकर जांच कर रही है, वहीं इस मामले से जुड़े लोगों और परिजनों ने सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जो शख्स कई साल जेल में काटने के बाद रिहा हुआ, वह बाहर आकर आत्महत्या क्यों करेगा? निठारी कांड मृतको के परिजनों का सीधा आरोप है कि सुरेंद्र कोली निठारी कांड और उससे जुड़े कई प्रभावशाली चेहरों के राज जानता था, इसलिए उसकी जुबान हमेशा के लिए बंद कर दी गई। फिलहाल हरिद्वार पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और गहन जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह आत्महत्या है या किसी गहरी साजिश के तहत की गई हत्या।
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