अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:हरियाणा की दो सगी बहनों रिधिमा कौशिक और विधिका कौशिक ने कम उम्र में ही किक बॉक्सिंग की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। दोनों बहनें अब तक 100 से अधिक गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं और अपनी प्रतिभा से देश-विदेश में पहचान बना चुकी हैं। रिधिमा ने लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप पर अपना कब्जा जमाया। महिला दिवस के अवसर पर उनकी यह उपलब्धि न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और पारिवारिक सहयोग मिले तो भारत की बेटियां किसी भी वैश्विक मंच पर अपनी क्षमता का लोहा मनवा सकती हैं। हरियाणा की ये बेटियां उन रूढ़ियों को भी तोड़ रही हैं, जिनमें खेलों को कभी केवल बेटों तक सीमित माना जाता था। आज ये देश की करोड़ों लड़कियों के लिए “शक्ति और आत्मविश्वास” का प्रतीक बन चुकी हैं।
किक बॉक्सिंग में नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने के साथ-साथ उज्बेकिस्तान वर्ल्ड कप जीतने के बाद अब दोनों बहनें वर्ल्ड चैंपियन बनने के लक्ष्य के साथ कड़ी मेहनत कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय किक बॉक्सिंग खिलाड़ियों में रिधिमा कौशिक का नाम वर्ल्ड में नंबर-1 की सूची में शामिल हो गया है। देश को इन दोनों बहनों की उपलब्धियों पर गर्व है।प्ले स्कूल के दौरान ही ताइक्वांडो से अपने खेल सफर की शुरुआत करने वाली दोनों बहनों का यह जुनून अब किक बॉक्सिंग में बदल चुका है। पढ़ाई के साथ-साथ दोनों लगातार इस खेल में आगे बढ़ रही हैं और नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। दोनों बेटियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनकी मां रितु कौशिक की अहम भूमिका रही है। वे बच्चों के डाइट प्लान, पढ़ाई और संस्कार का पूरा ध्यान रखती हैं और हर कदम पर उनका मार्गदर्शन करती हैं।

हरियाणा के जींद जिले के गांव भौंगरा से संबंध रखने वाले समाजसेवी एवं व्यवसायी सुरेंद्र कौशिक की बेटियां रिधिमा और विधिका वर्तमान में फरीदाबाद के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। पिता सुरेंद्र कौशिक ने अपनी बेटियों के सपनों को उड़ान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मोटापे से बचने के लिए शुरू किया था ताइक्वांडो
पिता सुरेंद्र कौशिक बताते हैं कि उनकी बड़ी बेटी रिधिमा बचपन से ही हेल्दी थी। उसे फिट रखने के उद्देश्य से उन्होंने प्ले स्कूल से ही ताइक्वांडो की ट्रेनिंग दिलानी शुरू कर दी। रिधिमा ने कुछ ही समय में अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित किया और एक के बाद एक मेडल जीतकर परिवार और देश का नाम रोशन किया।बाद में छोटी बहन विधिका ने भी ताइक्वांडो से खेल की शुरुआत की और आगे चलकर किक बॉक्सिंग में अपनी पहचान बना ली। आज दोनों बहनों का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ लिया जाता है।
बॉक्स
3 वर्ष की उम्र से शुरू की थी प्रैक्टिस
ड्रैगन मार्शल आर्ट एकेडमी की कोच दिव्या और संतोष थापा के अनुसार रिधिमा कौशिक और विधिका कौशिक ने मात्र 3 वर्ष की उम्र से ही किक बॉक्सिंग की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। दोनों बहनों ने अनुशासन में रहकर हमेशा पढ़ाई के साथ-साथ खेल में गहरी रुचि दिखाई। कोच के अनुसार परीक्षा के दिनों में भी उन्होंने कभी अभ्यास से दूरी नहीं बनाई और नियमित रूप से प्रैक्टिस जारी रखी। स्वभाव से विनम्र होने के साथ-साथ खेल के मैदान में उनका जोशीला अंदाज उनकी खास पहचान है। स्कूल की विभिन्न गतिविधियों में भी दोनों बहनें बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं। खेल के दौरान वे अन्य बच्चों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहती हैं। अपने मिलनसार स्वभाव के साथ-साथ दोनों पढ़ाई और वाक्-कला में भी निपुण7 हैं।
उपलब्धियों पर एक नजर
नाम: रिधिमा कौशिक, विधिका कौशिक
खेल: किक बॉक्सिंग
उपलब्धियां: 100 से अधिक गोल्ड मेडल
अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: उज्बेकिस्तान वर्ल्ड कप समेत लगातार तीन बार वर्ल्ड कप विजेता
रैंकिंग: रिधिमा कौशिक – वर्ल्ड में नंबर-1
गृहनगर: गांव भौंगरा, जिला जींद (हरियाणा)
वर्तमान निवास: फरीदाबाद
स्कूल: दिल्ली पब्लिक स्कूल, फरीदाबाद
पिता: सुरेंद्र कौशिक (समाजसेवी व व्यवसायी)
माता: रितु कौशिक
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