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दिल्ली

अब आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों की मजबूत होगी नींव, सीएम केजरीवाल ने लांच किया ‘खेल पिटारा’

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:सीएम अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के लिए ईसीसीई किट (खेल पिटारा) लांच किया। इस खेल पिटारा किट में खेल सामग्री, खिलौने और सरक्षरता संबंधी संसाधनों को शामिल किया गया है। इसमें मैनुअल की सुविधा भी है, जो प्रत्येक सामग्री के इस्तेमाल को लेकर विस्तार से मार्गदर्शन करेगा। त्यागराज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ज्यादातर गरीब लोग अर्ली चाइल्डहुड शिक्षा के लिए अपने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में भेजते हैं, जबकि अमीर लोग क्रेच में भेजते हैं। हम इन दोनों के बीच के अंतर को खत्म करना चाहते हैं। हम आंगनवाड़ी में बच्चों को वैसा ही वातावरण देना चाहते हैं, जैसा प्राइवेट क्रेच में मिलता है। सीएम ने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचर्स की तरह ही आंगनवाड़ी वर्कर्स को भी हम बड़े-बड़े संस्थानों में भेजकर ट्रेनिंग दिलवाएंगे और सबको नॉन टीचिंग कार्य से मुक्ति दिलाएंगे, ताकि वे बच्चों पर अधिक फोकस कर सकें।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आतिशी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एससीईआरटी द्वारा तैयार किए गए इस खेल पिटारा किट को बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लांच किया। इस दौरान एक वीडियो के जरिए खेल पिटारा की खूबियों के बारे में बताया गया। खेल पिटारा को बच्चों की जरूरतों और सीखने के तरीके को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। इसमें पजल्स, स्टेशनरी समेत कई रोचक चीजें शामिल हैं। इसके प्रयोग से आंगनवाड़ी वर्कर्स बच्चों को खेल-खेल में सिखने और भविष्य के लिए अपनी बुनियादी समझ को विकसित करने में मदद करेगी। इस दौरान सीएम  अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ईसीसीई किट (खेल पिटारा) बहुत शानदार है। एससीईआरटी ने देश और दुनिया भर में चल रहे अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम का अध्ययन करने के बाद इस किट को तैयार किया है। इसमें कई तरह के लर्निंग मटेरियल और खेलने के सामान दिए गए हैं। हमारा शुरू से सपना रहा है कि इस देश के हर बच्चे को समान शिक्षा मिलनी चाहिए। चाहे वो अमीर का बच्चा हो या गरीब का हो। अभी तक हमारे देश में दो तरह की शिक्षा प्रणाली चलती थी। अमीरों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जाते थे और गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते थे। सरकारी स्कूलों में पढाई खराब होती थी। इसलिए बड़ा होकर गरीब का बच्चा गरीब बनता था और अमीर का बच्चा अमीर बनता था। अमीर-गरीब के बीच यह खाई बढ़ती जाती थी। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में हमारी सरकार बनने के बाद हमने सारे सरकारी स्कूलों को शानदार बना दिया और उनमें शिक्षा का स्तर अच्छा किया। अब दिल्ली सरकार के स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों के बीच कोई अंतर नहीं रह गया है। बल्कि कई मां-बाप प्राइवेट स्कूलों से अपने बच्चों को निकाल कर सरकारी स्कूलों में भर्ती करा रहे हैं। दिल्ली सरकार के स्कूल छठीं कक्षा से शुरू होते हैं। इसलिए मन में आता था कि अगर हम एमसीडी जीत जाएं तो पांचवीं तक के स्कूल भी हमारे पास आ जाएंगे। उपर वाले ने हमारी सुन ली और हम एमसीडी भी जीत गए। अब पांचवीं तक प्राइमरी स्कूलों को ठीक करने का कार्यक्रम शुरू हो गया है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एमसीडी के पांचवीं तक के स्कूलों में पहली क्लास में दाखिला लेने वाले बच्चों को तैयार करने की जिम्मेदारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की है। आंगनवाड़ी में अक्सर गरीब लोग अपने बच्चों को भेजते हैं। जबकि अमीर लोग अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम के लिए क्रेच में भेजते हैं। हम चाहते हैं कि इन दोनों के बीच के अंतर को भी खत्म करना चाहिए। हम आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले गरीबों के बच्चों को भी उसी तरह अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम और वातावरण देना चाहते हैं, जो सबसे अच्छे प्राइवेट क्रेच में मिलता है। कहा जाता है कि कई बार बच्चे को जन्म देने वाली मां अलग होती है और उसे पालने वाली मां अलग होती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका भी एक मां की तरह ही है। एक तीन साल का बच्चा आंगनवाड़ी कंेद्रों में कई घंटे बिताता है। इन बच्चों के मां-बाप बहुत ही गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं। गरीबी की वजह से उनके घर में बहुत तनाव रहता है। परिवार में झगड़े हैं, पड़ोसियों से झगड़े हैं। इसकी वजह से वो बच्चा भी बहुत तनाव में रहता है। लेकिन जब उस बच्चे को आंगनवाड़ी केंद्र में बहुत अच्छा माहौल मिलने लगे तो उसका बचपन और अच्छा बन सकता है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर एक व्यक्ति की उम्र 100 साल है तो वो पूरी जिंदगी में जितना सीखता है, उसका 85 फीसद वो पहले 6 साल में सीखता है और बाकी 94 साल में वो व्यक्ति केवल 15 फीसद ही सीखता है। एक तरह से वो बच्चा कैसा बनेगा, इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। आंगनवाड़ी वर्कर्स एक बच्चे को नैतिक और मनोवैज्ञानिक मूल्यों के साथ बहुत सारी अच्छी चीजें सीखा सकती हैं। अभी तक आंगनवाड़ी केंद्रांे को बच्चों को खिलाने और पोषण का केंद्र माना गया है। हम इस धारणा को बदलना चाहते हैं। ये कंेद्र केवल खिलाने-पोषण का केंद्र नहीं होना चाहिए, बल्कि अर्ली चाइल्डहुड लर्निंग सेंटर भी होना चाहिए, जहां खेल के जरिए तरह-तरह की चीजें सिखाई जाएं और उसकी वैल्यू सिस्टम, इमोशनल और साइकोलॉजिकल की जरूरतों को पूरा किया जाए। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इंजीनियरिंग के फाइनल इयर के बच्चों को पढ़ाने वाले प्रोफेसर का काम आसान है, जबकि तीन साल के बच्चे को पढ़ाने वाली आंनवाड़ी कार्यकत्रियों का काम ज्यादा मुश्किल है। इंजीनियरिंग के बच्चों को पढ़ाना आसान इसलिए है कि प्रोफेसर किताबें पढ़ लेता है और बोर्ड पर लिख देता है, लेकिन एक बच्चे की आत्मीयता के साथ परवरिश करना बहुत कठिन है। हम दिल्ली सरकार के स्कूलों के टीचर्स को ट्रेनिंग के लिए देश के बड़े-बड़े संस्थानों में भेजते हैं। हम आंगनवाड़ी केंद्रों के वर्कर्स को भी देश के बड़े-बड़े संस्थाओं में ट्रेनिंग के लिए भेजेंगी। दिल्ली सरकार के 11 हजार आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों में करीब 1.75 बच्चे आते हैं। अगर ये बच्चे तीन साल केंद्र में रहते हैं तो हर साल 60 हजार बच्चे केंद्र से निकलते हैं और 60 हजार नए बच्चे आते हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि खेल पिटारा के जरिए आंगनवाड़ी वर्कर्स अब बच्चों को बहुत ही मनोरंजक तरीके से शिक्षा दे पाएंगी। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब हमारी सरकार बनती थी, उस समय दिल्ली सरकार के शिक्षकों से 80 फीसद काम नॉन टीचिंग का लिया जाता था। टीचर्स से पढ़ाने का काम नहीं कराते थे। हमारी सरकार ने ये तय किया कि टीचर्स अब सिर्फ पढ़ाने का ही काम करेंगे, पढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं करेंगे। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी कई तरह के दूसरे काम कराए जाते हैं। मुझे लगता है कि टीचर्स की तरह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी सिर्फ बच्चों को पढ़ाने के अलावा कोई और काम नहीं लेना चाहिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों के अलावा दूसरे जो काम कराए जाते हैं, वो दूसरों से कराया जाना चाहिए। ऐसे में ये बच्चों पर अधिक ध्यान दे पाएंगी। इस पर भी हम लोग विचार करेंगे। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बातचीत में देखते को मिला कि बच्चे प्राथमिकताओं में नहीं है, बल्कि दूसरे काम प्राथमिकताओं में हैं। हम समय-समय पर खेल पिटारा के प्रभाव का फीड बैक भी लेेंगे, ताकि अगर कोई सुधार करने की जरूरत है, उसमें सुधार किया जा सके। आज देश और दुनिया भर से लोग दिल्ली सरकार के स्कूल देखने के लिए आ रहे हैं। वो दिन भी जल्द आएगा, जब दुनिया भर से लोग हमारे आंगनवाड़ी केंद्र देखने के लिए आया करेंगे।

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