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अपराध दिल्ली

गोल्डी बरार गैंग के बदमाशों ने मांगी एक करोड़ की रंगदारी, नहीं देने पर शूटरों को भेज दिया मारने के लिए, इससे पहले ही 3 शूटरों को धर दबोचा।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
दिल्ली पुलिस की एसटीएफ , उत्तर जिला की टीम ने आज शुक्रवार को गोल्डी बरार गैंग से जुड़े 3 आरोपितों को एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने के मामले में गिरफ्तार किया है, रंगदारी नहीं देने पर उपरोक्त गैंग ने 3 शूटरों को शिकायतकर्ता को जान से मारने के लिए तैयार किया था। इससे पहले ही आरोपितों की सोची समझी फायरिंग की साजिश को नाकाम कर दिया। इस मामले में तत्परता से पीएस रूप नगर द्वारा संज्ञान में लिया गया, और तदनुसार एफआईआर संख्या 162/2026 दिनांक 17.09.2026, धारा 308(4)/351(4) बीएनएस, पीएस रूप नगर, दिल्ली में दर्ज की गई तथा जांच प्रारंभ की गई।

डीसीपी, उत्तर जिला, दिल्ली, निहारिका भट्ट ने आज जानकारी देते हुए बताया कि 16.09.2026 को लगभग 8:15 बजे रात में शिकायतकर्ता प्रवीण जैन को तीन मिस्ड कॉल प्राप्त हुईं और इसके पश्चात लगभग 9:27 बजे, उनके पुत्र आयुष को संयुक्त अरब अमीरात-आधारित मोबाइल नंबर से एक कॉल प्राप्त हुई। आरोप है कि कॉल करने वाले ने स्वयं को गोल्डी बराड़ का सहयोगी बताया और ₹1 करोड़ की मांग की, तथा फिरौती की मांग पूरी न किए जाने की स्थिति में परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। कॉल करने वाले ने पुनः परिवार से संपर्क किया और फिरौती की मांग तथा धमकियों को दोहराया। उनका कहना है कि कॉल की अंतरराष्ट्रीय उत्पत्ति और वसूली की धमकी की गंभीर प्रकृति को देखते हुए, सुश्री निहारिका भट्ट, आईपीएस, डीसीपी/उत्तर के समग्र पर्यवेक्षण तथा विशेष धत्तरवाल, एसीपी/ऑपरेशंस/उत्तर जिला, इंस्पेक्टर आशीष दुबे, एसटीएफ/उत्तर जिला, और इंस्पेक्टर रमेश कौशिक, एसएचओ/पीएस रूप नगर के नेतृत्व में एक समर्पित टीम का गठन किया गया। टीम में एसआई सरताज, एएसआई राजीव, एएसआई साहिर,एचसी मुकुल त्यागी, एचसी आशीष, एचसी निशांत, एचसी परवीन, सिपाही निशांत, सिपाही मयंक, सिपाही वरुण और सिपाही निशांत कौशिक, साथ ही एसआई हर्षित, आईओ/पीएस रूप नगर तथा अन्य स्टाफ शामिल थे। उन्होंने एसटीएफ के साथ निकट समन्वय में कार्य करते हुए वसूली नेटवर्क का पता लगाने, शामिल व्यक्तियों की पहचान करने और संचार श्रृंखला का खुलासा करने के लिए लक्षित तकनीकी एवं खुफिया-आधारित अभियान चलाए। मामले के पंजीकरण के तुरंत बाद, एसटीएफ उत्तर जिला ने पीएस रूपनगर के साथ घनिष्ठ समन्वय में अंतरराष्ट्रीय जबरन वसूली कॉलों के पीछे के व्यक्तियों की पहचान करने और संचार श्रृंखला का पता लगाने के लिए एक केंद्रित तकनीकी एवं खुफिया-आधारित जांच शुरू की। निरंतर निगरानी, डिजिटल अभिलेखों के परीक्षण और क्षेत्रीय पूछताछ से विदेश स्थित कॉलर तथा उसके भारतीय सहयोगियों के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त हुए। संचार अवसंरचना के विश्लेषण से आईपी पता 51.91.249.248 का पता चला, जो ओवीएच एसएएस, फ्रांस से संबद्ध था, जिससे वीपीएस/डेटा-सेंटर अवसंरचना के उपयोग का संकेत मिला, जबकि संबद्ध डिजिटल खातों ने यूएई कनेक्शन की ओर इशारा किया। इसके सब्सक्राइबर अबूज़र के 13.06.2026 को दुबई यात्रा करने की बात सामने आई। दुबई में उस्मान के सिम और एक हैंडसेट के आईएमई आई के उपयोग ने तकनीकी सुराग में और अधिक कड़ियाँ प्रदान कीं।इन सुरागों का पीछा करते हुए, टीम ने देहरादून और करनाल में जुबैर, मारूफ और उस्मान का पता लगाया और उनसे पूछताछ की। उनकी पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण से संकेत मिला कि धमकी भरा कॉल कथित तौर पर दुबई से आरिश ने किया था, जिसे उस्मान और अबुज़र का भाई बताया जाता है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रसूलपुर गुर्जरन निवासी आरिफ @ पिस्टल एक महत्वपूर्ण भारतीय परिचालन कड़ी के रूप में सामने आया। आरोप है कि उसने आरिश को कॉल करने के लिए मोटी रकम की पेशकश की और उसे हरियाणवी में बोलने का निर्देश दिया, ताकि विदेश से आई धमकी किसी स्थानीय आपराधिक सहयोगी की ओर से आई हुई प्रतीत हो। आगे की जांच में टिटवाड़ा के मुबारिक @ गुल्लू की एक प्रमुख षड्यंत्रकारी के रूप में कथित संलिप्तता भी सामने आई।जब रूप नगर की जांच पहले से ही उन्नत चरण में थी,उसी प्रकार की एक समान जबरन वसूली की कोशिश 19.09.2026 को सेक्टर-1, रोहिणी के एक निर्माण व्यवसायी मनोज मलिक को निशाना बनाकर की गई। उनके छोटे भाई को यूएई-आधारित उसी नंबर से रात 10:11 बजे और 10:12 बजे दो व्हाट्सएप कॉल प्राप्त हुईं, जिसके बाद 37 सेकंड का एक ऑडियो संदेश आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को महेंद्रगढ़ का विक्रांत बताया, गोल्डी बराड़ गिरोह से संबद्धता का दावा किया और 48 घंटे के भीतर ₹1 करोड़ की मांग की, तथा गोलीबारी और अन्य गंभीर परिणामों की धमकी दी। इस घटना ने पहले से जांचाधीन कार्यप्रणाली की पुष्टि की। इसके पश्चात, थाना विजय विहार, रोहिणी जिला में धारा 308 (2)/351(2) बीएनएस के तहत दिनांक 24.09.2026 को एफआईआर संख्या 0520/2026 दर्ज की गई। जांच के आगे बढ़ने के साथ, खुफिया जानकारी से यह पता चला कि आरिफ और उसके सहयोगियों की रूप नगर स्थित पीड़ित के आवास पर कई राउंड फायर करने और उसके बाद फिर से रंगदारी की मांग करने की कथित योजना थी। यह योजना कथित रूप से उसके निर्धारित क्रियान्वयन से लगभग दो दिन पहले बनाई गई थी। खुफिया जानकारी पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, पीएस रूप नगर के समन्वय से पीड़ित के आवास पर निवारक प्रबंध किए गए, जिससे कथित हमले को उसके क्रियान्वयन से पहले ही विफल कर दिया गया।निरंतर तकनीकी निगरानी और क्षेत्रीय खुफिया जानकारी ने आरिफ की गतिविधियों का पता अहमदाबाद, गुजरात तक लगाया। एसटीएफ की एक टीम ने पीएस रूपनगर के साथ घनिष्ठ समन्वय में अहमदाबाद में एक समन्वित अभियान चलाया और 24.09.2026 को वेजलपुर, अहमदाबाद से आरिफ @ पिस्टल पुत्र इनाम को गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी से कथित अंतरराष्ट्रीय रंगदारी नेटवर्क के भारतीय परिचालन संबंधों को स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली।आगे की जांच में यह सामने आया कि यदि वसूली की मांग पूरी नहीं की जाती, तो कथित तौर पर धमकियों को अंजाम देने के लिए शूटरों को नियुक्त किया गया था। मुबारिक @ गुल्लू ने कथित तौर पर किराड़ी, दिल्ली में उनके ठहरने की व्यवस्था की और कमरे का किराया भी चुकाया। चार संदिग्ध शूटर—दो पानीपत से और दो खालापार, मुजफ्फरनगर से—वांछित आरोपियों के रूप में सामने आए हैं। समर्पित टीमें शेष आरोपियों की तलाश कर रही हैं, दुबई-आधारित कॉलर का पता लगा रही हैं और नेटवर्क के व्यापक संचार एवं वित्तीय संबंधों की जांच कर रही हैं।
पूछताछ:
पूछताछ और उसके बाद की गई जांच के दौरान, आरिफ @ “पिस्टल” कथित तौर पर संदिग्ध भारत–दुबई उगाही नेटवर्क में, जो गोल्डी बराड़ के नाम पर संचालित हो रहा था, एक महत्वपूर्ण भारतीय परिचालन कड़ी के रूप में सामने आया। जांच में यह सामने आया कि दुबई-आधारित आरिश को कथित तौर पर धमकी भरा कॉल करने की जिम्मेदारी दी गई थी और इस काम के लिए उसे मोटी रकम की पेशकश की गई थी। उसे हरियाणवी में बोलने के निर्देश दिए गए थे, ताकि विदेश से दी गई धमकी किसी स्थानीय आपराधिक सहयोगी की ओर से आई हुई प्रतीत हो। आगे की पूछताछ और विश्लेषण से टिटवाड़ा के मुबारिक @ गुल्लू की कथित भूमिका एक प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में सामने आई। कथित साजिश में यह शामिल था कि यदि रंगदारी की मांग पूरी नहीं की गई, तो धमकियों को अंजाम देने के लिए शूटरों को लगाया जाए। मुबारिक ने कथित तौर पर उनके लिए दिल्ली के किराड़ी में ठहरने की व्यवस्था की और कमरे का किराया भी चुकाया। चार संदिग्ध शूटर, जिनमें दो पानीपत से और दो मुजफ्फरनगर के खालापार से हैं, वांछित आरोपियों के रूप में सामने आए हैं, और उन्हें तलाशने तथा गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
आरोपी व्यक्तियों का प्रोफ़ाइल:
 आरिफ @ पिस्टल, पुत्र इनाम, आयु 32 वर्ष, निवासी अहमदाबाद, गुजरात, मूल रूप से शामली, उत्तर प्रदेश का रहने वाला, को 24.09.2026 को वेजलपुर, अहमदाबाद से गिरफ्तार किया गया। उस पर संदेह है कि वह कथित गोल्डी बराड़ गिरोह से जुड़े भारत–दुबई वसूली नेटवर्क में एक प्रमुख भारतीय परिचालन कड़ी के रूप में कार्य कर रहा था। वह इससे पहले 2016 से 2026 के बीच थाना कैराना, जिला शामली में दर्ज 12 मामलों में शामिल रहा है, जो हत्या के प्रयास, वसूली, आपराधिक धमकी, दंगा और शस्त्र अधिनियम के अपराधों से संबंधित हैं।
 मुबारिक @ गुल्लू, निवासी टिट्टवाड़ा, शिकायतकर्ता के साझीदार दिलशाद का सगा भाई है। उसे मामले में मुख्य षड्यंत्रकारी के रूप में पहचाना गया है। जांच के दौरान यह सामने आया कि उसी ने पूरी योजना बनाई और सह-अभियुक्त आरिफ को सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई। उसने शूटरों के किराड़ी, दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था भी की और उनके आवास का किराया भी अदा किया। उसे 25.09.2026 को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया।
 नवाब अली @ सोनिज, निवासी मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, नियोजित फायरिंग को अंजाम देने के लिए रखे गए चार वांछित शूटरों में से एक था। उसे 01.10.2026 को रेवाड़ी और अलवर के बीच के क्षेत्र में उस समय पकड़ा गया जब वह ट्रेन से भाग रहा था, और आरपीएफ के समय पर हस्तक्षेप एवं सहायता से उसे रेवाड़ी स्टेशन के पास चलती ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया गया।
आगे की जांच:
शेष आरोपियों, जिनमें चार संदिग्ध शूटर शामिल हैं, को गिरफ्तार करने, दुबई-आधारित कॉलर का पता लगाने और कथित गोल्डी बराड़ गिरोह से जुड़े भारत–दुबई वसूली नेटवर्क की पूरी संचालनात्मक संरचना स्थापित करने के लिए आगे की जांच जारी है। भारतीय सहयोगियों और विदेश स्थित साथियों की भूमिकाओं की जांच संचार अभिलेखों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के माध्यम से की जा रही है। दो दिल्ली के व्यवसायियों को समान ₹1 करोड़ की रंगदारी मांग के साथ निशाना बनाने के लिए एक ही यूएई नंबर के उपयोग की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस नेटवर्क की अन्य समान अपराधों में भी संलिप्तता है और अतिरिक्त साक्ष्य एकत्र किए जा स

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