

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: सोमवार को हरियाणा सरकार के निर्णय, जिसे मुख्य सचिव (सतर्कता), हरियाणा के पत्र द्वारा से सूचित किया गया था,की अनुपालना में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, पंचकूला द्वारा मुकदमा दर्ज कर जांच आरंभ की गई। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340(2) एवं 61(2) के अंतर्गत दर्ज किया गया है।

सरकार से प्राप्त पत्र एवं संलग्न दस्तावेजों के परीक्षण के दौरान यह गंभीर आरोप सामने आए कि कुछ सरकारी विभागों के बैंक खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 शाखा में संचालित थे। इन खातों में जमा सरकारी धनराशि को कथित तौर पर अनधिकृत रूप से अन्य खातों—जिनमें निजी फर्मों, सरकारी विभागों एवं अन्य व्यक्तियों के खाते शामिल हैं—में स्थानांतरित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की आशंका व्यक्त की गई है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

जांच के क्रम में संबंधित बैंकों तथा विभागों से प्रासंगिक दस्तावेज एवं वित्तीय रिकॉर्ड एकत्रित किए जा रहे हैं और प्रत्येक लेन-देन का सूक्ष्म परीक्षण किया जा रहा है। दिनांक 24.02.2026 को विजिलेंस मुख्यालय में विस्तृत पूछताछ के उपरांत 4 आरोपितों—ऋभव ऋषि (पंचकूला निवासी), अभय कुमार (चंडीगढ़ निवासी ), स्वाति सिंगला (चंडीगढ़ निवासी) एवं अभिषेक सिंगला (चंडीगढ़ निवासी)—को गिरफ्तार किया गया है।गिरफ्तार आरोपितों को आज न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जहाँ से उन्हें 7 दिन के रिमांड पर भेजा गया, ताकि प्रकरण के सभी पहलुओं की गहन जांच सुनिश्चित की जा सके तथा इस मामले से जुड़े अन्य संभावित तथ्यों और व्यक्तियों की भूमिका का भी विधिसम्मत अन्वेषण किया जा सके। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की नीति पर दृढ़तापूर्वक कार्य करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सुशासन को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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