अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ.सुधांशु त्रिवेदी ने आज बुधवार को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की तीव्र प्रगति से बौखलाई विदेशी और स्वदेशी राष्ट्र-विरोधी शक्तियां एक गहरी दुर्भि संधि के तहत देश को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रही हैं। प्रधानमंत्री के विजय दशमी संदेश का स्मरण कराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इन शक्तियों का मुख्य उद्देश्य सत्ता में लूट मचाना, समाज में फूट डालना और सनातन धर्म व भारतीय संस्कृति का विनाश कर ‘रिजीम चेंज’ (तख्तापलट) करना है।

रावण के दस सिरों की भांति नित नए भ्रामक मुद्दे जैसे ईवीएम, एलआईसी, सेबी आदि उठाकर देश के विकास मार्ग को अवरुद्ध करने वाली इन छद्म वेश धारी आसुरी शक्तियों की वास्तविकता को पहचानना अत्यंत आवश्यक है, इसलिए देश के हर नागरिक को जागरूक होकर अपने ही घर में छिपे हुए इन गद्दारों से पूरी तरह सावधान रहना चाहिए।

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस गति,शक्ति और दिशा से प्रगति की राह पर बढ़ते हुए संपूर्ण विश्व में अपना प्रभावी स्थान बना रहा है, वह अनेक शक्तियों को रास नहीं आ रहा है। वे शक्तियां देश के बाहर भी हैं और देश के अंदर भी। दोनों ही शक्तियों में एक दुर्भिसंधि बहुत स्पष्ट दिखाई पड़ रही है। इस समय संपूर्ण विश्व और यूरोप में भी जो कुछ दिखाई पड़ रहा है, वह इस विषय के बारे में और अधिक स्पष्ट चित्र देश के हर नागरिक के मन में स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने विजय दशमी के दिन एक बहुत स्पष्ट संदेश पूरे देश को दिया है कि इस समय जो शक्तियां भारत को अस्थिर करने में लगी हैं, उनके तीन मुख्य आधार है- पहला सत्ता में आने पर लूट, दूसरा समाज में फूट और तीसरा भारतीय संस्कृति तथा धर्म से घृणा।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि उन शक्तियों का लक्ष्य समाज में फूट डालना, सत्ता में लूट मचाना है। उनके दिल में भारतीय संस्कृति एवं हिंदू धर्म के प्रति नफरत है। ये वही लोग हैं जो सनातन धर्म के उन्मूलन (इरडिकेशन ऑफ सनातन धर्म) की कॉन्फ्रेंस करते हैं और वैश्विक स्तर पर ‘डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ के अभियान को लेकर चलते हैं। वे भारत की हर संस्था के बारे में भ्रामक प्रचार करते हैं। उन्होंने त्योहारों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये भारत के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। गत वर्ष नवरात्रि से लेकर दीपावली और छठ पूजा तक लाखों करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था और इस बार उससे भी अधिक होने की संभावना है।डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो बात याद दिलाई है, उसे देशवासियों को ध्यान में रखना चाहिए कि ये वे शक्तियां हैं जो भारत को आगे नहीं आने देना चाहती हैं।
उदाहरण के रूप में इनकी मांग कभी वास्तविक नहीं होती है। कभी ये कहेंगे कि एलआईसी (LIC) गड़बड़ है, कभी एचएएल (HAL) में, कभी एसबीआई (SBI), सेबी (SEBI), वैक्सीन, ईवीएम (EVM) या इलेक्टोरल रोल में गड़बड़ बताएंगे। उन्होंने विजय दशमी का संदर्भ देते हुए कहा कि जैसे रावण के दस सिर थे और एक सिर कटने पर दूसरा प्रकट हो जाता था, वैसे ही इनकी एक मांग पूरी होने पर दूसरी मांग खड़ी हो जाती है। इसका मूल कारण उसकी नाभि में है।डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश के हर प्रबुद्ध व्यक्ति चाहे वह वृद्ध हो, प्रौढ़ हो, युवा हो या किशोर उसे समझना चाहिए कि इस समस्या का मूल स्रोत कहां पर है। यह नाभि वही है जो हर प्रकार के आंदोलन में एक ही प्रकार के वाक्य और शब्द बोलती हुई दिखाई पड़ती है। जब लोग इस नाभि को समझ लेंगे, तो वे यह भी समझ जाएंगे कि यह मूल स्रोत विशेष रूप से धर्म विरोधी आसुरी शक्तियों द्वारा भारत के विध्वंस के लिए रचा जा रहा है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि जब रावण माता सीता का हरण करने आया था, तो वह अपने वास्तविक आसुरी वेश में नहीं, बल्कि साधु का वेश धारण करके आया था।भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि आज ये दो बिंदु निश्चित रूप से ध्यान रखने योग्य हैं कि बहुत सी शक्तियां भेष बदलकर और छलावरण धारण करके आ रही हैं। उनका वास्तविक उद्देश्य कोई विशेष मांग पूरी करवाना नहीं है, बल्कि उनका एक ही उद्देश्य है, रिजीम चेंज यानी तख्ता पलट। वे हिंसक संघर्ष और षड्यंत्र के द्वारा भारत की प्रगति के मार्ग का विध्वंस करना चाहते हैं। वे भारतीय समाज में फूट डालकर तोड़फोड़ उत्पन्न करना चाहते हैं और धर्म व संस्कृति का विनाश करना चाहते हैं। इसलिए यह एक गंभीर और विचारणीय प्रश्न है।डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि वे इस परिस्थिति को आजादी के बाद के दशक के एक बहुत पुराने गीत की पंक्ति के माध्यम से देश के सामने रखना चाहेंगे। उन्होंने अपील की कि विजय दशमी के पावन पर्व पर देश के सामने जो चुनौतियां हैं, उन्हें बहुत गहराई से समझा जाए और उन शक्तियों की वास्तविकता को पहचाना जाए। उन्होंने उस गीत की पंक्ति दोहराते हुए कहा, “कहनी है एक बात मुझे इस देश के बरखुरदारों से, संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से।”
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