
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
नोएडा पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ‘डिजिटल डकैतों’ के गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सात समंदर पार बैठे विदेशी नागरिकों की जेब साफ कर रहे थे। सेक्टर 76 से संचालित होने वाले इस फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ये ठग ‘टेक सपोर्ट’ के नाम पर अमेरिकन और अन्य विदेशी नागरिकों को डराते थे और देखते ही देखते उनके बैंक खातों को साफ कर डाल देते थे।पुलिस की गिरफ्त में खडे बिलाल, देव कपाही, अभिषेक मुखेजा और कुशाग्र निम्बेकर को थाना साइबर क्राइम पुलिस ने इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर 7 अप्रैल 2026 को सेक्टर 76 से इन 4 साइबर अपराधियों को दबोचा है।

इनके पास से भारी मात्रा में लैपटॉप और मोबाइल बरामद हुए हैं, जो इनके काले कारनामों के गवाह हैं।डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि गैंग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ‘पेड विज्ञापन’ चलाता था और अपना टोल-फ्री नंबर डिस्प्ले करता था. जैसे ही कोई विदेशी नागरिक इनके नंबर पर कॉल करता, ये खुद को ‘टेक्निकल सपोर्ट एजेंट’ बताते। ये उन्हें डराते थे कि उनका कंप्यूटर हैक हो गया है और डेटा चोरी होने वाला है।

डीसीपी साइबर ने बताया कि यह गैंग विश्वास जीतने के लिए ‘स्क्रीन शेयरिंग ऐप’ के जरिए यूजर का एक्सेस लेते और स्क्रीन को जानबूझकर ‘ब्लैक’ कर देते थे ताकि यूजर घबरा जाए। पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, स्क्रीन शेयरिंग के दौरान ये चुपके से बैंकिंग जानकारी चुरा लेते थे। यदि खाते में कम पैसा होता, तो ये 350 से 2000 यूएस डॉलर तक की वसूली करते थे।अगर खाते में ज्यादा पैसा होता, तो कॉल को तुरंत ऑनलाइन मौजूद अपने ‘सीनियर हैकर्स’ को ट्रांसफर कर देते थे।ठगी की गई रकम को पुलिस से बचने के लिए क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से मंगाया जाता था और फिर आपस में बांट लिया जाता था।नोएडा पुलिस के अनुसार, अभियुक्तों के पास से बरामद डिवाइसों में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन के सबूत मिले हैं। ये अपराधी अब तक अनगिनत विदेशियों को अपना शिकार बना चुके हैं। इन अपराधियों ने नोएडा को ठगी का अड्डा बना रखा था। इनके कब्जे से बरामद डेटा की जांच की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
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