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पलवल

आधुनिक संस्कृत साहित्य विश्व साहित्य का समृद्धतम साहित्य: पदमश्री अवार्डी प्रो अभिराज राजेन्द्र मिश्र


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
पलवल:हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, बघौला में सोमवार से अर्वाचीन संस्कृत साहित्यस्य सर्जन यात्रा विषय पर  राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। पदमश्री अवार्डी प्रो० अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने बतौर मुख्यअतिथि संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक संस्कृत साहित्य विश्व साहित्य का समृद्धतम साहित्य है। इसमें विभिन्न दादरों के साथ नवीन चिंतन को व्यापक फलक पर उतारा गया है।उन्होंने कहा कि आज भी अर्वाचीन संस्कृत में इतना विशाल है कि समाज की समस्याओं का समाधान करने में वह सफल है। विभिन्न चिन्तन सरणियों को यहाँ स्थान मिला है। इस संगोष्ठी में देश भर से आए विद्वानों ने शिरकत की।

विशिष्ट अतिथि प्रो० सरोज कौशल ने अर्वाचीन संस्कृत साहित्य की परम्परा पर बखूबी प्रकाश डाला। सारस्वत अतिथि प्रो० सुज्ञान कुमार माहान्ति ने अर्वाचीन संस्कृत साहित्य में प्रगतीशील चितंन के विषय में प्रतिभागियों को विस्तार से बताया। अनेक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने इस विषय को प्रस्तुत किया।सम्मानित अतिथि प्रो धर्मानंद राउत ने अर्वाचीन संस्कृत साहित्य में लोकचेतना के बारे में विविध उदाहरणों के द्वारा लोक चेतना के परिप्रेक्ष्य में संस्कृत कविता के उदृस्त पक्ष को उजागर किया। संगोष्ठी के निदेशक एवं विद्वापीठ के प्राचार्य प्रो. दिलीप कुमार राणा ने अर्वाचीन संस्कृत साहित्य की दशा एवं दिशा तथा आधुनिकतावार की समग्र व्याख्या प्रस्तुत की। संगोष्ठी के समन्वयक डा. रामकुमार मिश्र ने अतिथियों का स्वागत सत्कार एवं कार्यक्रम का संचालन किया। गौरतलब है कि उक्त संतोष्ठी में देश भर से अनेक विद्वार एवं छात्र उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में प्रो पंकज कुमार मिश्र ने भाषान्तर साहित्य और संस्कृत साहित्य एक विमर्श पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संस्कृत के युवाओं को भाषान्तर साहित्य का भी भरपूर अध्ययन करना चाहिए। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ अनमोल शर्मा ने अर्वाचीन संस्कृत नाट्य विषय पर तेरह संस्कृत नाट्यों पर विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि युवा विद्वानों के द्वारा लिखे गए नाटकों में वर्णन वैविध्य के साथ साथ अभिनव चिंतन का भी समावेश हुआ है।

मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली से आए डॉ. ऋर्षिराज ने अर्वाचीन संस्कृत साहित्य में दंदोमुक्ति, पूर्व पक्ष एवं उत्तर पक्ष पर अपनी विशिष्ट शैली में समीक्षा की। उन्होंने कहा कि छंदोमुक्ति भी कहीं कहीं अपेक्षित है लेकिन सभी जगह नहीं। मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर अभय कुमार मिश्र ने उत्तर आधुनिकताऔर कतिपय समसामयिक संस्कृत कविता की पृष्ठभूमि पर अपने शोधपरक विचारों को सांझा किया। संस्कृत कविता में आधुनिकतावाद को प्रस्तुत करने वाले अनेक कवियों के उद्धरणों के माध्यम से उन्होंने व्याख्यान प्रदान किया। उक्त संगोष्ठी में डॉ़ कौशल तिवारी, डॉ नौनिहाल गौतम तथा डॉ अरूण निषाद आदि  युवा समीक्षक एवं कवि उपस्थित रहे।

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