
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:उपायुक्त आयुष सिन्हा के निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त उपायुक्त अंजलि श्रोत्रिया के मार्गदर्शन में आज जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ संभावित शहरी क्षेत्र ओल्ड अंडरपास में जिला स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य संभावित बाढ़ अथवा जलभराव जैसी आपात परिस्थितियों में विभिन्न विभागों एवं राहत एजेंसियों की तत्परता, समन्वय क्षमता तथा बचाव कार्यों की तैयारियों का आकलन करना था, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। मॉक ड्रिल का शुभारंभ सुबह ठीक 09 बजे साइरन बजने के साथ किया गया। इसके बाद सेक्टर-12 स्थित खेल परिसर से विभिन्न रेस्क्यू एवं राहत टीमें अपने-अपने निर्धारित स्थलों के लिए रवाना हुईं। इस दौरान एसडीआरएफ, एम्बुलेंस सेवा, फायर ब्रिगेड, सिविल डिफेंस, रेडक्रॉस, नेवी एनसीसी बॉयज एवं गर्ल्स कैडेट सहित अन्य संबंधित विभागों एवं एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
मॉक अभ्यास के दौरान राहत एवं बचाव दलों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने तथा आवश्यक संसाधनों की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने का अभ्यास किया। अभ्यास के दौरान यह दर्शाया गया कि किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार विभिन्न विभाग आपसी समन्वय स्थापित करते हुए सीमित समय में राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकते हैं। रेस्क्यू टीमों ने नावों, रस्सियों तथा अन्य आधुनिक उपकरणों की सहायता से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घायलों को प्राथमिक उपचार देने तथा उन्हें एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने की कार्यवाही का अभ्यास किया। फायर ब्रिगेड और सिविल डिफेंस की टीमों ने भी आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं का प्रदर्शन करते हुए अपनी तत्परता दिखाई।जिला स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल में विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के कई अधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मॉक अभ्यास में 100 पुलिस कर्मी, गुरुग्राम के भौंडसी स्थित एसडीआरएफ यूनिट के 40 जवान, 25 होम गार्ड, 10 सिविल डिफेंस कर्मी, 10 आपदा मित्र, 30 रेडक्रॉस स्वयंसेवक, 10 स्वास्थ्य कर्मी तथा 50 एनसीसी कैडेट्स (लड़के एवं लड़कियां) शामिल रहे। इसके अतिरिक्त 2 फायर ब्रिगेड वाहन,3 एम्बुलेंस, डीएचबीवीएन के 5 अधिकारी/कर्मचारी, डीएफएससी विभाग के 5 प्रतिनिधि, हरियाणा रोडवेज की 4 बसे, सिंचाई विभाग के 5 अधिकारी, एमसीएफ के 10 कर्मचारी, डीआईपीआरओ विभाग के 6 सदस्य तथा एनआईसी टीम के 10 सदस्यों ने भी मॉक ड्रिल में भाग लेते हुए आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों की तैयारियों का प्रदर्शन किया। डीसी आयुष सिन्हा ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक वर्ष इस प्रकार की मॉक ड्रिल एवं आपदा प्रबंधन अभ्यास आयोजित किए जाते हैं, ताकि किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए सभी विभागों की तैयारियों का समय-समय पर आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा राहत एवं बचाव कार्यों में आने वाली कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर करना है।डीसी आयुष सिन्हा ने कहा कि आपदा प्रबंधन में “रिस्पॉन्स टाइम” अर्थात प्रतिक्रिया समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी आपात स्थिति में जितनी तेजी से राहत एवं बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचकर कार्य शुरू करते हैं, उतना ही जनहानि और नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज आयोजित जिला स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल के दौरान सभी विभागों ने आपसी समन्वय, तत्परता और अनुशासन के साथ कार्य किया, जो संतोषजनक रहा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन भविष्य में भी इस प्रकार के अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करता रहेगा,ताकि आपदा की वास्तविक परिस्थितियों में सभी एजेंसियां अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।जिला स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल के जरिए मानसून सीजन के दौरान आमजन को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा के समय जलभराव वाले क्षेत्रों, विशेषकर अंडरपास, पुराने पुलों तथा निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे स्थानों पर अचानक जलस्तर बढ़ने से दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा विभिन्न विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिले में आपदा प्रबंधन से संबंधित सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह सक्रिय हैं और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। एडीसी अंजलि श्रोत्रिया ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समय-समय पर इस प्रकार के अभ्यास अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ अथवा जलभराव जैसी परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय ही जनजीवन को सुरक्षित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन से संबंधित संसाधनों, उपकरणों तथा मानवबल को हमेशा तैयार अवस्था में रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। फरीदाबाद एसडीएम डॉ. हनी बंसल ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा आपदा प्रबंधन को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी भी सुनिश्चित की जा रही है।
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