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जेपी ग्रीन सोसाइटी में लगाया गया करोना वैक्सीनेशन कैंप विवादों के घेरे में, जांच कमेटी ने कैंप को अवैध बताया, एफ़आईआर दर्ज  

अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट 
गौतम बुद्ध नगर में जिला प्रशासन की जानकारी और अनुमति के बिना 21 और 27 मई को जे पी ग्रीन सोसाइटी में जो वैक्सीनेशन का कैंप लगाया गया था। उसे सीएमओ, एसडीएम और एसीपी की जांच में अवैध पाया गया है। और इसकी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है।  प्रशासन की तरफ से महामारी अधिनियम के तहत थाना बीटा-2 में आयोजकों खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। और इस मामले की जांच की कार्रवाई जिला स्तर पर और शासन से की जा रही है और इस मामले अधिकरियों पर भी गाँज गिर सकती है।

जेपी ग्रीन सोसाइटी मैं लगे करोना वैक्सीनेशन कैंप विवादों के घेरे में आ गया है, यहां पर एक निजी अस्पताल की तरफ से जिला प्रशासन की जानकारी और अनुमति के बिना कैंप लगाया गया था जिसमें अलीगढ़ से आई वैक्सिंग को 187 लोगों को लगाया गया था। मामले ने तब तूल  पकड़ा जब लोगों को वैक्सीनेशन के प्रमाण पत्र मिले इस प्रमाण पत्र में नौरंगाबाद अलीगढ़ अंकित था। जब यह बात स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आई उसकी जांच के लिए एक टीम गठित की गई जिस ने मौके पर जाकर जांच की तो पाया कि वह चीन टीकाकरण शिविर लगाया गया था यह पूरी तरह अवैध था। एडी सीपी ग्रेटर नोएडा विशाल पांडे ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से महामारी अधिनियम के तहत थाना बीटा-2 में आयोजकों खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।  सीएमओ डॉ दीपक ओहरी ने बताया कि 187 लोगो को लगी वैक्सीन असली थी या उसमें पानी भरा था इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। क्योंकि जो वॉयल टीका लगाने के बाद तीन दिनों तक बचा कर रखनी जरूरी होती है, उन्हें नष्ट कर दिया गया था। टीम को शिविर के बाद इस्तेमाल की गई कोवाक्सीन की वॉयल तक नहीं मिली। इससे यह पता नहीं चला कि वैक्सीन में क्या था। एडीसीपी ग्रेटर नोएडा ने बताया कि जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि जेपी के सोसाइटी में टीके लगे थे। उनका बैच नंबर अलीगढ़ का ही था। अलीगढ़ के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौरंगाबाद को वैक्सीन आवंटित की गई थी, लेकिन इस वैक्सीन को ग्रेटर नोएडा की जेपी ग्रींस सोसाइटी में शिविर लगाकर स्थानीय निवासियों को लगा दिया गया। अलीगढ़ के सेंटर का प्रमाण पत्र जेपी ग्रीन सोसाइटी वालों को मिला है। डॉ दीपक ओहरी ने बताया कि टीकाकरण कराने वालों ने बताया कि उन्होने आधार नंबर दिया गया था और टीका लगा दिया गया था।  इसके बाद जब को कोविन पोर्टल से प्रमाण पत्र जारी डाउनलोड किया गया था। उसमें अली गढ़ का पता दिया गया था।  सीएमओ का कहना है कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। जिलाधिकारी सुहास एलवाई, ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई गई है, जो मुझे अधिकारियों ने सूचना दी है। उसके मुताबिक प्रथमदृष्टया मामला गंभीर है। जांच रिपोर्ट के अध्ययन के बाद आगे की कार्रवाई होगी। लेकिन महामारी अधिनियम के तहत बीटा-2 थाने में एक एफ आई आर दर्ज करा दी गई है।

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