अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन (डीडीसी) ने दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएसआईआईडीसी) लिमिटेड और ईपीआईसी फाउंडेशन के सहयोग से शनिवार को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगपतियों के साथ चर्चा का आयोजन किया। जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों के लिए दिल्ली को पसंदीदा स्थान बनाने का रोडमैप तैयार करना था। केजरीवाल सरकार ने फैसला किया है कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बुनियादी ढांचे, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और निर्माण के लिए एक अनुकूल नीति तैयार की जाएगी। जिसके जरिए दिल्ली को इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए पसंदीदा स्थान के रूप में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्णय का उद्योगपतियों ने उत्साह के साथ स्वागत किया।

केजरीवाल सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के ‘रोजगार बजट’ में आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक शहर की स्थापना की घोषणा की। इस संबंध में दिल्ली सरकार ने बापरोला (उत्तर-पश्चिम दिल्ली) में करीब 80 एकड़ जमीन आवंटित की है। अर्बन एक्सटेंशन रोडवे-II के पूरा होने के बाद दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक सिटी की दूरी एनएच-44, एनएच-18, एनएच-9 आदि से 20 मिनट की होगी। प्रमुख उद्योग जगत के लोगों और विशेषज्ञों की ओर से चर्चा के दौरान दी गई सलाह दिल्ली की इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण नीति (ईएसडीएम नीति) को विशिष्ठ बनाने में मदद करेगी।

इस बैठक में डीडीसी के उपाध्यक्ष जस्मिन शाह, डीएसआईआईडीसी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजीव मित्तल, डीएसआईआईडीसी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अमन गुप्ता, ईपीआईसी फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष अजय चौधरी को अलावा सैमसंग, डेकी, सहस्रा इलेक्ट्रॉनिक्स, डीलिंक, साइबर मीडिया, ऑप्टिमस, यंत्र (फ्लिपकार्ट), 3 एस टच सर्विस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एसजी कॉरपोरेट मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड, एल्कोमा, एल्किना सहित विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों को चर्चा में यह सुनिश्चित करने के लिए आमंत्रित किया कि आगामी नीति सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए हितकारी रहे। इस परामर्श बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीडीसी उपाध्यक्ष जस्मिन शाह ने कहा कि सीएम अरविंद केजरीवाल का विजन है कि दिल्ली को देश के आर्थिक विकास इंजन के रूप में स्थापित किया जाए। दिल्ली में एक बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर रोजगार पैदा किए जाएं। दिल्ली का राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स खपत में 7.5 फीसदी हिस्सा है। दिल्ली में उत्कृष्ट परिवहन, लोजिस्टिक्स और वितरण नेटवर्क हैं। इसके अलावा दुकान के कर्मचारियों से लेकर इंजीनियरों तक, प्रशिक्षित मानव संसाधन हैं। केजरीवाल सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को आवश्यक बुनियादी ढांचा और नीतिगत सहायता प्रदान करने की योजना है, ताकि व्यवसाय फले-फूले और बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हों। केजरीवाल सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन से निर्माण की श्रृंखला विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिस तरह से पिछले 7 वर्षों में सार्वजनिक शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा सहित अन्य क्षेत्रों में काम हुआ है, उसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के क्षेत्र में कार्य होगा।चूंकि इलेक्ट्रॉनिक्स एक तेजी से बदलने वाला उद्योग है जो बाजार की लगातार बदलती मांगों को पूरा करता है। केजरीवाल सरकार को उम्मीद है कि प्लग एंड प्ले बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने से औद्योगिक इकाईयां तेजी से कार्य शुरू करेंगी। इसके जरिए सभी बुनियादी सुविधाएं जैसे रेडी-बिल्ड शेड, बिजली और पानी के कनेक्शन, सामान्य सुविधाएं आदि प्रदान की जाएंगी।ईपीआईसी फाउंडेशन के संस्थापक व अध्यक्ष और एचसीएल टेक के सह-संस्थापक अजय चौधरी ने कहा कि केजरीवाल सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व ने हर कदम पर आर्थिक नीति-निर्माण में औद्योगिक स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के विकास में बाधा डालने वाले विभिन्न कारणों को दूर करने के लिए ऐसी राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। अन्य राज्य सरकारें उद्योगों के लिए रियायती भूमि की पेशकश करती हैं। वही दिल्ली मॉडल उद्योगों के लिए सुविधाएं प्रदान करता है। बिजनेस को आगे बढ़ने के लिए सुविधाएं प्रदान करने का केजरीवाल सरकार का दिल्ली मॉडल, व्यवसायों को जल्द राजस्व उत्पन्न करने में बहुत मदद करता है।
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