अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि प्रदेश का आगामी बजट केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह हरियाणा के 2.80 करोड़ नागरिकों की आशाओं, आवश्यकताओं और सुझावों पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री वीरवार को गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय , हिसार के सभागार में आयोजित पंचायत एवं नगर निकाय जनप्रतिनिधियों के बजट-पूर्व परामर्श कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरकार जनभागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसी सोच के तहत आगामी दस दिनों तक पंचायत प्रतिनिधि, नगर निकाय सदस्य एवं आम नागरिक विभिन्न माध्यमों, विशेषकर चैट-बॉट के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं, जिन्हें आगामी बजट में सम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों की प्रधानमंत्री के देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में महत्वपूर्ण जिम्मेवारी है। हरियाणा सरकार द्वारा इस बारे में विजन डॉक्यूमेंट लांच किया गया है जिसे धरातल पर उतारने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गांव लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव होते हैं और सरपंच गांव की पहली आवाज होते हैं। गांवों के संतुलित विकास में सरपंचों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश का समग्र विकास तभी संभव है, जब गांव और शहर दोनों समान गति से आगे बढ़ें। सरकार इस संतुलित विकास के लक्ष्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बजट 2025-26 में पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास के लिए 7,616 करोड़ 52 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से अब तक 2,808 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है। इस बजट के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में फिरनियों का निर्माण, महिला चौपालों की स्थापना, ई-लाइब्रेरी, इंडोर जिम, अमृत सरोवर, ठोस कचरा प्रबंधन सहित अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं।उन्होंने बताया कि पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए समय पर अनुदान, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता और ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। ग्राम पंचायतों द्वारा करवाए जाने वाले विकास कार्यों की सीमा बढ़ाकर 21 लाख रुपये कर दी गई है। इसके साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी-बी वर्ग को 5 प्रतिशत आरक्षण भी प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा एक साल में ग्राम सभाए आयोजित करने को अनिवार्य किया गया है। सरपंच इन ग्राम सभाओं में गावों के चालीस प्रतिशत लोगो को शामिल करके विकास कार्यो पर चर्चा करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 13 जिलों में ऐसी ग्राम सभाए आयोजित की जा चुकी है। यह निर्णय सरपंचों और गांव के हित के लिए लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर किसी भी राज्य के विकास के इंजन होते हैं। तेजी से बढ़ता शहरीकरण, बदलती जीवनशैली और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाएं शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती हैं।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि बजट 2025-26 में स्थानीय निकायों के लिए 5,666 करोड़ 28 लाख रुपये का प्रावधान किया गया ।उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए संपत्ति कर, विकास कर और कचरा शुल्क जैसी व्यवस्थाएं न्यूनतम और व्यावहारिक दरों पर लागू की गई हैं। जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष कोष स्थापित किया गया है। सीवरेज, सड़क सफाई और अन्य नगर सेवाओं के लिए आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराई गई है।मुख्यमंत्री ने बैठक में सरपंचों, पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए व्यावहारिक एवं जमीनी सुझावों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इन सुझावों को आगामी बजट 2026-27 में शामिल किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अगले 8-10 दिनों में अपने और सुझाव चैट-बॉट के माध्यम से अवश्य भेजें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वे विधानसभा में बजट 2026-27 प्रस्तुत करेंगे, तब जिन हितधारकों के सुझाव बजट में शामिल होंगे, उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे स्वयं इस बात के साक्षी बन सकें कि सरकार ने अपने वादों को धरातल पर उतारा है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचायतों और शहरी स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता, सकारात्मक सोच और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गांव और शहरों के विकास में किसी भी स्तर पर बजट की कमी नहीं आने दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी जी राम जी एक्ट श्रमिकों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पहले इस के तहत 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी बनाते हुए 125 दिन की मजदूरी की कानूनी गारंटी दी गई है, जिससे लाभार्थियों को अधिक रोजगार और स्थायित्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार मजदूरी भुगतान को लेकर भी पूरी तरह गंभीर है। इससे श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित हुए हैं और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। इस के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। इस योजना में आधार लिंक का कार्य भी तेज गति से हुआ है।
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