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फरीदाबाद

फरीदाबाद : भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन ने की समापन समारोह की अध्यक्षता

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट

फरीदाबाद : भारत के संविधान की निडर यात्रा का जश्न मनाने के लिये, मानव रचना यूनिवर्सिटी (एमआरयू) मे कानून विभाग ने 20 से 24 नवंबर, 2017 के बीच फरीदाबाद के अपने परिसर में ‘कानून सप्ताह’ मनाया। प्रख्यात प्रोफेसरों और कानून विशेषज्ञों ने पांच दिवसीय समारोह के दौरान कानून के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।24 नवंबर को ‘कानून सप्ताह’ का समापन मुख्य अतिथि और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस के.जी. बालकृष्णन के हाथों आधिकारिक न्यूज़लेटर के विमोचन के साथ हुआ। इस अवसर पर फरीदाबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री दीपक गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पराग त्रिपाठी, एमआरआईयू के कुलपति डॉ. एन.सी. वधवा, एमआरईआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. वी.के. माहना, एमआरयू की पीवीसी डॉ.मीनाक्षी खुराना, डॉ. जोस वर्गीज़, एमआरयू के सेवामुक्त प्रोफेसर व अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।भारत की संवैधानिक यात्रा, भारत में नवाचार और बौद्धिक संपदा, यूआईडी और गोपनीयता, महिला एवं कानून, कानून और धर्म, वकालत की कला, आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली, और कॉर्पोरेट प्रैक्टिस सहित कई पेचीदा विषयों पर विचार-विमर्श कानून के छात्रों के साथ चर्चा की गई। उल्लेखनीय वक्ताओं में हरियाणा के एडिश्नल एडवोकेट जनरल श्री अनिल ग्रोवर, भारतीय कानून संस्थान से प्रो. ऊषा रामनाथन और डॉ. ज्योति सूद, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो. बी.टी. कौल एवं डॉ. अलका चावला शामिल रहे।

समारोह पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता और एक कानून प्रश्नोत्तरी से परिपूर्ण था।

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन ने मौलिक अधिकार, संविधानगत विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि कानून के इन युवा छात्रों के हाथों में देश का भविष्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उभरते हुए वकीलों को खुद को गुमराह होने से बचाने के लिए साहस, दृढ विश्वास और तथ्यों का गहन ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने छात्रों को तथ्यों के ज्ञान मे महारत हासिल कर साहस और सच के सही पथ को तलाशने के लिये प्रेरित किया।

उन्होंने आगे कहा कि मानवाधिकार भारत में एक प्रासंगिक मुद्दा है। इसलिए, मानव रचना विश्वविद्यालय सरीखे संस्थानों को सम्मान और समानता की प्राप्ति के लिए मानवाधिकार के ज्ञान का प्रसार करना चाहिए।

अपने संबोधन में डॉ. मीनाक्षी खुराना ने कहा कि विधि संकाय में  हम अपने छात्रों को कानून और नीति के अत्याधुनिक मुद्दों से अवगत करवाते हैं, जिसमें महिलाओं के अधिकार से लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक शामिल होता है। हमारा ध्यान एक उत्साहजनक और खुले अकादमिक वातावरण में अभिनव शिक्षण पर रहा है, जहां छात्रों को विशेषज्ञ संकाय के तत्वावधान में तैयार किया गया है। ऐसे समागमों सरीखे कार्य हमारे स्नातक के छात्रों के काम के अनुभव को मजबूत करते हैं और उनमें वो कौशल भरते हैं, जिनकी आवश्यकता उन्हे भारत और विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के लिये होती है।

 मानव रचना विश्वविद्यालय के विधि संकाय के बारे में:

मानव रचना विश्वविद्यालय में विधि संकाय, कानून की एक तीक्ष्ण और व्यावहारिक समझ के साथ छात्रों की कानूनी अवधारणाओं को एकीकृत करके उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके पाठ्यक्रम भारत के सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में कानून के अध्ययन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण पर केंद्रित होते हैं (भारत की बार परिषद द्वारा अनुमोदित)। इसमें निम्नलिखित पाठ्यक्रम शामिल हैं:

  • बी.ए. एल.एल.बी– संवैधानिक कानून एवं अपराध एवं आपराधिकी
  • बी.बी.ए एल.एल.बी– व्यापार कानून एवं बौद्धिक संपदा अधिकार
  • बी.कॉम एल.एल.बी– वित्त एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित कानून

 

संकाय में एक नवनिर्मित वातानुकूलित भवन शामिल है, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम, वाव-विवाद के लिए कोर्ट रूम, लड़कों और लड़कियों के लिये कॉमन रूम, सभागार,कानूनी सहायता केंद्र, कानून पुस्तकालय, एक डिजिटल लाइब्रेरी और एक भाषा प्रयोगशाला भी है।

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