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डीजीपी अजय सिंघल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक.

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़:हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने आज पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में पुलिस थानों एवं चौकियों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की वर्किंग कंडीशन, आरजेएसएफ यूनिटों द्वारा सक्रिय अपराधियों के डेटा का सत्यापन, फेस रिकग्निशन सिस्टम के प्रभावी उपयोग, रात्रि नाकाबंदी, बिना नंबर प्लेट तथा बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के चलने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई और आपातकालीन रिस्पॉन्स व्हीकल (ईआरवी) के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रदेशभर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षकों सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।

बैठक में पुलिस थानों एवं पुलिस चौकियों में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान ईआरएसएस के पुलिस अधीक्षक हरीश जैन ने पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी 24 जिलों में 389 पुलिस थाने और 327 पुलिस चौकियां हैं। इनमें हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा सीसीटीवी परियोजना के अंतर्गत कुल 6,644 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं।

पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने निर्देश दिए कि सभी पुलिस थानों एवं चौकियों में स्थापित सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह वर्किंग कंडीशन में होने चाहिए और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप निर्धारित स्थानों पर उन्हें इनस्टॉल करना सुनिश्चित करे। डीजीपी ने निर्देश दिए कि कैमरों की लोकेशन, कार्य शीलता, तकनीकी खराबियों और नेटवर्क संबंधी समस्याओं की समीक्षा के लिए एक कमेटी गठित की जाए, ताकि कमियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर किया जा सके। उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षकों को भी अपने-अपने जिलों में नियमित बैठकें आयोजित कर सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की समीक्षा करने तथा उनकी प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में आरजेएसएफ यूनिटों द्वारा सक्रिय अपराधियों का रिकॉर्ड तैयार करने और उसे नियमित रूप से अपडेट करने की प्रगति की समीक्षा की गई। पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था राकेश आर्य ने बताया कि 29 अक्टूबर, 2026 तक प्रदेश में कुल 47,124 सक्रिय अपराधियों का फिजिकल वेरिफिकेशन पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 29,416 अपराधियों की तस्वीरें फेस रिकग्निशन सिस्टम में अपलोड की जा चुकी हैं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 11 जिलों में सक्रिय अपराधियों के डेटा का शत-प्रतिशत  फिजिकल वेरिफिकेशन पूरा कर लिया गया है। डीजीपी श्री अजय सिंघल ने कहा कि फेस रिकग्निशन सिस्टम अपराधियों की पहचान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रणाली पर अपलोड किया गया डेटा भविष्य में भी उपलब्ध रहेगा और अपराधियों की पहचान करने तथा उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में सहायक होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों ने सक्रिय अपराधियों का शत-प्रतिशत डेटा अपलोड कर दिया है, वे अब घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स-पीओ), बेल जंपर्स तथा मोस्ट वांटेड अपराधियों का डेटा भी फेस रिकग्निशन सिस्टम पर अपलोड करना सुनिश्चित करें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आगामी आगामी दो सप्ताह में यह कार्य पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि अपराधियों की पहचान और निगरानी की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। बैठक में प्रदेशभर में रात्रि के समय लगाए जाने वाले नाकों की समीक्षा भी की गई। डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि रात्रि नाकाबंदी के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अपराधियों की आवाजाही पर नजर रखने और अपराध नियंत्रण के उद्देश्य से प्रदेश में अंतरराज्यीय तथा अंतरजिला नियमित नाकाबंदी की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रात्रि नाकाबंदी का सुपरविजन वरिष्ठ अधिकारी स्वयं करें। नाकों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ वहां स्थापित सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता और उनकी नियमित मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 40 संवेदनशील स्थानों एवं बॉर्डर एरिया में नियमित रूप से नाके लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 250 स्थायी नाकों के साथ 288 अतिरिक्त नाका पॉइंट चिह्नित किए गए हैं, जिनकी सूची संबंधित जिलों के साथ शेयर की गई है। डीजीपी ने पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में इन नाका पॉइंट्स की समीक्षा करें। यदि किसी नाके की लोकेशन में बदलाव की आवश्यकता हो, तो उसे अपडेट करवाया जाए। उन्होंने कहा कि नाकों पर तैनात पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए। ड्यूटी में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने नाकाबंदी को केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए इसे प्रभावी बनाने पर जोर दिया।बैठक में बिना नंबर प्लेट और बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के सड़कों पर चलने वाले वाहनों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि बिना नंबर प्लेट या निर्धारित एचएसआरपी के चलने वाले वाहन कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं। ऐसे वाहनों की पहचान करना कठिन होता है, जिससे अपराधों की जांच और अपराधियों को पकड़ने में भी परेशानी आती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को अपने वाहनों पर नियमानुसार एचएसआरपी लगवाने के लिए प्रेरित किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ऐसे वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए 1 जून, 2026 से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत 28 अक्टूबर, 2026 तक कुल 31,22,168 वाहनों की जांच की गई। इस दौरान बिना नंबर प्लेट पाए जाने पर 1,14,566 वाहनों के चालान किए गए, जबकि बिना एचएसआरपी वाले 1,57,926 वाहनों के चालान किए गए। इसी अवधि में कुल 22,269 वाहन जब्त भी किए गए। इस प्रकार, बिना नंबर प्लेट तथा बिना एचएसआरपी के चलने वाले वाहनों के विरुद्ध कुल 2,72,492 चालान किए गए। हरियाणा पुलिस द्वारा ऐसे वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।बैठक में हरियाणा पुलिस की इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। डीजीपी ने जिलों में तैनात इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल (ईआरवी) की परफॉर्मेंस और रिस्पांस टाइम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया नागरिकों की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर उनके विश्वास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए ईआरवी पर तैनात पुलिसकर्मियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर रिस्पांस टाइम कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में ईआरवी की कार्यप्रणाली की लगातार समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि आपातकालीन कॉल प्राप्त होने पर पुलिस सहायता कम से कम समय में मौके पर पहुंचे।डीजीपी  अजय सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीसीटीवी निगरानी, फेस रिकग्निशन सिस्टम, सक्रिय अपराधियों के डेटा का सत्यापन, प्रभावी रात्रि नाकाबंदी, यातायात नियमों का पालन और आपात कालीन पुलिस सेवाओं की तत्परता को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी इन व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करें, तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करें और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें। अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी जिलों में बेहतर समन्वय, सतत निगरानी और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाना चाहिए।पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था राकेश आर्य, पंचकूला के पुलिस आयुक्त पंकज नैन, डीआईजी कानून एवं व्यवस्था अभिषेक जोरवाल सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे  ।

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