अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा सोमवार को भारी हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच तीन बार स्थगित हुई, जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए 31 अगस्त, 2020 को पूर्वी लद्दाख में चीन की घुस पैठ और उससे जुड़े घटनाक्रम पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा के हवाले से सरकार को बुरी तरह घेरा। दरअसल, राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को लेकर हाल ही में एक पत्रिका में छपे लेख का जिक्र कर रहे थे। इस लेख में नरवणे की किताब के हवाले से बताया गया है कि 31 अगस्त, 2020 की रात चीनी सेना के टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से कुछ सौ मीटर की दूरी तक पहुंच चुके थे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जनरल मनोज नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को तुरंत फोन कर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश मांगे थे, लेकिन उन्हें कोई निर्देश नहीं दिए गए।

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब का यह अंश पढ़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें सत्ता पक्ष द्वारा बार-बार रोका गया। राहुल गांधी के इस मुद्दे को उठाते ही केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू समेत सत्ता पक्ष के लोग बार-बार राहुल के भाषण को रोकने की कोशिश करने लगे। राहुल गांधी ने कहा कि जनरल नरवणे की किताब का यह अंश पढ़ने से पता चल जाएगा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं।लगातार व्यवधानों के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नरवणे की किताब को प्रकाशित नहीं करने दिया गया है। उन्होंने कहा कि आखिर जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब में ऐसा क्या लिखा है, जिससे मोदी सरकार के लोग इतना घबरा रहे हैं कि इसे सदन के पटल पर पढ़ने ही नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार देश की जनता से एक ऐसी सच्चाई छुपाने की कोशिश कर रही है, जिसे देश का हर सैनिक पहले से जानता है।राहुल गांधी ने बताया कि इस किताब में उस समय की घटनाओं का जिक्र है, जब चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वह यह मुद्दा उठाने वाले नहीं थे, लेकिन एक भाजपा सांसद द्वारा कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल खड़े किए गए, इसलिए वे राष्ट्रीय सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान दिलाना चाहते हैं।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण तक सीमित रहने को कहा तो राहुल गांधी ने पलट वार करते हुए जवाब दिया कि वे पूरी तरह उसी विषय पर बोल रहे हैं, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का प्रमुख विषय था।सदन स्थगित होने के बाद कार्रवाई दोबारा शुरू होने पर इस मुद्दे पर फिर से बोलते हुए उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि उनकी बातों में ऐसा क्या था कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही सदन से चले गए।बाद में संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। वह संसद में बस इतना बताना चाहते थे कि जनरल नरवणे ने क्या लिखा है और राजनाथ सिंह व नरेंद्र मोदी ने उन्हें क्या आदेश दिए थे, लेकिन मोदी सरकार न जाने क्यों डरी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि देश के नेता को दिशा देनी चाहिए और फैसले दूसरों के कंधों पर नहीं छोड़ने चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री ने ऐसा ही किया । उन्होंने कहा कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में यही बात लिखी है। उन्होंने कहा कि पूरी मोदी सरकार इस बात से डरी हुई है कि अगर नरवणे की किताब में लिखी सच्चाई सामने आ गई, तो नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की असलियत देश को पता चल जाएगी कि जब चीन हमारी सीमा की तरफ आ रहा था, तो इन्होंने सेना को कैसे निराश किया था। उन्होंने आगे कहा कि इसी पर्दाफाश के डर से उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा।इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि आरएसएस-भाजपा की वैचारिक आधारशिला तथ्यों को छिपाने पर टिकी है। इसी वजह से मोदी सरकार संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवालों से बच रही है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा का बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है। खरगे ने सवाल किया कि क्या संसद में पहले राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर देश को विश्वास में नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” की बात करने वाले लोग लोकतंत्र की आत्मा को क्यों रौंद रहे हैं।
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