अजीत सिन्हा/ नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ सुधांशुत्रिवेदी ने आज गुरुवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित किया और राहुल गांधी के झूठे आरोपों वाली प्रेस वार्ता पर काराहमला करते हुए कहा कि राहुल गांधी का राजनीतिक रूप से ‘ज्ञान शून्य’ हैं और उनके दावे निराधार हैं। असली ‘एंटी-इनकंबेंसी’ कांग्रेस और गांधी परिवार के ही खिलाफ है, जो आज चुनाव जीतने के लिए दूसरों के मोहताज हैं। चुनाव आयोग के नियमों काविरोध कर कांग्रेस दरअसल बांग्लादेशी घुसपैठियों का बचाव कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के निरंतर विकास का जिक्रकरते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जैसे ‘हल्के किरदार’ के कारण ही सियासत में कांग्रेस की यह दुर्गति हो रहीहै।

डॉ त्रिवेदी ने कहा कि भारत की राजनीति के ‘प्रपंच शिरोमणि’ और हाइड्रोजन बम का उद्घोष करके हाइड्रोजन गैस लानेवाले ‘महान रसायन वैज्ञानिक’ राहुल गांधी ने एक बार फिर एक पीपीटी का प्रदर्शन किया। राहुल गांधी कीपीपीटी आमतौर पर ऐसे अज्ञात और संदिग्ध स्रोतों से आती है, जिन्हें कोई नहीं जानता। राहुल गांधी की बुद्धिमत्ता और क्षमता को कैसेस्वीकार किया जा सकता है जब वे कहते हैं कि 7 साल में ही उनमें वोट चोरी की बातसमझ में आ गई थी। पांच-छह वर्ष की आयु में राजनीति को समझने की ऐसी अद्भुत प्रतिभासिर्फ पक्की दाढ़ी वाले नौजवान में ही हो सकती है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने ‘एंटी इनकंबेंसी’ को देश का स्थापित सत्य बताया है और वह भी बीजेपी के आने के बाद। राजनीतिकदृष्टि से विवेक शून्य और ज्ञान शून्य राहुल गांधी को यह नहीं पता है कि यह सत्यहै कि एंटी इनकंबेंसी निश्चित रूप से कांग्रेस के खिलाफ बहुत सुसंगत और मजबूत रहीहै। राहुल गांधी को भारत की राजनीति का ज्ञान ही नहीं है। 1967 के बाद से तमिलनाडु में कांग्रेस कभी नहीं लौटी है, तब कहीं भारतीय जनता पार्टी का नाम भी नहीं था। बंगालमें 1977 के बाद से कांग्रेस नहीं लौटी और 1977 से 2011 तक 34 साल कम्युनिस्टों की सरकार रही, जो राहुल गांधी को समझ में नहीं आता है। 1990 के बाद से बिहार में कांग्रेस कभी नहीं रही, जबकि तीन बार लगातार लालू यादव की सरकार रही है।उत्तर प्रदेश जैसे गांधी परिवार के गृह राज्य में 1989-90 के बाद से उनकी सरकार नहीं रही, उड़ीसा में 1999 के बाद से सरकार नहीं रही जहां 25 साल लगातार बीजू जनता दल की सरकार रही, ममता बनर्जी की तीन बार सरकार रही और त्रिपुरा मेंलगातार कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार रही, लेकिन राहुलगांधी को इन सबका कोई ज्ञान नहीं है और वे एंटी इनकंबेंसी की बात करते हैं। डॉ त्रिवेदी ने कहा कि जिस जमाने में कांग्रेस की लंबे समय तक सरकार रही, तब वोटर आईडी कार्ड नहीं होते थे, बूथ कैप्चरिंग होती थी, बैलेट बॉक्स लूटे जाते थे और गोलियां चलती थीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश औरबिहार का जिक्र करते हुए कहा कि तब कोई चुनाव ऐसा नहीं जाता था जब लोग मारे याघायल न होते हों; उस दौर में एंटी इनकंबेंसी कांग्रेस के लिए काम नहींकरती थी। जब से पारदर्शी चुनाव होने लगे हैं, स्थानीय पुलिस की जगह केंद्रीय अर्धसैनिक बल आने लगे हैं, सीसीटीवी और उनकी लाइव फुटेज आ गई है तथा स्वतंत्रमीडिया व न्यायपालिका हो गई है, तब से कांग्रेस को सत्ता में आने के लाले पड़ गए हैं।सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आने के बाद कांग्रेस को एंटी इनकंबेंसी का सबसेज्यादा सामना करना पड़ा है। दिसंबर 1997 में सोनिया गांधी के राजनीति में आने के बाद कांग्रेस मध्य प्रदेश में 1998 में एक बार रिपीट हुई थी, उसके बाद किसी राज्य में रिपीट नहीं हुई। केरल में हरबार सरकार रिपीट होती थी, लेकिन पिछली बार कम्युनिस्टपार्टी के बजाय कांग्रेस को आना था, जो नहीं आई क्योंकि वहां राहुल गांधी के चरण पड़ गए थे। एंटी इनकंबेंसीवास्तविकता में कांग्रेस पार्टी और इस गांधी परिवार के खिलाफ है, जो 100 साल से पार्टी की सत्ता में हैं और आज यह इतनी मजबूत हो गई है कि वे बिनासहयोगी दलों की बैसाखी के अपनी सीट नहीं जीत सकते। पिछले 25 साल से रायबरेली और अमेठी में कांग्रेस सपा के समर्थनसे जीतती रही है, और राहुल व प्रियंका गांधीमुस्लिम लीग के समर्थन से वायनाड जीते हैं जहाँ 60-65% मुस्लिम हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी में बिना सहयोगियों के अपनीखानदानी सीट निकालने की क्षमता नहीं है। भाजपा सांसद ने कहा कि क्या उस न्यूज़ रिपोर्ट में चुनाव आयोग का कोईआधिकारिक बयान या कोट है? जब कोई बयान या सर्वसम्मतिसे निर्णय न होने का कोई सबूत नहीं है, और न ही ऐसी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें तीनों कमिश्नर्स मौजूद न रहेहों, तो कांग्रेस किस आधार पर यहमुद्दा उठा रही है। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1950 के सेक्शन 213 के अनुसार चुनाव आयोग कभी भीअपनी व्यवस्था के अनुसार वोटर लिस्ट का रिवीजन करवा सकता है। कांग्रेस के इस दावेको कि फॉर्म 6 में माता-पिता का नाम नहींजोड़ा गया, उन्होंने ने मूर्खतापूर्णबताया। भारत का पहला इलेक्टोरल रोल 1952 में बना था, इसलिए 1974 तक माता-पिता के संदर्भ की आवश्यकता ही नहीं थी। 1987 और 2003 के संशोधनों का जिक्र करते हुए डॉ त्रिवेदी ने कहा कि घुसपैठियों की समस्याके कारण यह अनिवार्य किया गया कि माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो औरकोई भी अवैध अप्रवासी (इललीगल इमिग्रेंट) न हो। यदि आज कोई 18 साल का युवा बिना किसी पारिवारिक रिकॉर्ड यादस्तावेजों के वोटर बनना चाहता है, तो क्या उसे बिना वेरिफिकेशन के वोटर बनने दिया जाना चाहिए? डॉ त्रिवेदी ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बांग्लादेश के अखबार ‘डेली स्टार’ में “मोदी हैज़ टू गो” का लेख लिखा था। उन्होंने इसे असम की धुबरी सीट (जिसेमिनी बांग्ला देश कहा गया) से कांग्रेस को मिली 10 लाख से अधिक वोटों की ऐतिहासिक जीत से जोड़ा, जो राहुल गांधी की जीत से तीन गुना बड़ी थी। राहुलगांधी की यात्राओं में धुबरी, मालदा, मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों मेंही सबसे ज्यादा भीड़ दिखी, जहां संदिग्ध वोटरों का सबसेज्यादा अंदेशा है। डॉ.त्रिवेदी ने उन घुसपैठियों के वायरल वीडियो का भी जिक्रकिया जो बॉर्डर पर खड़े होकर स्वीकार कर रहे थे कि उन्होंने भारत में चार-चार बारवोट डाला है और अब वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं। जो लोग वोटर लिस्ट के रिवीजनका विरोध कर रहे हैं,वे देश के साथ देशद्रोह कररहे हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की शक्तियों का जिक्रकरते हुए विपक्षी दलों को चुनौती दी कि वे बताएं कि कितने राज्यों में राज्य चुनावआयुक्तों के चयन में नेता प्रतिपक्ष या मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। राहुलगांधी ने वर्तमान चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर असहमति जताई थी,और आज उन्हीं की बातों को अपने पक्ष में कोट कर रहेहैं। डॉ.त्रिवेदी ने पूर्व कैबिनेट सचिव टीएन शेषन का वह वीडियो दिखाया जिसमेंतत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय चुनाव की तारीखें सरकार द्वारा तय करनेका दबाव बनाया जाता था। डॉ त्रिवेदी ने कहा की भाजपा का पिछले 70 सालों में निरंतर उदय हुआ है, जबकि कांग्रेस का पतन। भाजपा निरंतर मेहनत से आगे बढ़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘जमीन से जुड़े नेता’ हैं और राहुल गांधी ‘जमीन से उड़े हुए’ नेता हैं जो बार-बार विदेशजाकर आधारहीन तथ्य लेकर आते हैं। राहुल गांधी के बयान ,’ऐसा समय कभी नहीं आया’, पर डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस के दौर में विकास दर मात्र 2% थी, जबकि आज 7.8% है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, तीसरा बड़ा ऑटोमोबाइल निर्माता और डिजिटल ट्रांजैक्शन में नंबर वन देश है, जिसकी कांग्रेस ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। भाजपा सांसद ने रामचरितमानस की चौपाई का उदाहरण देते हुए कहा, “होई है वही जो राम रचि राखा तो करि तर्क बढ़ावे साखा।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शायद कांग्रेस कोयह अच्छा न लगे, इसलिए उनके लिए कहा कि “मुद्दाई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है वही होता है जो मंजूर है खुदा होताहै।” कांग्रेस के 140 साल के इतिहास में वाकई ऐसा समय कभी नहीं आया है जबपार्टी का नेतृत्व एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो जो कभी बैठकर कॉमेडी करता हो, कभी घूम-घूम कर पीपीटी दिखाता हो,विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के बारे में स्टैंड-अपकॉमेडियन का साथ लेता हो और भारत की संसद में प्रधानमंत्री के गले पड़नेके बाद अपनी कुर्सी पर बैठकर अंखियों से गोली मारता हो। राहुल गांधी को कांग्रेसके अंदर की दुर्गति देखनी चाहिए। “चंद बातें करना और मुतमई होना नहीं अच्छा। सियासतआखिरी दम तक सभी को आजमाती है। है बहुत गलती की गुंजाइश नहीं होती सियासत में जराकिरदार हल्का हो कहानी टूट जाती है।” इस समय इतना हल्का किरदार दिखाया जा रहा है जितनाभारत की राजनीति में कभी नहीं दिखा।
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