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कांग्रेस, पीएम नरेंद्र मोदी का वीडियो मीडिया को दिखाया, जिसमें वे चीन को क्लीन चिट वाला वक्तव्य दे रहे हैं-लाइव वीडियो सुने

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मनीष तिवारी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहले विनीत जी एक वीडियो दिखाएंगे आपको और उसके बाद एक छोटा सा सुओ मोटो है, उसके बाद फिर जो आपके सवाल हैं उनके जवाब देने की मैं चेष्‍टा करूंगा। (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो दिखाया गया, जिसमें वे चीन को क्लीन चिट वाला वक्तव्य दे रहे हैं।) 15-16 जून, 2020 की रात को भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करते हुए हमारे 20 जवान गलवान घाटी में शहीद हो गए। एक बार फिर से हम उनको नमन करते हैं और उनकी जो शहादत थी, जो वो वीरगति को प्राप्‍त हो गए, उनको सच्‍ची श्रृद्धांजलि अर्पित करते हैं।

ये जो बयान आपने प्रधान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी का अभी देखा, ये आज से ठीक 3 वर्ष पहले 19 जून, 2020 को यही समय था,कोविड का कहर पूरे विश्‍व पर छाया हुआ था और एक सर्वदलीय बैठक में प्रधान मंत्री ने ये वक्‍तव्‍य दिया कि “न वहां कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई पोस्‍ट दूसरे के कब्‍जे में है।“ ये जो बयान था प्रधान मंत्री का ये सीधे-सीधे तौर पर विदेश मंत्री जयशंकर का 17 जून, 2020 का जो बयान था, उसके विपरीत था। विदेश मंत्री जयशंकर ने और उससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने साफ तौर पर ये बात कही थी कि गलवान में जो वारदात हुई, वो इस कारण से हुई थी, क्‍योंकि चीनियों ने घुसपैठ करके भारत की सीमा में एक टेंट लगाने की कोशिश की थी और ये बयान विदेश मंत्री ने चीन के जो विदेश मंत्री थे या हैं, ‘वांग यी’ उनसे बात करने के बाद ये बयान दिया था।हम ये सारा घटनाक्रम इसलिए दोहरा रहे हैं, क्‍योंकि अगर कोई घुसपैठ हुई ही नहीं थी, अगर चीन की सेना भारत की सरजमीन में घुसी ही नहीं थी तो फिर ये बात बहुत आश्‍चर्यजनक है कि 5 सितंबर, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मॉस्‍को में शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गनाइजेशन के साइड लाइन्‍स के ऊपर ढाई घंटे की मुलाकात, जो चीन के रक्षा मंत्री थे, उस समय उनके साथ में ये ढाई घंटे की मुलाकात मॉस्‍को में क्‍यों की? उसके ठीक 6 दिन बाद 11 सितंबर, 2020 को मॉस्‍को में रूस-भारत-चीन के ट्रायलेटरल के साईड लाइन्‍स के ऊपर विदेश मंत्री श्री जयशंकर ने फिर डेढ़ घंटे की मुलाकात चीन के जो विदेश मंत्री थे उनके साथ जो लाईन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल पर जो परिस्थिति थी, उसके बारे में बातचीत करने के लिए वो मुलाकात की, इन 3 वर्ष में 18 बार भारत और चीन की सेना के जो कमान्‍डर्स हैं, लेफ्टीनेंट जनरल स्‍तर के ऊपर 18 बार बॉर्डर टॉक्‍स हुई हैं। अभी 1 जून, 2023 को जो 27वीं बैठक थी Working mechanism for consultation and coordination on India-China border affairs. ये 1 जून, 2023 को उसकी 27वीं बैठक हुई। तो अगर कोई घुसपैठ हुई ही नहीं थी, अगर ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी तो ये जो पिछले 3 वर्ष से निरंतर और लगातार अलग-अलग स्‍तर के ऊपर, मिलिट्री के स्‍तर के ऊपर, विदेश मंत्रालय के स्‍तर के ऊपर, मंत्रियों के स्‍तर के ऊपर ये जो वार्तालाप चीन के साथ चल रहा है तो उसकी सच्‍चाई क्‍या है? और ऐसा नहीं कि ये चीन की घुसपैठ को लेकर चिंता सिर्फ विपक्ष ने जताई थी।सितंबर 2019 में मुझे याद है कि भाजपा के जो अरुणाचल प्रदेश के सांसद हैं श्री तापिर गाओ, एक समय हमारे एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के साथी हुआ करते थे… उन्‍होंने 4 सितंबर, 2019 को ये बात कही कि चीन ने एक पुल चगलागाम गांव में, अंजॉ जिले में भारत की सीमा के 60-70 किलोमीटर अंदर बनाया है और अगर मुझे ठीक तरह से याद आ रहा है उन्‍होंने संसद में भी इस बात को दोहराया था कि वहां से जो मैकमोहन लाईन है वो 100 किलोमीटर की दूरी पर है, उसके बाद जब गलवान की त्रासदी हुई, 17 जून, 2020 को तापिर गाओ ने फिर ये कहा कि 2017 में चीन ने ऊपरी सियांग जिले में, अरुणाचल प्रदेश में, भारत की सीमा के अंदर एक सड़क बनाई थी, इस बात को 2020 में इसी मंच से, उस समय प्रेस कॉन्‍फ्रेंसस़ वर्चुअल हुआ करती थीं… जब कांग्रेस पार्टी ने उठाया तो एक ऑनलाईन मैग्‍जीन को इंटरव्‍यू में तापिर गाओ ने ये बात कही कि जो मैंने चीन की घुसपैठ को लेकर चीजें सार्वजनिक की थीं, मैं 100 प्रतिशत उसके ऊपर खड़ा हूं और उन्‍होंने आगे ये कहा कि PLA had intruded into Asaphila Upper Subansiri district, Aindrila Valley, North of Anini in Dibang Valley. और चगलागाम जिसकी बात उन्‍होंने पहले कही थी।
3 वर्ष बीत गए, जो एलएसी के ऊपर तनाव है, नियंत्रण रेखा के ऊपर वो उसी तरह से बरकरार है और समय आ गया है सरकार से कुछ सीधे-सीधे प्रश्‍न पूछने का। हमारा पहला प्रश्‍न ये है कि क्‍या ये बात सही है जो लेह-लद्दाख की एसएसपी ने और मैंने इस बात का जिक्र इस मंच से पहले भी किया था कि जो डीजीपी और आईजीपीज़ की कॉन्‍फ्रेंस होती है, उसको एक पेपर सब्मिट किया था उन्‍होंने, जिसमें ये कहा था कि जो 65 पेट्रोलिंग प्‍वाइंटस हैं एलएसी के ऊपर, नियंत्रण रेखा के ऊपर, 26 ऐसे पेट्रोलिंग प्‍वाइंटस हैं जहां पर भारत की सेना जा नहीं पा रही है India has lost access to 26 of those 65 patrolling points, सरकार की तरफ से इसके ऊपर पिछले 6 महीने से एक भी प्रतिक्रिया नहीं आई है। हम एनडीए भाजपा सरकार से, प्रधान मंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी से ये पूछना चाहते हैं कि क्‍या ये बात सही है जो लिखित रूप में लेह-लद्दाख की एसएसपी ने कही है कि 26 ऐसे पेट्रोलिंग प्‍वाइंटस हैं एलएसी के ऊपर जहां भारत की फौज नहीं जा पाती है मई 2020 के बाद?
दूसरा सवाल हम उनसे ये पूछना चाहते हैं कि क्‍या ये बात सही है कि जहां-जहां पर डिसेन्‍गेजमेंट हुआ है, खासकर गोगरा और हॉट स्प्रिंग्‍स में जो बफर जोन्‍स बने हैं, वो बफर जोन्‍स जो हमारी पर्सेप्‍शन है लाईन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल की, उसके भीतर बने हैं?
तीसरा सवाल जो हम उनसे पूछना चाहते हैं कि क्‍या ये बात सही है जो एक पूर्वी-भारत के अखबार में छपी थी और जिसका खंडन नहीं किया गया है कि जो वो मिलिट्री टू मिलिट्री टॉक्‍स हो रही हैं, उसमें चीन की तरफ से ये मांग रखी गई है कि डेपसांग प्‍लेन्‍स में 20 से 25 किलोमीटर का बफर जोन, जो भारत की पर्सेप्‍शन है एलएसी की, उसके भीतर बनना चाहिए।
हमारा अगला सवाल ये है कि भूटान में एक जगह है अमूचीन, जो जमफेरी रिज को, जो सिलीगुड़ी के चिकन नेक को देखता है उसको एक अल्‍टरनेटिव रूट प्रोवाइड करता है, उसके ऊपर जो चीनी बिल्‍ड अप हो रहा है, क्‍या वो भारत सरकार के संज्ञान में है? पिछले 3 वर्ष से निरंतर और लगातार खबरें आती रही हैं कि Unprecedented infrastructure चीन लाईन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल के ऊपर बना रहा है, भारत उसको रोकने के लिए क्‍या कदम उठा रहा है? सरकार को इसके ऊपर साफतौर से स्‍पष्‍टीकरण देना चाहिए।
हम सरकार से आगे ये पूछना चाहते हैं कि मई 2020 से लेकर आज जून 2023 हो गया, क्‍यों भारत की संसद में या रक्षा मंत्रालय की जो संसदीय स्‍थाई समिति है या रक्षा मंत्रालय की जो कंसल्‍टेटिव कमेटी है उसमें एक भी बार चीन पर चर्चा क्‍यों नहीं हुई है? ऐसा क्‍या कारण है कि जितने सवाल चीन को लेकर या एलएसी को लेकर या एलएसी के ऊपर जो परिस्थिति है उसको लेकर पूछे जाते हैं, उनको पार्लियामेंट का सेक्रेटेरियट एडमिट क्‍यों नहीं करता है? 66 सवाल तो मेरे हैं, which have not been entertained on some fallacious grounds of national security. और बाकी भी बहुत सांसद हैं जिनके सवालों का यही हश्र हुआ है। अभी-अभी कुछ दिन पहले जो अमेरिका के राजदूत थे भारत में केनेथ जस्‍टर, उन्‍होंने एक चल चित्र पर इंटरव्‍यू में ये बात कही कि जो भारत और अमेरिका की ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट है या क्‍वाड की ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट है उसमें चीन के प्रति तीव्र प्रति क्रिया नहीं होती, तीव्र निंदा नहीं होती, क्‍योंकि भारत नहीं चाहता है, “India does not want to poke China”, if I remember the exact words correct. तो इस परिस्थिति में एक बहुत गंभीर सवाल पैदा होता है और ये हमारी मांग है, हम पहले भी एक जिम्‍मेदार विपक्ष के नाते इसको दोहरा चुके हैं कि क्‍या जो मानसून सत्र आ रहा है संसद का उसमें विस्‍तारपूर्वक चीन पर चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है कि नहीं? हमारी मांग है कि एलएसी के ऊपर जो परिस्थिति है उस पर एक व्‍यापक चर्चा भारत की संसद में होनी चाहिए। दूसरी हमारी मांग है कि एक श्‍वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए कि पिछले 3 वर्ष में जो एलएसी के ऊपर घटनाक्रम हुआ है उसकी सच्‍चाई क्‍या है? उसके ऊपर एक विस्‍तारपूर्वक एक व्‍हाइट पेपर जारी करने की जरूरत है। ये सवाल इसलिए खड़े होते हैं और इसीलिए उस वीडियो से हमने आज की प्रेस वार्ता की शुरुआत की थी कि जो प्रधान मंत्री ने चीन को 19 जून, 2020 को क्‍लीनचिट दी थी, उसके कारण क्‍या ऐसा तो नहीं हुआ है कि 2,000 स्‍क्‍वायर किलोमीटर से ज्‍यादा जो भारत की सरजमीन हैं, वो आज चीन के कब्‍जे में है और हम उसको वापस नहीं ले पा रहे हैं as the clean chit by the Prime Minister to China, actually undermined and subverted India’s national interest. ये हमारे सीधे-सीधे सवाल हैं और हमारी कुछ मांगे हैं और हम उम्‍मीद करते हैं कि सरकार की तरफ से एक जिम्‍मेदार प्रतिक्रिया इसके ऊपर आनी चाहिए।

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