अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की सेना के साथ जारी टकराव की पुष्टि होने के बाद मोदी सरकार पर देश की सीमाओं की सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया है। अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प की घटनाओं पर आईटीबीपी महानिदेशक की पुष्टि का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन के सामने सरेंडर करना जारी है। सरकार पहले इस स्थिति से जुड़ी खबरों को दबाने की कोशिश करती रही है और अब भी देश को वास्तविक स्थिति बताने से बच रही है, लेकिन सच सामने आ रहा है।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता में पार्टी के मीडिया एवं पब्लिसिटी के चेयरमैन पवन खेड़ा ने याद दिलाया कि 2020 में गलवान में भारत के 20 बहादुर जवान शहीद हुए, लेकिन तब प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि भारत की सीमा में कोई नहीं घुसा है। इसी क्लीन चिट की वजह से ही चीन लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक लगातार दुस्साहस दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका के सामने मोदी सरकार की नीतियां भारत के हितों के बजाय दबाव में लिए गए फैसलों जैसी दिखाई देती हैं।

राज्यसभा सांसद खेड़ा ने कहा कि भारत की सीमा में चीन लगातार घुसपैठ कर रहा है और मोदी सरकार चुप्पी साधकर नई यथास्थिति को स्वीकार कर रही है, जो भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता है। उन्होंने पुलिस महानिदेशकों की कॉन्फ्रेंस का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट पर अब भारत का नियंत्रण नहीं रहा है। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के बाद से चीन के साथ हुई मुलाकातों के दौरान घुसपैठ का मुद्दा क्यों नहीं उठाया? चीन के सामने मोदी की कायरता के पीछे क्या राज़ है?मोदी सरकार पर सीमा प्रबंधन के मामले में पूरी तरह सरेंडर करने का आरोप लगाते हुए खेड़ा ने कहा कि मोदी सरकार ने ‘पहले जैसी स्थिति’ शब्द का इस्तेमाल करना ही बंद कर दिया और अब वह इसे ‘नई यथास्थिति’ कहने लगी है। मोदी सरकार के प्रेस वक्तव्यों में आजकल ‘अर्ली हार्वेस्ट’ शब्द का बहुत प्रयोग होता है, इसका मतलब है कि बातचीत में चीन जो कहे, उसे एक बार में ही स्वीकार कर सीमा विवाद, पहले जैसी स्थिति और गश्त बिंदुओं से जुड़े मुद्दे भुला दिए जाएं। इसके परिणामस्वरूप सिलीगुड़ी कॉरिडोर, गलवान, डोकलाम से जुड़े विवाद अनसुलझे रह जाएंगे।कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार लगातार दबाव में चीन की शर्तें मान रही है। चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 99 अरब डॉलर से बढ़कर 112 अरब डॉलर हो गया है। उन्होंने चीनी नागरिकों के लिए वीजा नियमों में ढील, यात्रा संबंधी प्रतिबंधों में बदलाव और प्रेस नोट-3 में संशोधनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चीन द्वारा भारत को टनल बोरिंग मशीनों, रेयर अर्थ मिनरल्स और खाद के निर्यात पर रोक लगाए जाने का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 70 से 80 प्रतिशत दवाइयों के लिए चीन में बनने वाले एपीआई के भारत आने पर बीच-बीच में रोक लगा दी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि चीनी निवेश और पीएलआई से जुड़ी कंपनियों को भारत में ठेके दिए जा रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान की सक्रिय रूप से सहायता करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कभी चीन अरुणाचल प्रदेश के गांवों के नाम बदल देता है, कभी भारत के लिए लिए खतरा पैदा करने वाले बांध पर काम शुरू कर देता है, लेकिन मोदी चुप्पी साधकर सरेंडर करते जाते हैं। खेड़ा ने मोदी सरकार से सवाल किया कि क्या अरुणाचल प्रदेश में शेरा-5 प्वांट तक भारत पेट्रोलिंग कर पा रहा है या नहीं? क्या तकसिंग सेक्टर में चीन ने सात किलोमीटर अंदर आकर अपने टेंट गाड़ रखे हैं? क्या पूर्वी लद्दाख में साल 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल हुई है? अप्रैल 2020 से पहले जहां हम पेट्रोलिंग कर पाते थे, उन पॉइंट्स पर आज पेट्रोलिंग कर पा रहे हैं या नहीं? सीमा पर टकराव के बावजूद चीन पर भारत की आर्थिक निर्भरता क्यों बढ़ाई जा रही है? भारत सरकार ने चीनी निवेश और पीएलआई से जुड़ी कंपनियों के लिए रास्ते आसान क्यों बनाए?खेड़ा ने मोदी सरकार को चुनौती दी कि वह विपक्षी नेताओं को अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कराए, ताकि पेट्रोलिंग पॉइंट और सीमा की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
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