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कांग्रेस ने इंडिगो संकट के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पिछले 11 वर्षों में विमानन क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाने की बजाय एकाधिकार और डुओपॉली (सिर्फ दो कंपनियों का एकाधिकार) में समेट देने से देश में उड़ान संकट पैदा हुआ है। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने कहा कि मोदी सरकार ने ‘उड़ान’ योजना के माध्यम से हवाई यात्रा को आसान बनाने का वादा किया था, लेकिन असलियत में विमानन क्षेत्र को ठप कर दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से देश में हवाई यात्रा पर विराम लग गया है। मौजूदा संकट को भारतीय विमानन इतिहास का सबसे बुरा संकट बताते हुए उन्होंने कहा कि पांच दिसंबर को एक हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं और छह दिसंबर को भी 600 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। लोगों को घंटों एयरपोर्ट पर बिना भोजन-पानी के इंतजार करना पड़ रहा है। कई यात्री परीक्षाओं, जरूरी कार्यक्रमों और आपात स्थितियों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने इसे भाजपा सरकार की विफल नीतियों का परिणाम बताते हुए कहा कि यह सब रूस के राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान हुआ। शशिकांत सेंथिल ने कहा कि  जनवरी 2024 में फ़्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियम जारी कर दिए गए थे। डीजीसीए द्वारा जारी इन नियमों को लागू करने के लिए एयरलाइंस को पर्याप्त समय दिया गया था। उन्होंने कहा कि पायलटों की थकान कम करने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए ये नियम अधिसूचित किए गए थे। इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना था, जिसकी अंतिम तिथि 1 नवंबर 2025 थी। उन्होंने पूछा कि डीजीसीए ने पिछले दो वर्षों में इनकी अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए क्या किया? उन्होंने कहा कि इस संकट के बाद अब इन महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों को शर्मनाक तरीके से वापस लेना ग़ैर-ज़िम्मेदाराना और घोर आपत्तिजनक है। इन नियमों को हटाकर मोदी सरकार ने यात्री सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।कांग्रेस नेता ने इंडिगो एयरलाइन की एकाधिकार वाली स्थिति पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यह एयरलाइन बाजार के 60-65 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बार-बार चेतावनी देती रही कि मोदी सरकार की एकाधिकार समर्थक नीति विनाशकारी है। यह स्थिति सिर्फ एयरलाइंस तक सीमित नहीं है; बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां बार-बार एक ही पसंदीदा कॉर्पोरेट समूह को सौंपी जा रही हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हवाईअड्डों के प्रबंधन में भी अदानी समूह को लगभग एकाधिकार दे दिया गया है। सेंथिल ने मोदी सरकार को घेरते हुए आगे कहा कि आज प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और जनहित की बजाय राजनीतिक वफादारी व कॉर्पोरेट गठजोड़ को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि इंटरग्लोब (इंडिगो की मूल कंपनी) की संस्थाओं ने करोड़ों रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे थे, जबकि इंडिगो के प्रमोटर राहुल भाटिया ने 20 करोड़ रुपए के बॉन्ड अपनी व्यक्तिगत क्षमता में खरीदे थे, जिनमें से अधिकांश भाजपा ने भुना लिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा के साथ यह वित्तीय नजदीकी ही प्रतिस्पर्धा से भरे विमानन क्षेत्र को एक कमजोर डुओपॉली में बदलने का कारण बनी।कांग्रेस नेता ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए पूछा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने विमानन क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाने की बजाय इसे एकाधिकार और डुओपॉली तक क्यों सीमित कर दिया? डीजीसीए ने जनवरी 2024 में जारी एफडीटीएल नियमों की अनुपालना इंडिगो से क्यों नहीं कराई? क्या सरकार ने कभी इंडिगो को चेतावनी या अनुपालन नोटिस जारी किए? क्या भाजपा से वित्तीय नजदीकी के कारण ही यात्रियों की सुरक्षा की कीमत पर भी इंडिगो को असाधारण रियायतें दी गईं? और क्या उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू इस संकट की जिम्मेदारी लेंगे?

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