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फरीदाबाद शिक्षा

जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में ‘एनर्जी ट्रांज़िशन पाथवेज़’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजित।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद , फरीदाबाद के भौतिकी विभाग द्वारा सतत ऊर्जा समाधान एवं भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हेतु ‘एनर्जी ट्रांजिशन पाथवेज़’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में पूरे देश से लगभग 80 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह और सरस्वती वंदना के साथ हुई। कुलगुरु  प्रो. राजीव कुमार ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ऊर्जा स्थिरता प्राप्त करने में नवाचार एवं आपसी सहयोग की महत्ता पर बल दिया।

कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने ऊर्जा संक्रमण जैसे उभरते विषय पर सफलतापूर्वक सम्मेलन आयोजित करने के लिए भौतिकी विभाग की सराहना की। उन्होंने विभाग द्वारा क्वांटम टेक्नोलॉजी के अंतर्गत क्वांटम कंप्यूटिंग पर क्रेडिट कोर्स शुरू करने की पहल की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह एक अग्रणी पहल है तथा विश्वविद्यालय क्वांटम टेक्नोलॉजी के लिए समर्पित प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए उत्सुक है।इस अवसर पर सम्मेलन संयोजक डॉ. ओमपाल सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. अरुण कुमार द्वारा भारत की ऊर्जा संक्रमण यात्रा पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।सम्मेलन के दौरान एक पैनल चर्चा का आयोजन भी किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. सोनिया बंसल, अध्यक्षा, भौतिकी विभाग ने की। चर्चा में वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े विषयों जैसे ऊर्जा क्षेत्र पर युद्ध का प्रभाव: स्थिति एवं समाधान तथा भारत का वर्ष 2047 तक ऊर्जा संक्रमण पर विचार-विमर्श किया गया। अकादमिक जगत, उद्योग, पूर्व छात्रों एवं विद्यार्थियों से जुड़े विशेषज्ञों ने ऊर्जा क्षेत्र में प्रभावी समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया।एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी रिसर्च अलायंस से इंजी. अमित कुलश्रेष्ठ ने “बायोमास मार्ग से ऊर्जा संक्रमण पाथवेज़” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। दूसरे तकनीकी सत्र में इंजी. मनीष सोनकर एवं डॉ. अमितांशु पटनायक ने ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवीन शोध विकास पर व्याख्यान दिए।सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता उद्योग जगत, एनसीबी इंडिया, डीटीयू दिल्ली जैसे शिक्षण संस्थानों, पूर्व छात्रों एवं छात्र समुदाय के विशेषज्ञों की सहभागिता रही, जिन्होंने वैश्विक संघर्षों के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रभाव तथा भारत के वर्ष 2047 तक ऊर्जा संक्रमण रोडमैप पर चर्चा की।दोपहर बाद भौतिकी विभाग के विभिन्न कक्षों में समानांतर शोध-पत्र प्रस्तुति सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने अपने नवाचारपूर्ण शोध कार्य प्रस्तुत किए। ई-पोस्टर प्रस्तुति सत्र ने युवा शोधार्थियों को अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान किया। सम्मेलन का समापन भारत में ऊर्जा स्टार्टअप्स पर आधारित एक ऑडियो-विजुअल सत्र के साथ हुआ।इस अवसर पर प्रो. अजय रँगा, कुलसचिव; प्रो. अनुराधा शर्मा, अधिष्ठाता (विज्ञान), प्रो. मनीषा गर्ग, निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।

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