
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:हरियाणा पुलिस के के-9 डॉग सेंटर, कुरुक्षेत्र में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के 81 विद्यार्थियों ने शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने प्रशिक्षित पुलिस श्वानों का प्रदर्शन देखा और उनकी काम करने की क्षमता के बारे में जानकारी प्राप्त की। नार्को डॉग, ट्रैकर डॉग और विस्फोटक पहचान करने वाले श्वानों ने अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से अपनी दक्षता दिखाई। विद्यार्थियों को श्वानों के प्रशिक्षण, खानपान, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, व्यायाम और देखभाल के बारे में भी बताया गया।

यह भ्रमण पुलिस और पशु चिकित्सा शिक्षा के बीच तालमेल बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) इस K-9 डॉग सेंटर की नोडल एजेंसी है। भ्रमण के दौरान लुवास की प्रोफेसर डॉ. दिव्या और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौरव कुमार विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहे। हरियाणा पुलिस के डॉग एवं हॉर्स स्क्वाड के सलाहकार, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर श्री संदीप सिंह ने विद्यार्थियों को केंद्र की कार्यप्रणाली और पुलिस श्वानों की देखभाल से जुड़ी जानकारी दी।

विद्यार्थियों के लिए विशेष डॉग शो आयोजित किया गया, जिसमें छह प्रशिक्षित श्वानों ने भाग लिया। इनमें एचएसएनसीबी के चार नार्को डॉग, स्टेट क्राइम ब्रांच का एक ट्रैकर डॉग और सीआईडी विभाग का एक विस्फोटक पहचान करने वाला श्वान शामिल था। प्रदर्शन के दौरान श्वानों ने परिसर, वाहनों और सामान की तलाशी लेकर अपनी कार्यक्षमता दिखाई। विस्फोटक पहचान करने वाले श्वान ने रुमाल सर्च का प्रदर्शन किया। इसके अलावा, सभी श्वानों ने अपने प्रशिक्षकों के निर्देशों का पालन करते हुए बुनियादी अभ्यास भी किए। इस प्रदर्शन से विद्यार्थियों को समझने का अवसर मिला कि किस प्रकार विशेष प्रशिक्षण, अनुशासन और प्रशिक्षकों के साथ तालमेल के जरिए श्वानों को पुलिस और सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए तैयार किया जाता है। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर संदीप सिंह ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में तैनात श्वानों को स्वस्थ और सक्रिय रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, साफ-सफाई, ग्रूमिंग, पर्याप्त आराम और नियमित दिनचर्या जरूरी है। श्वानों के स्वास्थ्य और काम करने की क्षमता को बनाए रखने में पशु चिकित्सकों की देखरेख और सही प्रशिक्षण की भी अहम भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को श्वानों की देखभाल और रखरखाव के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्वानों की कार्यक्षमता केवल प्रशिक्षण पर ही नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, नियमित देखभाल और अच्छे खानपान पर भी निर्भर करती है।इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण से पशु चिकित्सा के विद्यार्थियों को किताबों में पढ़ी जानकारी को वास्तविक परिस्थितियों में समझने का मौका मिलता है। इससे वे पुलिस श्वानों की जरूरतों, उनके प्रशिक्षण और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि प्रशिक्षित श्वान पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। नशीले पदार्थों की पहचान करने, संदिग्ध स्थानों की तलाशी लेने और जांच के दौरान उनकी सूंघने की क्षमता पुलिस के काम को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि श्वानों से बेहतर काम लेने के लिए उनके प्रशिक्षण, खानपान, स्वास्थ्य और देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। नार्को डॉग नशीले पदार्थों का पता लगाने में मदद करते हैं, जबकि ट्रैकर डॉग और विस्फोटक पहचान करने वाले श्वान अपने निर्धारित कामों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि लुवास के विद्यार्थियों का के-9 डॉग सेंटर का भ्रमण पुलिस और पशु चिकित्सा शिक्षा के बीच तालमेल बढ़ाने का अच्छा अवसर है। ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को पुलिस श्वानों के काम करने के तरीके को करीब से समझने और उनके स्वास्थ्य व देखभाल के प्रति जागरूक होने का मौका मिलता है। एचएसएनसीबी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजय कुमार ने बताया कि एचएसएनसीबी के प्रशिक्षित नार्को डॉग संदिग्ध स्थानों, वाहनों और सामान की तलाशी के दौरान छिपाए गए नशीले पदार्थों का पता लगाने में पुलिस की मदद करते हैं। उनकी सूंघने की विशेष क्षमता तलाशी और जांच के काम को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होती है। वहीं, ट्रैकर डॉग और विस्फोटक पहचान करने वाले श्वान भी अपने निर्धारित कामों में सुरक्षा एजेंसियों की मदद करते हैं। हरियाणा पुलिस ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को पुलिस श्वानों की भूमिका, उनके प्रशिक्षण और देखभाल के बारे में जानकारी दे रही है। इससे विद्यार्थियों को पुलिस की कार्यप्रणाली को समझने और पशु चिकित्सा के अपने ज्ञान को व्यावहारिक रूप से जानने का अवसर मिलता है।
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