अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने आज कहा कि राज्य के सभी रजिस्ट्री कार्यालय पूरी सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं और किसी भी पेपरलेस रजिस्ट्री सेवा को निलंबित नहीं किया गया है। पूरे प्रदेश में 1 नवंबर, 2025 से शुरू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली सफलतापूर्वक कार्यरत है और संपत्ति पंजीकरण से जुड़ी नागरिक सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी हैं। रजिस्ट्री सेवाओं को बंद करने का दावा करने वाली खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, विपुल गोयल ने ऐसी रिपोर्टों का जोरदार खंडन किया। उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट भ्रामक हैं पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से नई पेपरलेस प्रणाली शुरू की गई है। नए प्रावधानों के तहत विभाग को आवेदकों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों के सत्यापन के लिए 5 कार्य दिवसों का समय निर्धारित किया गया है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रणाली के आरंभ से अब तक विभाग को कुल 2778 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 927 दस्तावेज सफलतापूर्वक पंजीकृत किए जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि प्रणाली सुचारू रूप से कार्य कर रही है और दस्तावेजों का समयबद्ध निपटान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 495 आवेदनों को रजिस्ट्री की तिथि आवंटित की जा चुकी है, जिनकी प्रक्रिया निर्धारित समयानुसार पूरी की जाएगी। इस दौरान, 327 आवेदन अधूरे या गलत दस्तावेजों के कारण अस्वीकृत किए गए। शेष आवेदन वर्तमान में विभिन्न कार्यालयों में सत्यापनाधीन हैं और पाँच दिनों की समय-सीमा के भीतर सत्यापन पूरा होते ही उनके पंजीकरण को शीघ्रता से अंतिम रूप दिया जाएगा। डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह आँकड़ा राज्यभर में नई डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया को लागू करने में पारदर्शिता, दक्षता और गति बनाए रखने के विभाग के सक्रिय प्रयासों को दर्शाता है। राज्यभर में पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली लागू करने से पहले विभाग ने तकनीकी या प्रक्रियात्मक समस्याओं की पहचान और समाधान के लिए एक पायलट चरण चलाया था। सफल परीक्षणों के बाद इसे पूरे हरियाणा में लागू किया गया। डॉ. मिश्रा ने स्वीकार किया कि किसी भी नई प्रणाली की तरह प्रारंभिक चुनौतियाँ संभव हैं, लेकिन विभाग ने जनता की शिकायतों और सुझावों के समाधान के लिए व्यापक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि विभाग ने जनता की प्रतिक्रियाओं तथा अधिकारियों और नागरिकों के सुझावों के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। कुछ गाँवों के भूमि डेटा में जहाँ डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ थीं, उन्हें ठीक कर दिया गया है। नगरपालिका सीमा के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में एनओसी आवश्यकताओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पूर्ववत प्रक्रिया ही लागू है। लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के डेटा को सुव्यवस्थित किया गया है, जो अब शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए उपलब्ध है, जबकि ग्रामीण कॉलोनियों की समीक्षा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के परामर्श से की जाएगी। वित्त आयुक्त ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड और एचएसवीपी से संबंधित मामलों में खेवट-खतौनी विवरण की आवश्यकता नहीं है इसके बजाय नगर निकायों द्वारा प्रदान की गई संपत्ति आईडी के माध्यम से पंजीकरण किए जा रहे हैं। लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में सही लाइसेंस संख्या दर्ज होने पर सिस्टम स्वतः संबंधित डेटा प्रदर्शित करता है। विभाग ने पुराने शहरी क्षेत्र के रिकॉर्ड से खेवट-खसरा कॉलम भी हटा दिया है, जिससे नागरिक अगले कार्य दिवस से अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के डेटा को शहरी स्थानीय निकायों के साथ जोड़ा गया है, जिससे समन्वय आसान हुआ है और अनुमोदन प्रक्रिया तेज़ हुई है। भूमि जोत एवं भूमि अभिलेख चकबंदी के निदेशक यशपाल ने बताया कि साझेदारी या सहयोग विलेखों के लिए वर्ण सीमा 500 से बढ़ाकर 10,000 वर्ण कर दी गई है, जिससे सभी नियम एवं शर्तें पूर्ण रूप से दर्ज की जा सकेंगी। उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए पोर्टल पर दस्तावेज़ अपलोड करने की सीमा 10 एमबी से बढ़ाकर 40 एमबी कर दी गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि 12 नवंबर से एक नया फीचर “आपत्ति के साथ वापस करें” (Revert with Objection) शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से आवेदक बिना अतिरिक्त शुल्क दिए, सही किए गए दस्तावेज़ दोबारा अपलोड कर सकेंगे, बशर्ते प्रारंभ में कोई गलत जानकारी दर्ज न की गई हो। नामों में मामूली विसंगतियों के कारण आवेदन अस्वीकृत नहीं किए जाएँगे। यशपाल ने बताया कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) का विकल्प अभी भी उपलब्ध है और इसे और अधिक सरल बनाया गया है, जिससे नागरिक सोमवार से अपॉइंटमेंट बुक कर सकेंगे। कृषक कॉलम के संबंध में यशपाल ने स्पष्ट किया कि इस फ़ील्ड के आधार पर स्वामित्व नहीं बदला जा सकता। हालाँकि, इस प्रकार किए गए पिछले पंजीकरणों की समीक्षा की जा रही है और नए नियम शीघ्र जारी किए जाएँगे। विभाग ने यह भी पुष्टि की कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थान संबंधी डेटा सटीक है, लेकिन नागरिक किसी भी विसंगति की सूचना सुधार के लिए हेल्पडेस्क के माध्यम से दे सकते हैं।
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