अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि पूरे विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी सरकार विपक्ष के सवालों से भागती नजर आई। सरकार द्वारा एक भी सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। कानून व्यवस्था से लेकर किसानों, सड़कों, अस्पतालों, महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जল भराव व फसल को भारी नुकसान, आयुष्मान योजना व स्वास्थ्य सेवाएं बदहाली, राइस शैलर की हो रही परेशानी व धान में बीमारी, फसल बीमा योजना, बी पी एल कार्ड में भारी कटौती, कर्मचारी सी पी एल ओ ऑफ क्रीड एम्प्लाइज अन्य विभाग कर्मचारियों की, स्कूल शिक्षा, कालेज ,यूनिवर्सिटी व अन्य शिक्षा संस्थान समेत तमाम मुद्दों पर कांग्रेस विधायकों ने सवाल पूछे। लेकिन सरकार के पास न तो किसी सवाल का जवाब था और ना ही किसी समस्या का समाधान। वर्तमान व बीजेपी के 11 साल की बात ना करके मुख्यमंत्री और मंत्री इधर उधर की बात कर सदन को गुमराह करते रहे ।
अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार बीजेपी के उस दावे की भी पोल खुल रही है, जिसमें वो 24 फसलों पर एमएसपी देने की बात करती है। मंडियों में किसान की धान के बाद मक्का और सूरजमुखी एमएसपी से बेहद कम रेट में पिटी। किसानों को 2400 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की बजाए मक्का का सिर्फ 1000 से 1400 रुपये ही रेट मिला। जब भी किसान एमएसपी मांगते हैं तो सरकार उन्हें पोर्टल के जाल में उलझाकर रख देती है। अब खाद के लिए भी ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया। यानी सरकार एमएसपी और खाद देने की जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुकी है। यही हाल मुआवजे का है। सरकार द्वारा ‘क्षतिपूर्ति पोर्टल” पर पंजीकरण तो करवा लिया जाता है। लेकिन मुआवजा नहीं दिया जाता। पीएम फसल बीमा योजना ने भी किसानों को कंगाल और बीमा कंपनियों को मालामाल बना दिया है। ये खुलासा संसद में पूछे गए सवाल के जवाब से हुआ। सरकार ने खुद बताया कि योजना के तहत मुआवजे की रकम में सीधे 90% की भारी गिरावट हुई है।
आगे भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में बीपीएल कार्ड बनाने को लेकर करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है। चुनाव नजदीक आते ही आनन-फानन में लाखों बीपीएल कार्ड बनाए गए। उन लोगों के भी कार्ड बना दिए गए, जो इसके लिए अपात्र थे। ऐसा करके बीजेपी ने चुनाव में लाखों लोगों की वोट ली और अब तीसरी बार सरकार बनते ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। अब रोज हजारों परिवारों के बीपीएल कार्ड काटे जा रहे हैं। उन लोगों के भी कार्ड काटे जा रहे हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं। करीब 11 लाख परिवारों के राशन कार्ड काटकर उन्हें सरकारी योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया है। इसलिए हुड्डा ने बीपीएल को काटने ओर जोड़ने को वोट चोरी की संज्ञा दी। वोटों में धांधली के मुद्दे पर हुड्डा ने कहा कि चुनाव आयोग अपनी साख गंवा चुका है और हरियाणा में उसने पूरी तरह बीजेपी के इशारे पर काम किया। यही वजह है कि वोटिंग के बाद, कुल मिलाकर 72 घंटे के भीतर, कुल वोट पोल में 7 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी दिखा दी गई। बीजेपी द्वारा विधानसभा में खिलाड़ियों की नियुक्ति को लेकर बोले गए झूठ को उजागर करते हुए हुड्डा ने बाकायदा आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान 700 से ज्यादा खिलाड़ियों को नियुक्तियां दी गई थीं। इनमें 18 डीएसपी, 21 इंस्पेक्टर, 35 सब-इंस्पेक्टर, 326 कांस्टेबल और अन्य विभागों के पद शामिल हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों को तमाम नौकरियों में 3 प्रतिशत खेल कोटा देकर, उनके लिए रोजगार के रास्ते खोले थे। जबकि बीजेपी ने इस नीति को ही खत्म कर दिया।कलेक्टर रेट में बढ़ोत्तरी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने एक बार फिर जमीनों के रेट आसमान पर पहुंचने वाला फैसला लिया है। इससे स्पष्ट हो गया है कि भाजपा पूरी तरह गरीब और मध्यम वर्ग विरोधी पार्टी है। इससे पहले भी बीजेपी ने हुडा के प्लॉट का आवंटन नीलामी के आधार पर करने का फैसला लिया था। इसके चलते सेक्टर के प्लॉट्स के रेट भी रातों-रात बढ़ गए थे और गरीब व मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर हो गए थे।भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कानून व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि बीजेपी ने कैसे सदन को गुमराह किया। मौजूदा हालात पर बात करने की बजाए, बीजेपी कांग्रेस कार्यकाल के आंकड़े गिनवाने लगी और उसमें भी जमकर झूठ परोसा गया। हुड्डा ने बताया कि 2005 में कांग्रेस सरकार बनने से पहले इनेलो-बीजेपी राज में हालात इतने खराब थे के संगीन मामलों में भी एफआईआर तक नहीं होती थी। लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में आते ही कानून व्यवस्था को दुरुस्त किया। पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी और उसके बाद कांग्रेस ने हरियाणा से अपराध को खत्म करने का मिशन शुरू किया, जो कामयाब रहा। कांग्रेस ने प्रदेश से तमाम गैंगस्टर, माफिया और बदमाशों का सफाया करके संगठित अपराध को पूरी तरह खत्म कर दिया था। हुड्डा ने कहा कि अपराध दो तरह के होते हैं, एक ऑर्गेनाइज़्ड (संगठित) और दूसरा अनऑर्गेनाइज़्ड (असंगठित)। कांग्रेस सरकार के दौरान अगर कोई अपराध होता था तो वो असंगठित था, जैसे कोई आपसी विवाद, परिवार का झगड़ा, कोई जमीन का झगड़ा आदि। ऐसे मामलों में काफी हद तक सरकार और पुलिस की भूमिका अपराध होने के बाद शुरू होती है। यानी जब भी कोई ऐसा अपराध होता था तो सरकार कार्रवाई करती थी। लेकिन बीजेपी सरकार में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ने सारी हदें पार कर दी हैं। प्रदेश में कई गैंग्स बन गई हैं, माफिया पैर पसार रहा है, लोगों को धमकियां दी जा रही हैं, फिरौती मांगी जा रही है, धमकियां देकर गोली मारी जा रही है, किसी के भी घर के ऊपर फायरिंग की जा रही है, सोशल मीडिया पर सरेआम धमकी देते हैं और अपराध करने के बाद अपराधी उसकी जिम्मेदारी ले रहे हैं। बदमाश इतने बेखौफ हैं कि अपराध करते हुए खुद की वीडियो डाल रहे हैं। तमाम व्यापारियों और यहां तक कि विधायकों नेताओं तक को बदमाशों की तरफ से धमकियां आ रही हैं। इसे ऑर्गेनाइज्ड क्राइम बोला जाता है। आज सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि सबसे ज्यादा संगठित अपराध हरियाणा में है। एसटीएफ ने बताया है कि हरियाणा में 80 से ज्यादा संगठित अपराधी गिरोह सक्रिय हैं, जो कॉन्ट्रेक्ट किलिंग, फिरौती, वसूली, अपहरण और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देते हैं। खुद केंद्र सरकार की एसपीआई रिपोर्ट ने भी प्रदेश की भाजपा सरकार को इसके बारे में चेतावनी दी है। बाकायदा सामाजिक प्रगति सूचकांक जारी करके केंद्र ने कहा है कि हरियाणा देश का सबसे असुरक्षित राज्य है।एनसीआरबी के सरकारी आंकड़े भी गवाही दे रही हैं कि हरियाणा महिलाओं के विरूद्ध अपराध के मामले में देश का नंबर वन राज्य बन गया है। रेप के मामले में भी हरियाणा तीसरे नंबर पर आकर खड़ा हो गया है। बदमाशों का इतना खौफ है कि हरियाणा से उद्योग पलायन कर रहे हैं और निवेशक यहां पैसा लगाने को तैयार नहीं है।
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