
विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ.अरविंद शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला केवल खरीदारी और मनोरंजन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कलाओं और पीढ़ियों से चली आ रही शिल्प परंपराओं को सम्मान देने का महत्वपूर्ण मंच है। यह आयोजन स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने, उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और नए बाजारों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार आगे बढ़ा रही है। प्रदेश सरकार ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, लोक संस्कृति के संवर्धन और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। सूरजकुंड जैसे आयोजन इसी सोच को धरातल पर उतारने के साथ हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाते हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड मेला परिसर हरियाणा की कला और शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। दिवाली मेले के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक लोगों को प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मेले में लगाए जाने वाले लगभग 300 स्टॉलों पर हस्तशिल्प, हथकरघा, पारंपरिक कलाकृतियों, घर की सजावट से संबंधित वस्तुओं और दिवाली के लिए उपयोगी उत्पादों की विविधता देखने को मिलेगी। पर्यटक एक ही स्थान पर विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक कलाओं और शिल्प उत्पादों को देखने तथा खरीदने का आनंद उठा सकेंगे। डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हस्तशिल्प हमारी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा होने के साथ लाखों लोगों की आजीविका से भी जुड़ा है। ऐसे आयोजनों से कारीगरों को अपनी कला के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलता है। इससे पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने, नई पीढ़ी को उससे जोड़ने और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलती है। सूरजकुंड दिवाली मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। प्रसिद्ध सूफी एवं लोक गायक कंवर ग्रेवाल की प्रस्तुति मेले की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाएगी। इसके अलावा लोक कलाकारों और पारंपरिक नृत्य दलों की प्रस्तुतियां भारतीय लोक संस्कृति के विविध रंगों को जीवंत करेंगी। डॉ. शर्मा ने कहा कि लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत की आत्मा हैं। इनके माध्यम से हमारी परंपराएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती हैं। सूरजकुंड दिवाली मेले में होने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पर्यटकों को मनोरंजन के साथ भारतीय लोक जीवन की विविधता को करीब से अनुभव करने का अवसर देंगी। मेले में खरीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खानपान की भी विशेष व्यवस्था की जाएगी। विशाल फूड कोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों के साथ प्रतिष्ठित खाद्य ब्रांडों के लोकप्रिय पकवान उपलब्ध होंगे। इससे परिवारों और पर्यटकों को एक ही परिसर में खरीदारी , संगीत, मनोरंजन और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। आयोजन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि बच्चे, युवा, बुजुर्ग और परिवार के सभी सदस्य दिवाली से पहले उत्सव के माहौल का भरपूर आनंद उठा सकें। विरासत एवं पर्यटन मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित रखने के बजाय उसे सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। सूरजकुंड दिवाली मेला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कारीगरों, कलाकारों, छोटे कारोबारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी गतिविधियों का विस्तार करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहित करते हैं। सरकार का प्रयास है कि हरियाणा की ऐतिहासिक धरोहरों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को देश-दुनिया के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। 23 अक्टूबर से शुरू होने वाला तीसरा सूरजकुंड दिवाली मेला 26 अक्टूबर तक चलेगा। समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की उपस्थिति रहेगी। चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में हस्तशिल्प प्रदर्शनी, लोक कला, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक व्यंजन पर्यटकों को दिवाली से पहले एक यादगार अनुभव प्रदान करेंगे। हरियाणा सरकार और पर्यटन विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा तथा पड़ोसी राज्यों के लोगों से सपरिवार सूरजकुंड पहुंच कर इस सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनने का आह्वान किया है। डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला देश की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाने, स्थानीय शिल्पकारों की प्रतिभा को सम्मान देने और त्योहार की खुशियों को साझा करने का अवसर है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में मेले में पहुंचने और भारतीय कला, संस्कृति तथा पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने की अपील की।
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted

