
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र स्थित दौला रजपुरा गांव में एक 4 साल का मासूम बच्चा खेलते-खेलते गंग नहर के तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। घटना के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे परिजनों का सब्र अब टूटता जा रहा है। परिवार ने प्रशासन पर रेस्क्यू में देरी करने का संगीन आरोप लगाया है।

यह चीख-पुकार उस बदनसीब पिता इसरार और मां गुलफसा की है, जिनका सबसे छोटा बेटा हमदान उनकी आंखों के सामने पानी की लहरों में ओझल हो गया। शुक्रवार की शाम, घर से महज 20 मीटर दूर बहती इस गंग नहर में एक नारियल तैरता दिखा। मासूम हमदान उसे पकड़ने की चाहत में पानी में उतरा, लेकिन उसे क्या पता था कि यह लहरें उसके लिए काल बन जाएंगी। एक ग्रामीण ने बचाने की कोशिश जरूर की, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि मासूम देखते ही देखते बह गया।

घटना के बाद से ही गांव में मातम पसरा है। शनिवार शाम तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें नहर को खंगालती रहीं, लेकिन कामयाबी कोसों दूर है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस को सूचना समय पर दी गई थी, लेकिन प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन अगले दिन सुबह 10 बजे शुरू हुआ— यानी पूरे 16 घंटे की देरी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन ने नहर का पानी कम नहीं कराया। स्थानीय निवासी उमेश भाटी का कहना है कि वे इस कार्रवाई से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि जब तक बच्चा नहीं मिल जाता, सर्च ऑपरेशन और तेज किया जाए।

दौला रजपुरा गांव के लोगों में संबंधित विभाग के खिलाफ भारी गुस्सा है। आबादी के बीच से गुजरने वाली इस नहर पर न तो कोई फेंसिंग है और न ही सुरक्षा दीवार। ग्रामीण पहले भी कई बार इसकी मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन की इसी अनदेखी ने आज एक और मां की गोद सूनी कर दी। फिलहाल पूरा गांव हमदान की सलामती की दुआ मांग रहा है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं।
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