
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: कांग्रेस ने शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली कूच कर रहे किसानों को बलपूर्वक रोके जाने को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसानों को बातचीत के लिए बुलाकर इसी संसद सत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का कानून पारित करने की मांग की। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पूरे उत्तर भारत के किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं। 700 किसानों की शहादत के बाद मोदी सरकार ने तीन काले कानून इस वादे के साथ वापस लिए थे कि एमएसपी की गारंटी का कानून लाया जाएगा, लेकिन दो साल बीत गए। आज एक बार फिर देश के किसान दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हैं।

किसान चाहते हैं कि वे शांतिपूर्वक दिल्ली आकर मोदी सरकार के सामने अपनी मांग रख सकें, उन्हें वादा याद दिलाएं। लेकिन अन्नदाता किसानों को बैरिकेड्स, कीलें, तारें लगाकर रोका जा रहा है। नरेंद्र मोदी के पास फिल्म देखने का वक्त है, पर किसानों से मिलने का समय नहीं है। कांग्रेस महासचिव ने कहा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से एमएसपी की गारंटी का कानून बनाने को लेकर सवाल पूछा गया तो वह उसे सरेआम टाल गए। वहीं उनसे किसानों को कर्ज से राहत मिलने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इससे भी इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, कांग्रेस की मांग है कि केंद्र सरकार बिना किसी देरी के किसानों के साथ सौहार्दपूर्ण ढंग से बातचीत करे और अपने पुराने वादे के मुताबिक फसलों की एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत सभी मांगों को स्वीकार करने की घोषणा संसद में करे।

इस दौरान सुरजेवाला ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के झूठों को भी आंकड़ों के साथ उजागर किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार और उसके कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार पर्याप्त फसलें एमएसपी पर खरीद रही है। लेकिन 2023-24 में रबी फसलों को समर्थन मूल्य पर खरीदने का सच यह है कि कुल उत्पादन के मुकाबले एमएसपी पर गेहूं की खरीद सिर्फ 23.20 प्रतिशत, चना की 0.37 प्रतिशत, मसूर की 14.08 प्रतिशत, सरसों की 9.19 प्रतिशत रही। वहीं जौ और कुसुम की एमएसपी पर कोई खरीद ही नहीं की गई।कांग्रेस महासचिव ने कहा, संसद में कृषि मंत्री कहते हैं कि किसानों को लागत प्लस 50 प्रतिशत के हिसाब से एमएसपी दिया जा रहा है, लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दिया था कि किसानों को लागत के ऊपर 50 प्रतिशत जोड़कर समर्थन मूल्य नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इससे बाजार खराब हो जाएगा। अर्थात स्वामीनाथन की सिफारिशों को मानने से इंकार कर दिया गया। सुरजेवाला ने कहा, वास्तविकता में किसान को फसल की लागत भी नहीं दी जा रही। यह खुद भाजपा शासित राज्यों ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी सीएसीपी को कहा है। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र ने गेहूं के लिए बताया कि उसके राज्य में लागत 3527 रुपये प्रति क्विंटल आती है तथा उसे गेहूं का समर्थन मूल्य 4461 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए। इसी प्रकार महाराष्ट्र चना उत्पादन में देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है; उसने कहा कि चने की लागत 5402 रूपये प्रति क्विंटल आती है और उसे समर्थन मूल्य 7119 रूपये प्रति क्विंटल दिया जाए। मगर मोदी सरकार ने महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड जैसे लगभग सभी राज्यों की मांग को खारिज कर दिया। कांग्रेस महासचिव ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का अगला झूठ गिनाते हुए कहा कि मोदी सरकार ने हाल ही में रबी सीजन 2025-26 के लिए फसलों के समर्थन मूल्य की घोषणा की। पिछले वर्ष की तुलना में यह वृद्धि सिर्फ 2.4 से सात प्रतिशत तक की है। सुरजेवाला ने आगे कहा कि महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश देश के दो सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक प्रदेश हैं। सोयाबीन का लागत मूल्य केंद्र सरकार ने 3,261 रूपये और समर्थन मूल्य 4,892 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया। आज सोयाबीन महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में 4,000 रूपये प्रति क्विंटल से भी कम में बिक रही है।
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