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टेक्नोलॉजी हरियाणा

पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में आधुनिक स्तर की प्रयोग शाला, इनोवेशन सेंटर स्थापित करें- दत्तात्रेय


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चण्डीगढ़:हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने पशु वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों,चिकित्सकों से कहा है कि वे नस्ल सुधार के लिए गए अनुसंधानों व शोध को पशुपालकों तक पहुंचाए ताकि वे इनका पशुपालन व्यवसाय में लाभ उठा सकें। इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी और पशुओं को गम्भीर बीमारियों से बचाया जा सकेगा। दत्तात्रेय सोमवार को राजभवन में लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विनोद कुमार वर्मा से बात कर रहे थे। वर्मा आज राज्यपाल से शिष्टाचार मुलाकात के लिए राजभवन पहुंचे थे

इस मुलाकात के दौरान राज्यपाल दत्तात्रेय ने कहा कि पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में आधुनिक स्तर की प्रयोगशाला, इनोवेशन सेंटर स्थापित करें ताकि विश्व स्तर की अनुसंधान प्रक्रिया का सतत विकास हो। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के मापदण्ड पूरी तरह लागू हो और छात्रों व फैकल्टी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे पशुधन विकास से संबंधित नए शोध व अनुसंधान की जानकारी रहे। दत्तात्रेय ने कहा कि पशुपालन व डेयरी व्यवसाय का देश की आर्थिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। इस व्यवसाय को और विस्तार रूप देने के उद्देश्यों में पशु वैज्ञानिकों व शिक्षण संस्थाओं की भूमिका अहम होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय आई.सी.ए.आर. के अंतर्गत आने वाले व अन्य विदेशी पशु शिक्षण संस्थाओं के साथ समझौते कर नए शोध व तकनीकों को एक-दूसरे से साझा करें।

उन्होंने कहा कि भ्रुण प्रत्यारोपण तकनीक पशुधन विकास में कारगर सिद्ध हुई है। इस तकनीक को हर पशुपालक तक ले जाना चाहिए ताकि पशुपालक अपने पशुओं में प्रयोग कर सके। इससे दूध उत्पादन में तो वृद्धि होगी ही तथा व्यवसाय भी फले फूलेगा। दत्तात्रेय ने कहा कि पशुधन को विभिन्न प्रकार की छूआछूत व मौसमी बीमारियों से बचाने की आवश्यकता है। किसी भी बीमारी की संभावनाओं को देखते हुए उसके निराकरण व रोकथाम के लिए वैक्सीन इजाद करने पर प्राथमिकता से कार्य किया जाना चाहिए। कुलपति प्रो विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में आई.सी.ए.आर. के नियमों के तहत टेक्नोलॉजी, इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके साथ आधुनिक स्तर की लैब स्थापित की जाएगी। छात्रों की प्रौद्योगिकी व प्रायोगिक शिक्षाओं के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि लम्पी स्किन बीमारी से बचाव के लिए विश्व विद्यालय द्वारा गौशालाओं में गायों को टीकाकरण का कार्य किया गया। इससे पशुधन को हानि से बचाया जा सका है। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों में होलिस्टिक डेवलपमेंट के लिए हैदराबाद की एन.जी.ओ. हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट हैदराबाद के साथ एम.ओ.यू. किया गया है और एन.जी.ओ. द्वारा विश्वविद्यालय में छात्रों की कक्षाएं शुरू कर दी है। इससे छात्रों के सर्वांगीण विकास के साथ व्यक्तित्व का विकास भी होगा।

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