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गुडगाँव

200 बोरवैलों में नगर निगम ने 35 वार्डो में 126 बोरवैल व ट्यूबवैल, ग्रामीण क्षेत्र में 76 से ज्यादा बोरवैल सील किए गए हैं :डीसी

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
गुरूग्राम:गुरुग्राम जिला प्रशासन ने जिला में अवैध बोरवेलों को सील करने तथा रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चरों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आज बड़ी कार्यवाही करते हुए जिला एन्फोर्समेंट ड्राईव चलाई जिसके अंतर्गत उपायुक्त श्री अमित खत्री ने ताऊ देवी लाल स्टेडियम से आज प्रातः 57 टीमों को रवाना किया। बरसाती पानी के संचयन तथा अवैध बोरवैल पर करारा प्रहार करने के लिए यह एक बड़े पैमाने पर एक ही दिन मे की गई बड़ी कार्रवाई थी, हालांकि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा क्योंकि जलशक्ति अभियान के तहत गुरुजल परियोजना जिला में चलाई जा रही है। उपायुक्त अमित खत्री के अनुसार आज इन टीमों द्वारा 200 से अधिक बोरवैल तथा ट्यूबवैल सील किए गए। इसके अलावा, ड्राईव के दौरान 6 घंटों में 49 जगहों पर 5 ठप्प तथा 14 आंशिक रूप से संचालित डेªन वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पाए गए। विस्तृत रिपोर्ट टीमों से बाद में प्राप्त होगी। आज सील किए गए 200 बोरवैलों में नगर निगम द्वारा 35 वार्डो में 126 बोरवैल अथवा ट्यूबवैल, ग्रामीण क्षेत्र में 76 से ज्यादा बोरवैल सील किए गए हैं जिसमें फरूखनगर ब्लाॅक में 13, सोहना ब्लाॅक में 28, पटौदी ब्लाॅक मंे 23 तथा गुरूग्राम ब्लाॅक में 13 ट्यूबवैल अथवा बोरवैल शामिल हैं।

आज चलाई गई ड्राईव में शामिल इन टीमों में 100 पुलिस कर्मी रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चरों के संचालन की जांच करने के लिए दस आईटीआई प्रशिक्षित पलंबर प्रशिक्षु लगाए गए थे। इनके अलावा, 50 से अधिक एनसीसी और एनएसएस के विद्यार्थियों ने वाॅलेंटियर के रूप में एन्फोर्समेंट ड्राईव में काम किया जो लगभग सप्ताह भर के बाद फिर से उन स्थानों पर जाकर चैक करेंगे कि पानी की लीकेज बंद करने के बाद पुनः तो शुरू नहीं हो गई है। प्रत्येक टीम के साथ दो पुलिस कर्मी थे ताकि अवैध बोरवैल सील करने में कोई कठिनाई ना हो। टीमों द्वारा चैक किया गया कि जो रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर लगे हुए हैं वे सही ढंग से काम कर रहे हैं कि नहीं। इन टीमों ने सार्वजनिक क्षेत्रों में लगी पानी की पाईप लाईन में रिसाव की रिपोर्ट भी दी और उसे ठीक भी करवाया है। टीमों को रवाना करने से पहले उपायुक्त अमित खत्री ने कहा कि आमतौर पर हम सख्त कार्रवाई की बात करते हैं और कहते हैं कि कोई भी अवैध बोरवेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा लेकिन जब कार्रवाई करने की बात आती है, तो हम दृढता से काम नहीं करते जोकि गलत है। उन्होंने कहा कि अब उन दोषियों पर कड़ा प्रहार करने का समय है जो अवैध रूप से बोरवेल के माध्यम से पानी निकाल कर बेच रहे हैं। उन्होंने टीमों को निर्देश दिया कि वे वास्तविक अर्थों में सख्त कार्रवाई करें और सार्वजनिक स्थानों पर पाइप लाइनों में रिसाव के बारे में रिपोर्ट करें। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन के लिए पानी की बर्बादी को रोकने के अलावा, रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का सही संचालन, अवैध बोरवैलो पर शिकंजा कसना तथा लीकेज आदि के द्वारा व्यर्थ पानी बहने से रोकना जरूरी है।



श्री खत्री ने कहा कि एनसीसी और एनएसएस कैडेटों ने एन्फोर्समेंट अभियान के लिए स्वेच्छा से काम किया है। उनकी भूमिका एन्फोर्समेंट अभियान के लिए एक तीसरी राय के रूप में कार्य करना और क्षेत्र पर एन्फोर्समंेट प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण करना था। एनसीसी और एनएसएस कैडेट्स को इस अभियान के लिए एक दिन पहले मिनी सचिवालय के मीटिंग हॉल में इसके लिए प्रशिक्षित किया गया था कि उन्हें जमीनी स्तर पर कैसे काम करना है। उनकी भूमिका मुख्य रूप से रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर को चैक करना,लोगों को जागरूक करना, पानी की लीकेज को चैक करना, अवैध टयूबवैल की सूचना देना तथा घरेलू कार्यो में एसी या आर ओ से पानी की बरबादी को रोकने के तरीके सुझाना था। वे इसे डोक्युमेंट करके देंगे। इसके अलावा, आईटीआई पलंबरो ने टीमों को तकनीकी सहयोग दिया। इन पलंबरो को पानी की बर्बादी को रोकने के बारे में जिला एक्शन प्लान के बारे में पहले से प्रशिक्षित और सूचित किया गया था। जलसंसद, एक नई पहल- एक नई पहल के रूप में, जिला प्रशासन द्वारा स्कूल में एक जल प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने के लिए ‘जल संसद‘ भी शुरू की गई है।

उपायुक्त अमित खत्री ने कहा कि जल संसद शुरू करने का उद्देश्य विद्यार्थियों की भागीदारी के माध्यम से ज्ञान को प्रसारित करना, छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासन के बीच जागरूकता पैदा करना, स्कूल में और घर पर पानी के उपयोग और अपव्यय का लेखा-जोखा करने के लिए कौशल विकसित करना, स्वः प्रेरित होकर काम करना तथा विद्यार्थियों में एक अपनत्व की भावना पैदा करना है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिला के 260 निजी स्कूलों को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें ब्रोशर के साथ अपने-अपने स्कूलों में जल संसद स्थापित करने का आदेश दिया गया है। स्कूल से मासिक आधार पर जल संसद पोर्टल पर अपनी गतिविधियों को अपडेट करते रहने की अपेक्षा की जाती है। उनकी गतिविधियों का मूल्यांकन विद्यार्थियों की भागीदारी और छोड़े गए प्रभाव के आधार पर होगा। विजेता को 27 सितंबर 2019 को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में ‘वाॅटर कोन्शियस स्कूल‘ का टाईटल देकर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में उनकी पहली जल संसद की बैठक होगी जिसका विवरण 1 अगस्त तक गुरुजल-जल संसद पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

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