
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:दीपावली के अवसर पर हरियाणा कारागार विभाग द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के प्रांगण में आयोजित स्टॉल को लगातार दूसरे दिन भी लोगों का भरपूर सहयोग मिला। हरियाणा की विभिन्न जेलों में बंद बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को खरीदने के लिए उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं और अन्य लोगों ने उत्साह दिखाया। उन्होंने बंदियों के हुनर, मेहनत और कला की सराहना करते हुए उनके बनाए सामान की जमकर खरीदारी की।

प्रदर्शनी में हरियाणा की विभिन्न जेलों में बंद बंदियों द्वारा अपने हाथों से तैयार की गई सजावटी वस्तुएं, घरेलू उपयोग का सामान, फर्नीचर, लकड़ी से बनी वस्तुएं, कलात्मक सामान और दीपावली से जुड़ी कई आकर्षक वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। इन उत्पादों की सुंदरता, बेहतर बनावट और बारीक कारीगरी ने उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं सहित अन्य लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लोगों ने न केवल इन उत्पादों को उत्सुकता से देखा, बल्कि अपनी पसंद के अनुसार उनकी खरीदारी भी की।

उच्च न्यायालय के अनेक अधिवक्ताओं ने बंदियों द्वारा तैयार सामान की गुणवत्ता और उनकी मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि बंदियों द्वारा इतनी सुंदर और उपयोगी वस्तुएं तैयार करना सराहनीय है। प्रदर्शनी में आए लोगों ने भी बंदियों के हुनर को प्रोत्साहित करते हुए उनके बनाए उत्पादों में रुचि दिखाई। इस दौरान प्रदर्शनी स्थल पर काफी उत्साह देखने को मिला। लोगों की ओर से मिल रही सराहना ने बंदियों की कला और मेहनत को एक नई पहचान देने के साथ-साथ उनका हौसला बढ़ाने का काम किया।

महानिदेशक, कारागार विभाग ए एस चावला ने कहा कि प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य बंदियों को अपनी कला और हुनर दिखाने के साथ-साथ उनके काम को पहचान दिलाना है। जब उनके द्वारा दिन-रात मेहनत से तैयार किए गए उत्पादों को लोग पसंद करते हैं और उनकी खरीदारी करते हैं, तो इससे बंदियों का हौसला और आत्मविश्वास बढ़ता है। लोगों की ओर से मिलने वाली प्रशंसा उन्हें यह विश्वास दिलाती है कि वे भी अपनी मेहनत, लगन और हुनर के दम पर जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

इस तरह के आयोजन बंदियों को अपनी गलतियों से सीखकर जीवन में नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही, उन्हें यह समझने का अवसर मिलता है कि सीखे गए हुनर के माध्यम से वे भविष्य में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं और अपने परिवार का सहारा बन सकते हैं। जेल से बाहर आने के बाद वे अपने हुनर को आजीविका का साधन बनाकर सम्मान के साथ जीवन जी सकें, इसी सोच के साथ विभाग द्वारा ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। यह पहल बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने और उन्हें समाज से दोबारा जोड़ने में भी मददगार साबित हो रही है।

हरियाणा कारागार विभाग द्वारा जेलों में बंद बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार के कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके तहत उन्हें हस्तकला, फर्नीचर निर्माण, सजावटी सामान तैयार करने और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने जैसे कामों से जोड़ा जा रहा है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को अपनी रुचि के अनुसार नया काम सीखने और अपने हुनर को बेहतर बनाने का अवसर मिल रहा है।

विभाग का प्रयास है कि जेल में रहने के दौरान बंदी अपने समय का सही उपयोग करें और कुछ नया सीखकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ें। प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे बंदियों को अपने काम की पहचान मिलती है और उन्हें प्रोत्साहन भी मिलता है। इन प्रयासों का उद्देश्य बंदियों को जेल से बाहर आने के बाद रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने में मदद करना है, ताकि वे अपने हुनर के माध्यम से आजीविका कमा सकें, अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा सकें और समाज में सम्मान के साथ नई शुरुआत कर सकें।
चावला ने कहा कि इस तरह की प्रदर्शनियां केवल बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से बंदियों को समाज के सामने अपनी कला और मेहनत दिखाने का अवसर भी मिलता है। लोगों द्वारा उनके बनाए सामान को पसंद करना और खरीदारी करना इस बात का प्रमाण है कि समाज भी उनके प्रयासों को सराहना और प्रोत्साहन दे रहा है। इस पहल से समाज में बंदियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिलती है। यह प्रदर्शनी संदेश देती है कि गलती करने वाले व्यक्ति को भी सुधार का अवसर मिलना चाहिए। सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिलने पर बंदी भी अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं और अपनी मेहनत से एक बेहतर भविष्य बना सकते हैं। जेल में सीखे गए हुनर के माध्यम से वे जेल से बाहर आने के बाद रोजगार प्राप्त कर सकते हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा कारागार विभाग का प्रयास है कि बंदियों को केवल जेल तक सीमित न रखा जाए,बल्कि उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़कर जीवन में आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएं। विभाग बंदियों के सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए लगातार काम कर रहा है, ताकि वे जेल से बाहर आने के बाद सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें और समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बन सकें। दीपावली के अवसर पर आयोजित यह प्रदर्शनी इसी सोच को आगे बढ़ाने वाली एक अच्छी पहल है, जो हुनर, मेहनत और नई शुरुआत का संदेश देती है।
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