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यही कांग्रेस का दोहरा रवैया है कि जीत पर ‘लोकतंत्र जिंदाबाद’, हार पर ‘चुनाव आयोग मुर्दाबाद-शिवराज चौहान

अजीत सिन्हा / नई दिल्ली 
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकासमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बुधवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी केकेंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया और कहा कि लगातार चुनावी हारके बावजूद कांग्रेस आत्मचिंतन और माफी मांगने के बजाय भ्रम, आरोप और झूठ फैला रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा किइंडी गठबंधन की बैठक में प्रमुख सहयोगी दलों की अनुपस्थिति ने उसकी एकजुटता परसवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ को परिवारवाद बचाने का प्रयास बताते हुए कहा कि जनता परिवारवाद की राजनीतिको स्वीकार नहीं करेगी।  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधनसंवैधानिक संस्थाओं, न्यायपालिका और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनीहार का बहाना खोज रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक के बाद एक चुनावमें कांग्रेस की हार के बाद देश यह सोचता था कि कांग्रेस अपनी गलतियों पर जनता सेमाफी मांगेगी और आत्मचिंतन करेगी।

लेकिन कांग्रेस ने तय कर रखा है कि हम नहींसुधरेंगे। चाहे मल्लिकार्जुन खड़गे हों या राहुल गांधी, कांग्रेस लगातार अपनी गलतियों पर माफी मांगने के बजाय भ्रम फैला रहे हैं, झूठ बोल रहे हैं और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। आजइंडी गठबंधन की बैठक थी, लेकिन बैठक के पहले ही गठबंधन बिखर गया। उत्तर प्रदेशजैसे राज्य, जहां चुनाव होने वाले हैं, अगर मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है तो अखिलेश यादव बैठक में क्यों नहीं थे? एम. के. स्टालिन भी नहीं थे। डीएमके ने तो कह दिया हैकि जहां कांग्रेस रहेगी, हम बैठेंगे ही नहीं। अरविंद केजरीवाल भी नहीं थे।उद्धव ठाकरे फिजिकली नहीं जुड़े, वर्चुअली जुड़े। वहीं, हेमंत सोरेन का अता-पता नहीं था। इंडी गठबंधन की हालत तो यह हो गई है कि ‘एक दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई इधर गिरा, कोई उधर गिरा।’ सच तो यह है कि इंडी गठबंधन राहुल गांधी को नेता मानने के लिए तैयार नहींहै। यह राहुल गांधी की अपने आपको स्थापित करने और री-लॉन्च करने की 50वीं बार कोशिश है। मगर आखिर वे कितनी बार कोशिशकरेंगे? इंडी गठबंधन तो राहुल गांधी को नेता मानता ही नहींहै। कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक में राहुल गांधी कह रहे थे कि, “मुझ पर भरोसा करो, मुझ पर भरोसा करो, मुझ पर विश्वास करो।” अर्थात् कांग्रेस को ही राहुल गांधी पर भरोसा नहीं है। ये अलग-अलग तरह सेभ्रम फैला रहे हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी इंडी गठबंधन की जोबैठक हुई, उसका नतीजा है—शून्य विजन, 100 प्रतिशत हताशा और हार का एडवांस बहाना। आने वाले चुनाव से पहले ही हार कीभूमिका तैयार कर दो। ये अभी से हार के बहाने ढूंढ रहे हैं। 2 से 8 अक्टूबर तक कार्यक्रम घोषित किया गया है, ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’। यह ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ नहीं है, यह ‘सेव डायनेस्टी मार्च’ है। लेकिन जनता ने तय कर लिया है कि अब परिवारवाद की राजनीति चलने नहींदेंगे। राहुल गांधी ने बंगाल चुनाव के पहले एक वीडियो जारी करके कहा था कि ममता बनर्जी की गलतियों के कारण बंगाल में भाजपा जीत रही है। एसआई आर के कारण नहीं, ममता बनर्जी की गलतियों के कारण भाजपा जीत रही है।राहुल गांधी ने खुद ही असली कारण बता दिया था। जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, तब इंडी गठबंधन, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे या तो अदालतों पर सवाल उठाने लगते हैंया संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण करने लगते हैं। अगर कोई अदालत मन के मुताबिकफैसला न दे, तो न्यायपालिका पर सवाल उठाते हैं। राहुल गांधी कोइसका जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी विदेशी धरती पर जाकर विदेशी शक्तियों से भारतके लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने की वकालत करते हैं। ये देश की बात करेंगे? देश के लोकतंत्र की बात करेंगे? सारी तिकड़में करने के बाद भी जब जनता के दिल सेयशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को नहीं हटा पाए, तो एक बार फिर देश में अराजकता और अशांति फैलाने कीसाजिश रच रहे हैं। चौहान ने कहा कि वोट चोरी की बात करने वाले पहलेखुद का आकलन करें। भ्रष्टाचारियों और गड़बड़ी करने वालों को अब जनता वोट नहींदेती। जनता वोट प्रदर्शन और काम के आधार पर देती है। ये लोकतंत्र की बात करते हैं? कांग्रेस ने 50 से ज्यादा बार निर्वाचित सरकारों को भंग करने का पाप किया है।मुख्यमंत्रियों को कपड़े की तरह बदलने वाले अगर कोई थे, तो कांग्रेस के लोग थे। कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाया। ये लोकतंत्र कीबात करेंगे? शुद्ध वोटर लिस्ट लोकतंत्र की आत्मा है। अगर वोटर लिस्ट शुद्ध नहीं हुई, तो लोकतंत्र मर जाएगा। वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण काकाम क्यों नहीं होना चाहिए? जो व्यक्ति इस दुनिया में नहीं है, जीवित ही नहीं है, उसका नाम वोटर लिस्ट में क्यों होना चाहिए? जो शहर या गांव में दो जगह रह रहा है, तो एक जगह से उसका नाम क्यों नहीं कटना चाहिए? जो देश का नागरिक ही नहीं है, उसका नाम वोटरलिस्ट में क्यों होना चाहिए? वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण तो होना ही चाहिए। सच यह हैकि कांग्रेस एंटी-इन्कंबेंसी की बात करती है, लेकिन इंडी गठबंधन में ही एंटी-आईएनसी है, एंटी-कांग्रेस है। इनके इरादे कभी सफल नहीं होंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कांग्रेस की हारकी हताशा है। अगर जीत गए तो ‘लोकतंत्र जिंदाबाद’, हार गए तो ‘चुनाव आयोग मुर्दाबाद’। सच यह है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा में घमासान मचा हुआ है।इसीलिए अखिलेश यादव नहीं आए, किसी और को भेज दिया। जब बंगाल में चुनाव था, तब राहुल गांधी छाती पीट रहे थे और अब ताली पीटने काकाम कर रहे हैं। यह ‘हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और’ वाली बात है। इंडी गठबंधन के नेता राहुल गांधी कोअपना नेता मानने के लिए मन से तैयार ही नहीं हैं। दिल पर हाथ रखकर, अंतरात्मा से अखिलेश यादव या इंडी गठबंधन के कोई बड़ेनेता यह कह दें कि राहुल गांधी उनके नेता हैं, तो हम मान जाएंगे। चुनाव आयोग तय करेगा कि क्या करना है और क्या नहीं करनाहै। विपक्षी दल यह तय नहीं करेंगे। संवैधानिक संस्थाएं अपना काम करेंगी। सारीदुनिया भारत के लोकतंत्र और ईवीएम को जानती है। इसी ईवीएम से कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस जीती है।ममता बनर्जी तय नहीं करेंगी कि देश का प्रधानमंत्री कौन रहेगा और राज्य कामुख्यमंत्री कौन रहेगा। यह देश की जनता तय करती है कि कौन प्रधानमंत्री बनेगा औरकौन मुख्यमंत्री बनेगा। जिसको जनता विश्वास देती है और वोट देती है, वही पद पर रहता है। यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  ने अगर कब्जा किया है, तो जनता केदिलों पर कब्जा किया है

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