अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:जिला बार एसोसिएशन फरीदाबाद के आगामी 11 सितंबर 2026 को होने वाले चुनावों को लेकर कचहरी परिसर में चुनावी सरगर्मी अपने चरम और उबाल पर है। इस बार का चुनावी दंगल बेहद रोमांचक और तूफानी रूप ले चुका है, जहां मुख्य तौर पर तीन प्रमुख गुटों के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिल रही है। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों और उनके गुटों की सक्रियता ने वकीलों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

चुनावी मैदान की मुख्य तस्वीर और गुटगत समीकरण:
इस बार प्रधान पद के लिए मुख्य तीन गुटों से ताल ठोक रहे उम्मीदवार मैदान में डटे हैं:
बॉबी रावत (अपने गुट के समर्थन के साथ मैदान में)
राजेश बैसला (अपने गुट की मजबूत दावेदारी के साथ)
ओमदत्त कौशिक (ओम कौशिक) (अपने गुट के साथ तूफानी प्रचार में जुटे)
इन प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा 6 निर्दलीय उम्मीदवार के साथ साथ अन्य पदों के उम्मीदवार भी पूरी ताकत के साथ चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर रहे हैं, जिनमें वंदना सिंह भाटी,ज्योति अग्रवाल, मोहन यादव, धनीराम और मनोज नागर,नरेन्द्र शर्मा,शामिल हैं। बार एसोसिएशन के कुल 3462 मतदाता (अधिवक्ता) इन सभी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 11 सितंबर को मतदान के जरिए करेंगे।
अधिवक्ताओं की पैनी नजर और उनकी राय:
इस हाई-प्रोफाइल चुनाव और गर्माते माहौल को लेकर फरीदाबाद बार के वरिष्ठ और सम्मानित अधिवक्ताओं ने अपनी बेबाक राय रखी है:
एडवोकेट बार काउंसिल पंजाब एंड हरियाणा के पूर्व सदस्य एडवोकेट शिवदत्त वशिष्ठ,की राय:
“यह चुनाव केवल पदों की दौड़ नहीं है, बल्कि यह बार और बेंच के बीच के समन्वय और अधिवक्ताओं के वास्तविक कल्याण को तय करने वाला चुनाव है। बार हाउस की गरिमा, अधिवक्ताओं के चैंबरों की सुविधाएं और जूनियर वकीलों के हितों की रक्षा करने वाले जुझारू नेतृत्व को ही मतदाता इस बार चुनेंगे। मुकाबला कड़ा है, लेकिन जीत उसी की होगी जो वकीलों के बीच जमीन पर उतरा है।”
एडवोकेट सतवीर शर्मा,आमिर खान की राय:
“इस बार का चुनाव पूरी तरह से मुद्दों और कार्यशैली पर केंद्रित है। तीन प्रमुख गुटों के साथ-साथ मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों ने समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। जो प्रत्याशी बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग के वकील के साथ खड़ा नजर आया है, अधिवक्ताओं का समर्थन उसी के पक्ष में जाएगा।”
एडवोकेट देवेंद्र त्यागी व इंजिनियर अनूप वशिष्ठ,आकाश नागर एडवोकेट की राय:
“चुनावी माहौल बेहद गरमाया हुआ है और हर गुट अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है। कुल 3462 वोटों का यह बड़ा आंकड़ा किसी भी उम्मीदवार की जीत या हार तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। बार के विकास और वकीलों के मान-सम्मान के लिए एक मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व की इस समय सबसे ज्यादा जरूरत है।”
एडवोकेट संजय दीक्षित,प्रेम चन्द सैनी एडवोकेट की राय:
“फ्री और फेयर इलेक्शन बार की असली ताकत होते हैं। इस बार मतदाताओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। सभी उम्मीदवार अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन असली फैसला 11 सितंबर को वोटिंग के बाद ही सामने आएगा। मतदाता इस बार बहुत समझदारी से अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे।”
निष्कर्ष:
चुनावी प्रचार के अंतिम दौर में हर गुट और हर उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है। चाय की थड़ियों से लेकर बार रूम तक बस इसी बात की चर्चा है कि इस बार बाजी किसके हाथ लगेगी। अब देखना यह होगा कि 11 सितंबर 2026 को होने वाले इस घमासान में फरीदाबाद बार एसोसिएशन की कमान किसके हाथों में सौंपी जाती है।
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