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बिहार की भाजपा सरकार ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कीं, छात्रों के साथ आतंकियों जैसा सलूक किया गया-कांग्रेस


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:बिहार में छात्रों पर हुई पुलिस की बर्बरता पूर्ण कार्रवाई के मामले में कांग्रेस की छह फ़ैक्ट-फाइंडिंग टीमों ने सोमवार को कहा कि भाजपा सरकार ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी हैं। राज्य के छह जिलों में पड़ताल के बाद टीम ने बताया कि पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों के साथ आतंकियों जैसा सलूक किया गया और एके-47 जैसे घातक हथियार की गोलियों से कई छात्र घायल हुए हैं। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और फ़ैक्ट-फाइंडिंग टीमों के सदस्यों राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी,सांसद पप्पू यादव, सांसद मनोज कुमार, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब, आदिवासी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, विधायक जयवर्धन सिंह और कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक बसोया ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा हक मांगने पर छात्रों को रोजगार देने के बजाय लाठीचार्ज, फर्जी एफआईआर और गोलियां दी जा रही हैं।
फ़ैक्ट-फाइंडिंग टीमों ने विभिन्न जिलों में पीड़ित छात्रों, युवाओं, प्रत्यक्षदर्शियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों से मिलकर जमीनी सच्चाई जानी।
कृष्णा अल्लावरू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मित्र अडानी को बिहार में एक रुपए में हज़ार एकड़ जमीन दे दी, जबकि छात्रों के हिस्से में पैलेट गन, लाठीचार्ज, एके-47 की गोली और एफआईआर आ रही हैं। उन्होंने राज्य के छात्रों और युवाओं के हवाले से प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि अगर वे अडानी को हजार एकड़ जमीन एक रुपये में दे सकते हैं तो सभी भर्ती परीक्षाओं की फीस एक रुपया क्यों नहीं कर सकते?इसके साथ ही फ़ैक्ट-फाइंडिंग टीमों ने सरकार से मांग की कि परीक्षा केंद्र कमिश्नरी या जिला स्तर पर ही बनाए जाएं, ताकि छात्रों पर यात्रा और दूसरी जगह ठहरने का खर्च न पड़े। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी सरकारी भर्तियों के लिए समयबद्ध और पारदर्शी एग्जाम कैलेंडर जारी करे तथा गरीब छात्रों के लिए एक गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म तैयार किया जाए। साथ ही कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छात्रों को परेशान करना तुरंत बंद किया जाए। फैक्ट फाइंडिंग टीमों के सदस्यों ने आरोप लगाया कि बिहार में छात्रों और युवाओं के साथ आतंकवादियों जैसा सलूक किया गया। युवाओं को रात में उनके घरों से पकड़ा गया, उनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई। युवाओं के माता-पिता की कनपटी पर बंदूक रखकर धमकी दी गई कि अगर आपके बच्चे सरकार के खिलाफ आवाज उठाएंगे तो उनका एनकाउंटर कर दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि सीवान में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसकर्मियों द्वारा गोलियां चलाई गईं। शुरुआत में पुलिस घटना से इनकार करती रही, लेकिन बाद में एके-47 और पिस्तौल से गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया। इस घटना में एक छात्र के कंधे पर, दूसरे की गर्दन पर और अग्निवीर की मेडिकल परीक्षा पास कर चुके एक अन्य युवा के घुटने पर गोली लगी।फ़ैक्ट-फाइंडिंग टीमों के सदस्यों ने पुलिस की संवेदनहीनता को रेखांकित करते हुए बताया कि अग्निवीर उम्मीदवार के पैर में गोली लगने के बावजूद पुलिस ने 40 मिनट तक उसी पैर पर लाठियां भी बरसाईं। उन्होंने कहा कि छात्रों पर एके-47 से गोली चलने की घटना देश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुई। जिन बच्चों को प्रदर्शन के बाद घर से उठाया गया, उन पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गईं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्णिया में लिखित अनुमति लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे छात्रों को घेरकर पीटा गया, जिसके वीडियो साक्ष्य पार्टी के पास मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की भाजपा सरकार ने आंदोलन के बाद 117 छात्रों के नाम अपराधियों की तरह अखबार में प्रकाशित कर उन्हें कलंकित किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा कोई नियम है, जिसके तहत निर्दोष छात्रों का चेहरा अखबारों में छापकर उन्हें बिना सबूत अपराधी घोषित कर दिया जाए।उन्होंने यह भी बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री को लिखी गई चिट्ठी और बिहार कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने छात्रों पर से मुकदमे वापस लेने की अधिसूचना तो जारी की, लेकिन इसके बावजूद विशेष रूप से छात्र नेताओं को उनके वर्षों पुराने राजनीतिक मामले निकालकर निशाना बनाया जा रहा है।इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की बर्बर कार्रवाई, खासकर शांति से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर एके-47 के इस्तेमाल को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि एके-47 का इस्तेमाल किसके कहने पर किया गया और कहा कि अगर यह कार्रवाई उनके कहने पर हुई है, तो दोनों को इस्तीफा देना चाहिए।

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