
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:बीते ढाई सालों से ग्रीन फील्ड कॉलोनी, फरीदाबाद में प्लॉटों की रजिस्ट्री लगातार बंद होने से प्लॉट धारकों का गुस्सा अर्बन इंप्रूवमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड के खिलाफ बढ़ता ही जा रहा हैं। हजारों प्लॉट धारकों का ये गुस्सा कभी विरोध प्रदर्शन में बदल सकता है, उनके ग्रीन फील्ड, फरीदाबाद के साइट ऑफिस पर प्लॉटधारक एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सकते है। कंपनी ने प्लॉटों की ट्रांसफर भी यूआईसी के नवनियुक्त बोर्ड ने तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया है। इससे प्लॉट धारकों का गुस्सा कंपनी के प्रति और ज्यादा बढ़ गया है। इस मामले में अर्बन इम्प्रूवमेंट कंपनी लिमिटेड के नॉमिनी डायरेक्टर संजीव कौशल से फोन पर बात की गई तो उनका कहना है कि उन्हें यूआईसी का नॉमिनी डायरेक्टर सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया है, जहां तक ग्रीन फील्ड, फरीदाबाद के प्लॉटों की रजिस्ट्री न होने का मामला है ,वह काफी लंबा मामला है। अभी उनकी वीडियो कांफ्रेंसिंग होनी है, इसके बाद आपसे इस मामले में बातचीत करता हूँ। ये बात अथर्व न्यूज़ से सोमवार की थी। इसके बाद अथर्व न्यूज़ ने उनसे सोमवार, मंगलवार, आज बुधवार को फोन पर संपर्क किया, ताकि उनसे से प्लॉटों की रजिस्ट्री लगातार ढाई सालों से बंद होने का सही कारण, और आगे प्लॉटों की रजिस्ट्री कब से शुरू होगी, की सही जानकारी ले सकें। इस के बाद फरीदाबाद के बड़खल एसडीएम व यूआईसी के डायरेक्टर त्रिलोक चंद से बात की गई तो उनका कहना है कि कुछ लोग उनके पास आए थे और रिपेंटेशन देकर गए है, मैं इनके रिपेंटेशन को पढूंगा, इसमें उन्हें 3-4 दिन लगेंगे, इसके बाद यूआईसी के चैयरमेन संजय सूद के पास भेजूंगा.
यूआईसी के चेयरमैन संजय सूद के ओएसडी सतेंद्र चौहान का कहना है कि प्लॉट ट्रांसफर के मामले में आज बुधवार को कहा कि कई प्रॉपर्टी डीलरों ने करोड़ों रुपए इन्वेस्ट करके ग्रीन फील्ड कॉलोनी में प्लॉट ले ली है। बीते दिनों उनमें से कुछ प्रॉपर्टी डीलर उनके पास आए थे,उनके ऊपर चढ़ने लगे,और कहने लगे की प्लॉटों का ट्रांसफर करों, जब उन्हें कहा गया की लीगल एडवाइज लेने के बाद ही, आगे प्लॉटों की ट्रांसफर होगी। क्यूंकि इससे पहले यूआईसी में लीगल सेल नहीं थी। अब अर्बन इंप्रूवमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में लीगल सेल बन गई है। अब जो भी कार्य होगा इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। अब प्लॉटों के ट्रांसफर होने में लगभग 2 से 3 महीने लग सकते है। इससे अधिक भी लग सकते है जहां तक यूआईसी प्लॉटों की रजिस्ट्री के नाम पर लीगल चार्जेज के नाम पर 3000 रुपए लेती थी। अब लीगल चार्जेज के नाम पर 50000 रुपए देने होंगे। इससे भी अधिक हो सकती है। जहां तक प्लॉट ट्रांसफर की बात है, वह तो जल्दी खोलने की कोशिश करेंगे, क्यूंकि इससे कंपनी की कमाई होती है।
प्लॉट धारक हंस राज आहूजा, योगेश बिंदल,सुंदर भड़ाना, केशव अग्रवाल,राकेश कपूर,अजय शर्मा,अजय महेन्द्रू,गुलाब गुप्ता,धीरज व राजपाल चौहान, विश्वनाथ कक्क्ड़ व अशोक कुमार का कहना है कि अर्बन इम्प्रूवमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के नए बोर्ड ने प्लाट धारकों का मजाक बना कर रख दिया है। पिछली बोर्ड ने 2 साल से अधिक समय तक प्लॉटों की रजिस्ट्री बंद रखी हुई थी। उस समय ये बताया जा रहा था कि यूआईसी में बोर्ड कम्पलीट नहीं है। इसलिए प्लॉटों की रजिस्ट्री बंद है। लम्बें इंतजार के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूआईसी में नए बोर्ड का गठन किया गया। गठित किए गए नए बोर्ड में चेयरमैन के पद पर संजय सूद, डायरेक्ट के पद पर बड़खल एसडीएम त्रिलोक चंद और नॉमिनी डायरेक्टर के पद पर सीनियर आईएएस संजीव कौशल नियुक्त है। ये लोग भी करीब 2 महीने बीत जाने के बाद भी प्लॉट धारकों और ग्रीन फील्ड कॉलोनी,फरीदाबाद के हजारों निवासियों की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ भी नहीं किया। अब हजारों लोग यूआईसी के नए बोर्ड के खिलाफ प्लॉट धारकों और ग्रीन फील्ड कॉलोनी के निवासियों का गुस्सा चरम पर है। जल्दी ही इनकी ये गुस्सा ग्रीन फील्ड कॉलोनी के साइट ऑफिस पर विरोध प्रदर्शन के रूप में दिखाई देगी। उपरोक्त लोगों का कहना है कि नए बोर्ड में बैठे लोग प्लॉटों के ट्रांसफर के नाम पर प्रत्येक प्लॉट धारकों से लाखों रुपए ले रही है, म्यूटेशन के नाम पर पैसे ले रही है, पर रजिस्ट्री करने के नाम पर भी पैसे लेती है, पर ट्रांसफर के मुकाबले बहुत कम पैसे लेती है। इसी लिए कंपनी प्लॉट धारकों के प्लॉटों की रजिस्ट्री बीते ढाई सालों से बंद की हुई है। कंपनी प्लॉट धारकों से ज्यादा पैसा वसूलना चाहती है। इसी लिए अभी तक उनके पास 987 प्लॉटों की रजिस्ट्री पेंडिंग है। और इस मामले में लीगल सेल को घसीट लिया है। अब लीगल सेल के नाम पर रजिस्ट्री के समय 3000 रुपए जो लेती थी, अब इसी रकम को बढ़ा कर 50000/- रुपए लेने के फ़िराक में हैं। एक पार्षद ने बीते दिनों यूआईसी के चेयरमैन संजय सूद व उनके ओएसडी सतेंद्र चौहान को सोशल मीडिया पर अपनी स्पीच में भ्रष्टाचारी कहा था। अब उनकी बातों को ग्रीन फील्ड के लोग सच मानने लगे है। वही, लोगों ने कहा कि प्राइवेट संस्थान में भ्रष्टाचारी नहीं, बल्कि लूटेरे होते है। क्यूंकि जो हरकतें लम्बें समय से, और अब जो बातें यूआईसी की तरफ से, और उनका काम करने का तरीका सामने आ रही है। इससे यही प्रतीत होता है।

