
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में जेवर-यमुना सिटी को 17,800 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की ऐतिहासिक सौगात मिली है। शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि जो जेवर कभी ‘जंगलराज’ के लिए कुख्यात था, आज वो ‘मंगलराज’ के रूप में उभरकर उत्तर भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब बनने जा रहा है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि आज जेवर दुनिया की सबसे बड़ी ताकत यानी ‘सेमीकंडक्टर’ का केंद्र बिंदु बन रहा है। यहाँ कोरिया के साथ जॉइंट वेंचर के जरिए 6,785 करोड़ का निवेश हो रहा है। सीएम ने उत्तर प्रदेश और कोरिया के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों राजकुमारी रत्ना को भी याद किया। उन्होने कहां अब भारत उन चीजों का आयात बंद करेगा जो पहले बाहर से आती थीं, बल्कि अब जेवर में बनी चीजें दुनिया भर में निर्यात होंगी। अकेले गौतमबुद्ध नगर आज देश का 55 प्रतिशत मोबाइल फोन उत्पादित कर रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जनता को बेहद आसान भाषा में पीसीबी (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड) के बारे में समझाया। उन्होंने बताया भारत को अब तक हर साल 40 हजार करोड़ रुपये का पीसीबी आयात करना पड़ता था, लेकिन अब इसका निर्माण सीधे जेवर में होगा। असेंट-के सर्किट परियोजना के तहत यहाँ फ्लेक्सिबल पीसीबी, हाई डेंसिटी इंटरकनेक्टेड पीसीबी (HDI) और सेमीकंडक्टर सब्सट्रेट्स बनाए जाएंगे। अंबर एंटरप्राइजेज करीब 3,532 करोड़ के निवेश से 100 एकड़ में विशाल प्लांट लगाएगी, जहाँ कंप्यूटर, एसी और मदरबोर्ड के कंपोनेंट्स बनेंगे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंच से एक और बहुत बड़ी खुशखबरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में स्वीकृत बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली से लखनऊ, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन चलेगी। इस हाई-स्पीड नेटवर्क के जुड़ने से जेवर से लखनऊ का सफर मात्र 1 घंटे 40 मिनट में पूरा हो सकेगा। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बताते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के इस नए क्षेत्र में 50 प्रतिशत से अधिक महिला कामगार होती हैं। ऐसे में यह निवेश न सिर्फ युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा
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